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विभाजन और उससे पहले की यादों से नम हुई आंखें

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
सरहदों के तार और दिवारों को तो नहीं तोड़ा जा सकता, लेकिन केशु फिल्म्स ने विभाजन से पहले की अनेक यादों को यूट्यूब के माध्यम से सांझा किया। इस प्रयास के जरिए केशव मुलतानी अब तक 70 ऐसे बुजुर्गों के वीडियो तैयार कर चुके हैं, जिन्होंने विभाजन से पहले वर्तमान के पाकिस्तान में बचपन या युवा अवस्था को जिया। केशव मुलतानी की मानें तो वह बिछुड़े हुए 13 लोगों को अब मिलवा चुके हैं, जबकि 20 लोगों को पाकिस्तान में मौजूद उनके घरों और गांवों को वीडियो के जरिये दिखा चुके हैं। स्थानीय होटल पर्ल मार्क में आयोजित एक कार्यक्रम यादें-1947 के दौरान केशव ने अपनी इस यात्रा का जिक्र किया। इसमें उन्होंने 24 लोगों का वृत्तचित्र तैयार कर प्रस्तुत किया था। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जिन बिछुड़ों को मिलाकर उन्हें जो संतोष मिला है, उसे वह बयां नहीं कर सकते, लेकिन अभी और हसरत अभी बाकी है।
केशव मेहता ने कहा कि यह एक साल पहले शुरू की गई यात्रा का परिणाम है। अभी इस मुहिम को जारी रखा जाएगा। क्योंकि, इन प्रयासों की सराहना 14 देशों के लोग कर चुके हैं। इन 14 देशों के लोगों ने यह सराहना केवल शब्दों से नहीं, बल्कि आंसुओं से, यादों से और दुआओं से की है। उन्होंने बताया कि उनका परिवार भी विभाजन के बाद मुलतान से अपना सब कुछ छोड़कर आया था। अपने परिवार के दर्द को उन्होंने सुना, समझा और एक दिन ऐसे लोगों की यादों पर वृत्तचित्र बनाने की तैयारी शुरू कर दी। एक के बाद एक उन्होंने अब तक 70 ऐसे बुजुर्गों की कहानियों का वृत्तचित्र तैयार किया। इनमें किसी ने अपना बचपन याद किया है, तो कोई अपने दोस्त को, तो किसी ने अपने घर को या अपने स्कूल को याद किया।
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इनमें कुरुक्षेत्र निवासी ओमी मिस्त्री भी हैं। वह अब कुरुक्षेत्र रेलवे रोड पर लोहार का काम करते हैं। विभाजन से पहले वे शाहाकोट शेखूपुरा में सुनार का काम करते थे। उनके परिवार के कई सदस्य आज भी कुरुक्षेत्र में ज्वेलरी के कारोबार से जुड़े हैं। केशव ने बताया कि ऐसे 24 लोगों ने पुरानी यादों को संजोकर केशु फिल्म्स के माध्यम से यादें-1947 कार्यक्रम एक निजी होटल में आयोजित किया। इसमें सरदार सुरेंद्र सिंह धालीवाल (पाकिस्तान के लायलपुर चक नंबर 55), सेक्टर-30 गुरुद्वारा के प्रधान सरदार वीर बहादुर बिंद्रा (रावलपिंडी थोहा खालसा), सरदार जागीर सिंह बडैच, लोहार माजरा, चंडीगढ़ से सरदार प्रीतपाल सिंह धीर (रावलपिंडी), पंजाब अबोहर से बंसीलाल सिक्का (झंग मिंगयाना), मदन गोपाल कालडा (बहावलपुर), हांसी से ज्ञानचंद कालड़ा (मुलतान), हांसी से वीरभान मदान (तुलंभा), करनाल तरावड़ी से केवली बाई (शुजाबाद), करनाल नीलोखेड़ी से राजरानी सलूजा (मियां चन्नू), कुरुक्षेत्र से सरदार तीर्थ सिंह (मीरपुर पिंबर), कुरुक्षेत्र कृष्णा देवी (लाहौर), पिपली बीबी सुरजीत कौर (लाहौर), हांसी से रामप्रकाश मिगलानी (खानेवाल), सोनीपत गांव झुंडपुर कृष्णा देवी (झंग), पानीपत से सरदार जगजीत सिंह बडैच (गुजरांवाला), अंबाला से डॉ. महेंद्र प्रताप चांद (लईया करोडलाल इसन) की यादों को शामिल किया गया है।
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कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. मोहित गुप्ता और विकास शर्मा ने किया। कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि यहां आमंत्रित सभी बुजुर्ग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। केशव मेहता के वृत्तचित्र को कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ. महेंद्र प्रताप चांद ने लांच किया। समाजसेवी धीरज गुलाटी ने कार्यक्रम के दौरान केशु फिल्म के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर सेमाजसेवी जगदीश लाल मेहता और समाजसेवी धीरज गुलाटी ने बुजुर्गों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रेरणा संस्था के संस्थापक जयभगवान सिंगला, समाजसेविका रेणु खुंगर, सार्थक मूक बधिर स्कूल की संचालिका रश्मि कटारिया, अर्चना कटारिया, शकुंतला शर्मा, सुरेंद्र काठपाल, प्रवीण शर्मा, पानीपत लइया बिरादरी के प्रधान परमवीर ढींगडा आदि उपस्थित रहे।
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