कुरुक्षेत्र। भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा के प्रयासों से चार दशक पहले ब्रह्मसरोवर का कायाकल्प कर इसे पवित्रता और सुंदरता के अनूठे संगम के रूप में विख्यात किया। पिछले चार दशकों में यह सरोवर देश-दुनिया से यहां पहुंचने वाले यात्रियों के लिए खास दर्शनीय स्थल बना है। ब्रह्मसरोवर का महत्व यहां लगे पत्थरों और यहां की हरियाली से ज्यादा इसके पवित्र जल से है। इसी वजह से मौजूदा सरकार ने ब्रह्मसरोवर में पवित्र जल के लिये 17 करोड़ रुपये से अधिक का प्रोजेक्ट मंजूर किया था।
डेढ़ वर्षों में ब्रह्मसरोवर का सौंदर्यकरण के अलावा केवल चलायेमान जल प्रोजेक्ट पर 17 करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं। इसी बीच ब्रह्मसरोवर को एक और उपलब्धि ठीक 12 दिन पहले मिली, क्योंकि भारत सरकार ने कुरुक्षेत्र के पवित्र ब्रह्मसरोवर को देश के 30 प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों की सूची में रखा है। यानी उस महत्वपूर्ण सूची में जिसमें ताजमहल, स्वर्ण मंदिर, तिरुपति बालाती मंदिर आंध्रप्रदेश, सोमनाथ मंदिर जैसे 30 प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों का नाम शुमार किए गए हैं। सरकार के इस निर्णय से कुरुक्षेत्र का नाम पर्यटन और धार्मिक क्षेत्र में एक ओर नया मुकाम हासिल करेगा। जिला प्रशासन द्वारा जारी चंडीगढ़ और कुरुक्षेत्र में जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में तब बताया गया था इस प्रोजेक्ट को भारत सरकार के पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के साथ-साथ गृह एवं शहरी कार्य विभाग भारत सरकार, पर्यटन एवं सांस्कृतिक विभाग राज्य सरकार के सहयोग से पूरा किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत भारत सरकार देश के 30 प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों को तीन चरणों में स्वच्छ बनाएगी। इस निर्णय के अनुसार तीसरे चरण में 10 तीर्थों को स्वच्छ प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों की सूची में शामिल किया है, जिसमें कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर का नाम भी शामिल है। ब्रह्मसरोवर के चयन की जानकारी हैदराबाद में 25 और 26 जून 2018 को भारत सरकार की तरफ से दो दिवसीय कांफ्रेंस के दौरान दी गई थी। मगर इस घोषणा के 12 दिन बाद ब्रह्मसरोवर के स्वच्छ जल के जो हालात दिख रहे हैं, वो काफी दयनीय है।