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गेहूं उठान की आड़ में करीब एक करोड़ा का फटका

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नजराना मांगने के आरोप की जांच करने पहुंचे डीएफएससी अधिकारी
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। हर सीजन की तरह इस बार भी नई अनाज मंडी गेहूं उठान धीमा होने के चलते जाम हो गई है। मंडी की सड़कों से लेकर बाहर भी किसान कच्ची मिट्टी में पीला सोना डालने को मजबूर हो रहे है,जबकि इसी उठान की आड़ में सीजन के दौरान कथित नजराने के रूप में एक करोड़ का फटका आढ़तियों को लगने की चर्चा मंडी में जोरों से की जा रही है। नजराना लिए जाने का मामला कई आढ़तियों ने बुधवार को राज्यमंत्री कर्ण देव कंबोज के समक्ष भी उठाया था। उन्होंने तत्काल ही डीसी को इसकी जांच के आदेश दिए थे, जिसके चलते वीरवार को डीएफएससी के अधिकारी मामले की जांच करने मंडी में पहुंचे तो उन्होने आढ़तियों से लेकर मजबूरों व ट्रक चालकों से लेकर संबंधित ठेकेदार से भी बातचीत की। उनके समक्ष एक आढ़ती के कर्मचारियों ने खुलकर गाड़ी नंबर तक बताते हुए खुलासा किया कि इसके बिना उठान नहीं हो पा रहा है। वहीं मार्केट कमेटी सचिव राहुल मियों व जिला खाद्य एवं पूर्ति अधिकारी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि नजराना लिए जाने की चर्चा मंडी में अवश्य चल रही है, लेकिन आज तक उनके पास कोई शिकायत नहीं पहुंची है।
शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वहीं उठान के हालात हर रोज बिगड़ते ही जा रहे है और वीरवार को भी करीब 8 लाख कट्टे उठान की बाट जोहते रहे। वहीं वीरवार को उठान की समस्या से परेशान होकर कई आढ़तियों ने खुद वाहन किराए पर लेकर उठान शुरू कराया तो सैकड़ों दुकानों पर जाने के लिए सड़कें भी पूरी तरह से जाम हो गई हैं। इसी समस्या को लेकर पूर्व प्रधान बलविंद्र सिंह, दौलत राम बंसल सहित दर्जनों आढ़ती एकत्रित हुए और आरोप लगाए कि जानबूझ कर उठान में ढील बरती जा रही है। पिछले दस दिनों से एक भी वाहन उठान के लिए उनके पास नहीं पहुंचा है। अब मंडी में गेहूं डालने के लिए सड़कों पर भी जगह नहीं बची है। उधर उठान कार्य का जिम्मा संभाल रहे संबंधित ठेकेदार से बार-बार प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं हो सका।
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अधिकारियों को नहीं पता कितने वाहन उठान में लगे, न अल्टीमेटम आया काम
संबंधित एजेंसियों द्वारा उठान कार्यों में कितने वाहन लगाए हुए है। यह जानकारी अधिकारियों को भी नहीं है। कई दिनों पहले नोडल अधिकारी एसडीएम प्रद्युमन सिंह ने खरीद व उठान एजेंसियों व आढ़तियों की बैठक ली तो उस दिन 80 वाहन बताए गए, लेकिन एक दिन के अल्टीमेटम के बाद भी आज तक इन वाहनों की सूूची अधिकारियों को नहीं मिल पाई है । वहीं वीरवार को मंडी में पहुंचे खरीद एजेंसी के इंस्पेक्टर ने माना कि महज 40 वाहन ही उठान में लगे हैं। उनके समक्ष भी आढ़तियों ने जमकर रोष जाहिर किया, लेकिन अधिकारी महज सुनते ही रहे।
एसडीएम बोले उठान सही, आढ़ती बोले लेंगे कोर्ट की शरण
मंडी के नोडल अधिकारी एसडीएम प्रद्युमन सिंह ने दावा किया कि उठान कार्य सही है और मंडी में कोई समस्या नहीं है, जबकि किसानों व आढ़तियों की माने तो मंडी के हालात उठान धीमा होने से गंभीर हो चुके हैं। अब प्रशासन भी कुछ नहीं कर पा रहा है। आढ़तियों का कहना है कि अब प्रशासन से भी उम्मीद नहीं रही है और कोर्ट की ही शरण लेनी पड़ेगी। आज भी मंडी में करीब 8 लाख कट्टे उठान की बाट जोह रहे हैं, जबकि आवक और तेज हो रही है।
72 घंटे में भुगतान के दावे भी फुस्स
सरकार द्वारा गेहूं खरीद के 72 घंटे तक भुगतान किए जाने के दावे भी फुस्स साबित हुए हैं। नई अनाज मंडी में ही पिछले एक सप्ताह से भुगतान का एक पैसा भी नहीं पहुंचा है, जबकि करोड़ों रुपये की खरीद हो चुकी है। आढ़तियों ने बताया कि एक एजेंसी का भुगतान 9 अप्रैल के बाद नहीं हो पाया है, जबकि दूसरी एजेंसी का भुगतान 12 अप्रैल को ही हुआ था।
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एक लाख चार हजार क्विंटल गेहूं की हुई खरीद
नई अनाज मंडी व तीनों खरीद केंद्रों पर वीरवर को एक लाख चार हजार किंवटल गेहूं की खरीद हुई, जिसमें से हेडफ ने 34 हजार क्विंटल, डीएफएससी ने 60 हजार व एफसीआई ने 7 हजार क्विंटल की खरीद की। मार्केट कमेटी सचिव राहुल मियों का कहना है कि मंडी व खरीद केंद्रों से पूरा दिन में सवा लाख कट्टे का उठान किया गया।
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