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दो वर्षों में आयुर्वेदिक दवाओं पर करीब डेढ़ करोड़ रूपये का बजट खर्च , स्टोरेज के लिए आज तक नहीं बन पाई बेहतर व्यवस्था

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कुरुक्षेत्र। प्रदेश के एकमात्र श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए हर वर्ष लाखों रुपये की दवाएं विभिन्न राज्यों से खरीद कर लाई जाती है, लेकिन आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल प्रशासन के पास आज तक भी इन दवाओं के रखने के लिए बेहतर व्यवस्था नहीं हो पाई है। अस्पताल बनने के 19 वर्षों बाद भी दवाओं को बिना उचित तापमान के खुले हॉल में रखा जा रहा है, जहां अनेकों प्रकार की दवाएं खराब होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इतने लंबे समय के बाद पिछले एक वर्ष से जागे प्रशासन को जब दवाओं की उचित व्यवस्था के लिए सभी उचित सुविधाओं युक्त स्टोर की आवश्यकता महसूस हुई तो पत्राचार शुरू हुआ, लेकिन विभाग ने आज तक भी इसे गंभीरता से नहीं लिया है।
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जानकारी के मुताबिक वर्ष 1999 से आयुर्वेदिक अस्पताल अपने भवन में चल रहा है जबकि इससे पहले श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में ही यह चलाया जाता रहा था। अस्पताल बनने के बाद जहां मरीजों में आयुर्वेदिक इलाज लेने को लेकर विश्वास भी बढ़ा तो अब यहां हर रोज करीब 350 ओपीडी भी होने लगी। मरीजों की बढ़ती संख्या को देख कॉलेज एवं अस्पताल प्रशासन की ओर से दवाओं की मांग भी अधिक की जाने लगी। हालांकि पिछले चार वर्षों से पहले यहां अधिकतर दवाओं की भी भारी किल्लत रही, लेकिन पिछले तीन वर्षों से लगभग सभी दवाएं अस्पताल में मौजूद रहने लगी है। इसके बावजूद भी आज तक अस्पताल में इन दवाओं के लिए मौसम से लेकर नियमानुसार दवाई स्टोरेज के लिए उचित व्यवस्था नहीं की जा सकी है, जिससे हर समय लाखों रूपये की दवाएं खराब होने का खतरा बना रहता है तो वहीं आयुर्वेद को बढ़ावा देने व मरीजों को उचित इलाज देने के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

दो वर्षों में खरीदी एक करोड़ 45 लाख की दवा
आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज के लिए पिछले वर्ष जहां करीब 90 लाख रुपये की दवाएं मंगवाई गई तो इस बार 55 लाख रुपये का बजट दवाओं पर खर्च किया गया। इन दवाओं में से अधिकतर पहुंच भी चुकी है तो अनेकों दवाएं पिछले वर्ष की भी बची है, लेकिन अब प्रशासन के समक्ष इन दवाओं को नियमानुसार और बेहतर व्यवस्था के तहत रखने का संकट खड़ा हो गया है। इन दवाओं में कई प्रकार के ऐसे सीरप भी है, जिनके उचित तापमान न मिलने पर जल्द खराब होने की संभावना बनी रहती है।
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फंगस होने का बन जाता है खतरा
विशेष तौर पर सीरप व अन्य दवाओं को उचित व नियमानुसार तापमान में न रखे जाने पर इनमें फंगस का खतरा मंडराने लगता है। वर्ष 2016 में अस्पताल प्रशासन के समक्ष ऐसा मामला आ भी चुका है। हालांकि इन दवाओं में खामी के चलते चिकित्सकों ने मरीजों को देने से इंकार कर दिया था तो वहीं इनमें से एक दवा में फंगस भी बन गया था। अभी यह मामला विभाग के निदेशालय में ही लंबित है।

तीन-तीन जगह रखी गई दवाएं
बता दें कि आयुर्वेदिक अस्पताल में जहां खुले हॉल में बड़ी मात्रा में दवाएं रखी हुई है तो वहीं स्टोर के नाम पर बनाए एक छोटे कमरे में भी दवाएं रखी गई है। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में स्थित फार्मेसी के भवन में बड़ी मात्रा में दवाएं रखी गई है, लेकिन विडंबना है कि तीनों जगह पर इन दवाओं के लिए उचित तापमान नहीं है। स्टोर में एक पंखे तक की भी व्यवस्था आज तक नहीं बन पाई है।

फार्मेसी से दवाएं हटाने को लिखा पत्र : रविराज
आयुर्वेद फार्मेसी के इंचार्ज डॉ रवि राज का कहना है कि फार्मेसी चलाए जाने के भरसक प्रयास किए जा रहे है , इसीलिए वहां बनाए दवाओं के स्टोर को हटाने की मांग की गई है। इसके लिए प्रशासन को एक माह पहले पत्र भी लिखा जा चुका है।
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उचित स्टोरेज के लिए विभाग को भेजी मांग : धीमान
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आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बलदेव धीमान का कहना है कि अस्पताल में दवाएं नियम व वातावरण अनुसार रखे जाने की समस्या है। विभाग को पत्र लिखकर बेहतर सुविधायुक्त स्टोर की स्थापना के लिए पत्र भेजा गया है। उम्मीद है जल्द ही इस पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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