गीता को जीवन में धारण करने के लिए एक जीवन भी कम : प्रो. मिश्रा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में में चल रही अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन देश और विदेश से आए गुरुओं ने गीता को पर्यटन और प्रबंधन की दृष्टि से श्रोताओं के सामने रखा। साथ ही श्रीमद्भगवद् गीता को आधुनिक जीवन की चुनौतियों से निपटने और सफल जीवन का रास्ता बताया। सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. पीएन मिश्रा ने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता को जीवन में उतारने के लिए एक जीवन भी कम है।
रविवार को सुबह के सत्र में पर्यटन से जुड़े विशेषज्ञों ने कुरुक्षेत्र के महत्व और श्रीमद् भगवद् गीता का विस्तार से वर्णन किया। शाम के सत्र प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के लिए आयोजित किया गया। इस सत्र में देश के कई विश्वविद्यालयों व कम्पनियों में उच्च पदों पर कार्य कर रहे मैनेजमेंट गुरुओं ने सफल प्रबंधन में गीता के सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए आज-कल, और आने वाले कल में गीता के महत्व पर प्रकाश डाला। इस सत्र में डीएवीवी इंदौर से प्रो. पीएन मिश्रा, आईआईएम इंदौर से प्रो. पवन कुमार, गोवा यूनिवर्सिटी से प्रो. सुभाष और ब्रांड ग्रोथ वेंचर कंपनी के चीफ डिजिटल ऑफिसर अजय छाबड़ा ने विशेष उद्बोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने इस सत्र की अध्यक्षता की। सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. पीएन मिश्रा ने कहा कि भगवद् गीता का अध्ययन जीवन के लिए क्यों जरूरी है, जिन्होंने अध्ययन किया उन्होंने क्या पाया, जिन्होंने अध्ययन नहीं किया उन्होंने क्या पाया, इस पर विचार करना जरूरी है। आईआईएम के प्रो. पवन कुमार ने कहा कि भगवद् गीता का महत्व हर क्षेत्र में है। श्रीमद्भगवद् गीता राजनेता, इंजीनियर, शिक्षक, प्रबंधक, डॉक्टर सभी के लिए उपयोगी है। इसके लिए भगवद् गीता का अध्ययन करना और उसे समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ हमें संदेश देता है कि जब भी हम कुछ काम करते हैं, तो उसमें कुछ न कुछ कमी रहती ही है, लेकिन कर्मियों के कारण काम न करना, घबराहट रहना, कमियों के बाद भी कार्य करने का साहस रखना, संघर्ष करते रहना जीवन में सफलता के लिए जरूरी है। गोवा यूनिवर्सिटी के प्रो. सुभाष ने कहा कि विश्व बंधुत्व का संदेश हमें भगवद्गीता से मिलता है। भारतीय प्राचीन धर्म ग्रंथों में हमेशा से ही पूरे विश्व को अपने परिवार के रूप में माना गया है। केयू कुलपति डॉ. केसी शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता हमें योगस्थ होकर काम करने के लिए प्रेरित करती है। जब हम सभी चीजों, इच्छाओं, आदर-निरादर से ऊपर उठकर समस्थिति में पहुंचकर कार्य करते हैं, तभी हम जीवन में लक्ष्यों को हासिल कर पाते हैं। गीता को जीवन में उतारकर हम अपने जीवन व्यवहार को बदल सकते हैं। सेमीनार की निदेशक प्रो. मंजुला चौधरी ने सत्र में उपस्थित वक्ताओं को श्रीमद्भगवद् गीता की प्रति भेंट की। मंच का संचालन डॉ. अजय सोलखे ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में दुनियाभर से आए विद्वान, शिक्षक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद थे।
संगोष्ठी में आज होंगे दो तकनीकी सत्र
सेमिनार की निदेशिका प्रो. मंजुला चौधरी ने बताया कि संगोष्ठी के अंतिम दिन दो तकनीकी सत्र होंगे। इसमें संस्कृत के विद्वान श्रीमद्भगवद् गीता पर मंथन करेंगे। इस दिन डिवाइन लाइफ सोसाइटी ऋषिकेश से एचएच स्वामी पद्राबंधजी, रूस से आलेग, प्रो. मान सिंह, अमेरिका से डेविड फ्राले, उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. सुरेंद्र कुमार, प्रो. इंद्रमोहन, डॉ. हरिप्रकाश, डॉ. सीपी शर्मा, डॉ. वीके शुक्ला आदि विद्वान भाग लेंगे।
निष्काम कर्मयोग का संदेश विश्व के लिए कल्याणकारी: जेम्स हेगरट
दर्शनशास्त्र-विभाग द्वारा देर शाम आयोजित प्रथम तकनीकी सत्र में भारत एवं भारत से बाहर से आये गीता मनीषियों ने गीता के विविध पक्षों पर अपने-अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। इंग्लैंड से आए जेम्स हेगरट, अमेरिका से आए स्टीफन नेप, जापान से अजय नरुला, भारत से स्वामी ज्ञानानंद, नवादुल फतह शाहिद गुजरात और आशुतोष भारद्वाज कुरुक्षेत्र ने ‘डिजीटल युग में मनुष्य-तकनीक संघर्ष तथा श्रीमद्भगवद्गीता के दर्शनशास्त्र द्वारा इसका समाधान’ विषय पर अपने-अपने विचार रखे। इसके अतिरिक्त प्रो. सोहन (हरिद्वार), प्रो. बैद्यनाथ लाभ (जम्मू), डॉ. केडी झा (पिहोवा), प्रो. सोमेश्वर (पंचकूला), डॉ. नरेश (सोनीपत), ब्रह्मकुमारी पुष्पा संगोष्ठी में मौजूद रहीं।
सात देशों के विद्वानों ने की संगोष्ठी में शिरकत
संगोष्ठी में यूके से प्रो. जेम्स हेगरटी, अमेरिका से स्टीफन नैप, डेविड फराले, जापान से डॉ. अजय नरूला, किर्गीस्तान से मिस महलियो नजऱोवा, रूस से ओलेग जी सहित नेपाल, भूटान व कई अन्य देशों से आए विद्वानों ने संगोष्ठी में भाग लिया।