1250 आर्य वीरांगनाओं ने जाना देवयज्ञ का महत्व
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में चल रहे 5 दिवसीय ‘आर्य वीरांगना योग एवं जीवन निर्माण शिविर’ में शुक्रवार को 11 कुंडीय देव यज्ञ किया गया। आर्य वीरांगनाओं को यज्ञ का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे शिविर उपरांत अपने घरों में प्रतिदिन यज्ञ कर पर्यावरण को शुद्ध करने के साथ दूसरे लोगों को भी यज्ञ के लिए प्रेरित करें। यज्ञ की ब्रह्मा आचार्या अमर कौर ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ न केवल पर्यावरण को शुद्ध करता है, बल्कि प्राणी मात्र के लिए सुखदायक है। वैदिक काल में सभी घरों में प्रतिदिन यज्ञ होता था, जिससे चारों ओर खुशहाली और संपन्नता बनी रहती थी।
गुरुकुल के प्रधान कुलवंत सिंह सैनी, सह प्राचार्य शमशेर सिंह, शिविर अध्यक्ष नंदकिशोर आर्य इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे और यज्ञ में आहुति डाली। शिविर अध्यक्ष नंदकिशोर आर्य ने बताया कि आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने पांच महायज्ञों का विशेष वर्णन किया है जिनमें ब्रह्म यज्ञ, देव यज्ञ, पितृ यज्ञ, बलिवैश्व यज्ञ तथा अतिथि यज्ञ शामिल हैं। इसमें ब्रह्म यज्ञ का अर्थ परमात्मा की भक्ति है। देव यज्ञ के द्वारा देवताओं की अर्चना की जाती है। पितृ यज्ञ का अर्थ है अपने माता-पिता व बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करना। बलिवैश्व यज्ञ का अर्थ है पशु-पक्षियों व अन्य प्राणियों की यथासंभव सेवा करना तथा अतिथि यज्ञ का अर्थ है अपने निवास पर आए अतिथि, ज्ञानी, संयासी, विद्वान, उपदेशक की सेवा करना उनका सम्मान करना। देव यज्ञ में वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ हवन कुंड में समिधा, घी-सामग्री आदि डालकर पर्यावरण को शुद्ध करते हैं। क्योंकि यज्ञ पर्याप्त मात्रा में शुद्ध ऑक्सीजन उत्पन्न होती है, जो वातावरण में फैलकर पर्यावरण को शुद्ध करती है। देव यज्ञ बरसात कराने में भी सहायक होता है। इस अवसर पर मुख्य व्यायाम शिक्षक संजीव आर्य, संतोष आर्या, सुमन आर्या, समरपाल आर्य, महाशय जयपाल आर्य, जसविंद्र आर्य सहित सभी शिक्षिकाएं उपस्थित थीं। बता दें कि शिविर में 130 गांवों से 1250 से अधिक आर्य वीरांगनाओं सहित 200 महिलाएं योग एवं जीवन निर्माण से संबंधित प्रशिक्षण ले रही हैं।