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फसल अवशेष जलाने पर अटका 15 लाख रूपये का जुर्माना, अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निपटेगा

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र। खेतों में पराली जलाने वालों पर डीसी से लेकर गांव के सरपंच तक की कड़ी निगरानी के बावजूद इस बार भी जिले में 122 गांवों में 737 जगहों पर पराली में आग लगाई गई। सेटेलाइट से जुटाए आंकड़ों में से हालांकि 30 के करीब जगहों की पहचान नहीं हुई।
700 जगहों पर 1250 एकड़ में फसल अवशेष जलाने पर करीब 18 लाख रुपये का किसानों पर जुर्माना किया गया। इसमें से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तीन लाख रुपये जुर्माने के तौर पर वसूल पाया। करीब 15 लाख रुपये अभी भी अटके हैं। हालांकि विभाग के अधिकारी संबंधित किसानों के घर-घर जाकर जुर्माना भुगतने की अपील कर रहे है तो वहीं जुर्माना न भरने वाले किसानों को यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। ऐसे किसानों की सूची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी जाएगी और बोर्ड की ओर से ही उन्हें न केवल नोटिस जारी किए जाएंगे बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके लिए न केवल प्रदेश सरकार की ओर से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों को हिदायत जारी कर दी गई है बल्कि विभाग ने भी यह तैयारी कर ली है। इसके अनुसार अगले 10 से 15 दिनों बाद ही यह मामला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास भेजा जा सकता है जबकि इससे पहले सूचना नोटिस विभाग की ओर से भी दिए जाने के निर्देश दे दिए गए हैं।
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पिछले साल सामने आए थे 988 मामले
पिछले साल भी धान के सीजन में फसल अवशेष जलाने के 988 मामले सामने आए थे। संबंधित किसानों पर 4 लाख 60 हजार रुपये जुर्माना किया गया था। किसानों ने महज 2 लाख 92 हजार 500 रुपये का ही भुगतान किया था। एक लाख 67 हजार 500 रुपये का जुर्माना विभाग नहीं वसूल सका था। हालांकि सरकार की ओर से बरती नरमी के चलते इन किसानों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

एसडीएम रहे नोडल अधिकारी, तो हर दो गांव पर एक अधिकारी को दिया जिम्मा
बता दें कि इस बार फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए जहां संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को नोडल अधिकारी बनाया गया। वहीं डीसी से लेकर गांव के सरपंच तक भी पूरे सीजन के दौरान निगरानी करते रहे। यही नहीं एक अधिकारी को दो गांवों में निगरानी के लिए तैनात किया गया था।

गांव बीड़ सुजरा व गुढ़ा में नहीं जले अवशेष
जिले के 419 गांवों में से 287 गांव ऐसे पाए गए जहां फसल अवशेष नहीं जलाए गए। लेकिन बाबैन खंड के गांव बीड़ सुजरा व लाडवा के गांव गुढ़ा के किसानों की फसल अवशेष जलाने से रोकने की रणनीति को देख डीसी भी हैरान रह गए थे। वह खुद इन गांवों में पहुंचे थे और किसानों से बातचीत भी की। इसमें किसानों में आई जागरूकता ही बड़ा तथ्य पाया गया। उपायुक्त ने इन गांवों की पंचायतों को सम्मानित भी किया।

सरकार की हिदायत अनुसार की जाएगी कार्रवाई : डीडीए
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ प्रदीप कुमार मिल का कहना है कि उन्होंने हाल ही में यहां ज्वाईन किया है, लेकिन सरकार की ओर से फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना वसूल करने को लेकर सरकार की ओर से जारी हिदायत अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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किसानों में जागरूकता की कमी : एडीसी
एडीसी अनीश यादव का कहना है कि फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए कड़ी सख्ती करते हुए प्रशासनिक स्तर पर भरसक प्रयास किए गए। किसानों को जागरूक भी किया गया, लेकिन आज भी किसानों में जागरूकता की कमी है। इसके चलते 737 जगहों पर आग लगाए जाने के मामले सामने आए हैं। भविष्य में और सख्ती बरती जाएगी।
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