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महक ने बेटियों की बढ़ाई शान

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अमर उजाला ब्यूरो
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शाहाबाद।
क्षेत्र की बेटी महक सिंघल ने एम्स दिल्ली के एमबीबीएस की प्रवेश परीक्षा में 14वां रैंक हासिल कर हरियाणा में टॉप किया है। परीक्षा का परिणाम वीरवार तड़के ढाई बजे घोषित हुआ। बीती 28 मई को हुई इस प्रवेश परीक्षा में सवा दो लाख परीक्षार्थी बैठे थे लेकिन महक सिंघल ने इसमें 14वां रैंक प्राप्त कर शाहाबाद के साथ-साथ हरियाणा का नाम रोशन किया है। इसके बाद महक के घर में खुशी की लहर दौड़ गई तो वहीं उन्हें दिन भर लोग बधाई देते रहे। कुरुक्षेत्र जिला से महक पहली छात्रा होंगी जो एम्स दिल्ली में एमबीबीएस में दाखिला लेंगी। इससे पहले वह जवाहर लाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस की प्रवेश परीक्षा में भी 51वां रैंक प्राप्त कर चुकी हैं। लिंगानुपात में पिछड़े जिले की बेटी ने साबित कर दिखाया है कि बेटियां आज कहीं भी पीछे नहीं हैं। अगर बेटियों को मौका मिले तो वह इतिहास बना सकती हैं। इस बेटी की उपलब्धि पर राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, पूर्व विधायक अनिल धंतौड़ी, निदेशक सीएल बारूटा, प्राचार्या स्नेह राजपाल, डा. आरएस घुम्मन, स्वर्णजीत सिंह बिट्टू कालड़ा, आरडी गुप्ता, डा. भास्कर गुप्ता ने खुशी जताई है और परिजनों को बधाई दी है।
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पूरी रात देखते रहे परिणाम
महक के पिता गुरचरण सिंह ने बताया कि उन्हें मालूम था कि बुधवार रात को परीक्षा परिणाम घोषित होगा। इसलिए वह रातभर परिणाम देखते रहे लेकिन तड़के ढाई बजे जब परिणाम ऑनलाइन अपडेट हुआ तो महक का रोल नं. 7625819 को देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जब पता चला कि उनकी बेटी ने हरियाणा में टॉप किया है तो सभी परिजन खुशी से झूम उठे। माता पूनम ने कहा कि उन्हें यह विश्वास था कि उनकी बेटी अंडर 50 में जरूर आएगी लेकिन 14वां रैंक देखकर बेटी ने मिसाल कायम की है। माता-पिता ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है और यह उनके परिवार का पहला बच्चा होगा जो डॉक्टर बनेगा।
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मौजूदा डॉक्टरी पेशे में बदलाव चाहती हैं महक
पत्रकारों से बातचीत में महक ने कहा कि वह मौजूदा डॉक्टरी पेशे से खुश नहीं है। जिसका कारण इस पेशे को प्रोफेशन बनाया जा रहा है और सेवा भाव पायदान पर सरकता जा रहा है। इसलिए वह इस पेशे में बदलाव चाहती हैं। महक ने कहा कि जब उन्हें मौका मिला तो रोगी को सशक्त उपचार देना ही उनका प्रथम दायित्व होगा ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक अभाव के कारण उपचार से अछूता न रहे। महक सिंघल ने कहा कि भगवान की तरफ से भविष्य संवारने का सुनहरा अवसर मिला है। इसलिए वह पूरा ध्यान पढ़ाई पर रखेंगी। पांच साल बाद जब वह डॉक्टर बनेंगी तो सशक्त ढंग से अपनी सेवाएं समाज को दे सकें।
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विश्वास स्कूल की है छात्रा
महक सिंघल ने बारहवीं तक की शिक्षा विश्वास स्कूल से ली है। महक ने बारहवीं कक्षा मेडिकल में 95.8 प्रतिशत नंबर लेकर स्कूल में टॉप किया था और दसवीं कक्षा में 10 जीपीएस के साथ उत्तीर्ण की थी। जबकि इससे पहले की शिक्षा महक ने एमएम इंटरनेशनल स्कूल मुलाना से प्राप्त की है। बारहवीं में मेडिकल विषय के साथ-साथ गणित ऐडिशनल विषय भी रहा है।
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दिन में 10 घंटे करती थी तैयारी
महक ने जानकारी दी कि इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए उन्होंने दिन में 10-10 घंटे तैयारी की है। महक ने बताया कि उन्होंने एम्स, निट, जिपमेर की प्रवेश परीक्षा दी थी। लेकिन उनकी इच्छा था कि एम्स दिल्ली में उन्हें दाखिला मिले। उन्होंने कहा कि बारहवीं कक्षा में पढ़ते हुए ही इस प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी तथा कोचिंग के साथ-साथ सेल्फ स्टडी पर पूरा जोर रहता था।
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बचपन में खेलती थी डॉक्टर-डॉक्टर
महक सिंघल ने कहा कि बचपन में जब भी वह अपने भाई के साथ खेलती थी तो वह डॉक्टर ही बनती थी। इसलिए बचपन से ही उसका लक्ष्य बन गया था कि वह बड़ी होकर डॉक्टर बनेगी। इसलिए उसके माता-पिता भी उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन आज भगवान की कृपा से उसे मौका मिला है और वह इस लक्ष्य को बखूबी प्राप्त करेगी।
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माता-पिता व स्कूल स्टाफ को श्रेय, भाई है रोल मॉडल
महक अपनी उपलब्धि का श्रेय पिता गुरचरण सिंघल, माता पूनम सिंघल, दादी भगवती सिंघल, भाई कृष्ण सिंघल व स्कूल स्टॉफ को देती हैं। महक का कहना है कि इस टेस्ट को उत्तीर्ण करने में माता-पिता व स्कूल स्टॉफ ने उनका पूरा सहयोग किया है। महक सिंघल अपने बड़े भाई कृष्ण सिंघल को अपना रोल मॉडल मानती हैं। क्योंकि भाई कृष्ण सिंघल आईआईटी कानपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है और बहन को डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित करता रहा है। महक सिंघल ने स्कूल प्राचार्या स्नेहराजपाल व निदेशक सीएल बारूटा के सहयोग की भी प्रशंसा की है।
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माता-पिता भी रहे टॉपर, परिवार में नहीं कोई चिकित्सक
महक के पिता गुरचरण सिंघल ने बीए तथा माता पूनम सिंघल ने एमए की है। दोनों ही अपने समय के टॉपर भी रहे हैं। इसलिए वह चाहते थे कि उनकी बेटी भी शिक्षा में टॉपर रहे और एक दिन चिकित्सक बने। माता-पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने उनका सपना सच कर दिखाया है।
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मेहंदी, रंगोली में भी है महारत हासिल, जूडो की रही खिलाड़ी
हरियाणा की टॉपर बनी महक मेहंदी, रंगोली में भी महारत हासिल किए हुए है। इस तरह की अनेक प्रतियोगिताओं में महक ने जीत दर्ज की है। महक दसवीं तक जूडो की भी सशक्त खिलाड़ी रही है। लेकिन दसवीं के बाद खेलों पर ध्यान नहीं था और डॉक्टर बनने के उद्देश्य के साथ सफर शुरू कर दिया था।
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दादी बोली मैं आठवीं पास हूूं, बेटी ने कमाल कर दिखाया
महक की दादी भगवती देवी ने कहा कि अपने समय में उन्होंने आठवीं पास की थी। दादी ने कहा कि उनकी बेटी ने हरियाणा में टॉप करके सबको पीछे छोड़ दिया। दादी ने कहा कि बेटी ने दिखा दिया कि बेटियां तो बेटों से भी आगे हैं।
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टेंशन फ्री होकर पढे़ं बेटियां
महक सिंघल ने अपने संदेश में कहा है कि शिक्षा के साथ-साथ कोई भी क्षेत्र हो इंसान को क्वांटिटी पर नहीं क्वालिटी पर जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेशक शिक्षा के लिए कम समय निकले लेकिन जितना भी निकले उसमें सशक्त ढंग से पढ़ाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी पढ़ाई करें तो टेेंशन फ्री होकर करनी चाहिए, क्योंकि टेंशन के साथ किसी भी कार्य को ढंग से मुकम्मल नहीं किया जा सकता।
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