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Kurukshetra News: एनीमिया से ग्रसित मिलीं 60 फीसदी गर्भवतियां

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कुरुक्षेत्र। ​शिविर में जांच के लिए आई महिला का ब्यौरा दर्ज करती नर्स।
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कुरुक्षेत्र। जिले में 60 फीसदी गर्भवतियां रक्त की कमी से जूझ रहीं हैं। दो माह में कुल 11,792 गर्भवतियों के रक्त की जांच में यह खुलासा हुआ है। इन 60 फीसदी महिलाओं में पहले व दूसरे दर्जे का एनीमिया मिला है। उनको तुरंत आयरन की सुक्रोज डोज का उपचार दिया गया। हालांकि 154 गर्भवतियां गंभीर स्तर के एनीमिया से ग्रसित मिलीं। विभाग की ओर से गर्भवतियों के लिए महीने में लगने वाले विशेष शिविर में एनीमिया व अन्य कई तरह की स्वास्थ्य जांच की जाती है साथ ही गर्भवतियों को गर्भावस्था के दौरान खानपान, टीकाकरण व बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है।
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गौर हो, एनीमिया मुक्त भारत के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से 100 दिन तक चलने वाले अभियान के छह से 59 माह, पांच से 10 साल, 10 से 19 साल, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली और डब्ल्यूआरए (20 से 49 साल की महिलाएं) छह वर्ग के लोगों को जांच की जा रही है। इस जांच में 11,792 गर्भवतियों में से 4,686 महिलाएं एकदम स्वस्थ पाई गईं। मिल्ड स्तर (सात से 11 ग्राम रक्त) की जांच में 4244 और दूसरे स्तर (सात से नौ ग्राम) में 2,708 महिलाएं मॉडरेट दर्ज की गई, जबकि 154 महिलाएं गंभीर स्तर यानी सीवियर एनीमिया से ग्रसित मिलीं। इन तीनों स्तर में कुल 6,345 गर्भवतियों को उपचार दिया गया। इसके अतिरिक्त 239 को एलएनजेपी अस्पताल रेफर कर उपचार किया।


हर माह में तीन अलग-अलग दिन में जांच
डॉ. प्रदीप नागर ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना के तहत जिला और सीएचसी अस्पताल में हर महीने की नौ, 10 और 23 तारीख को शिविर लगाया जाता है। इसमें गर्भवतियों के स्वास्थ्य की हर तरह की जांच की जाती है। साथ ही अल्ट्रासाउंड भी किया जाता है। अगर महिला व बच्चे का स्वास्थ्य ठीक नहीं मिलता तो तुरंत उनको उपचार दिया जाता है।
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तुरंत दिया जा रहा उपचार : डॉ. मनीषा सिंह
जिला नोडल अधिकारी डॉ. मनीषा सिंह ने बताया कि जांच में एनीमिया से ग्रस्त गर्भवतियों को तुरंत उपचार दिया जा रहा है। अगर डिलीवरी में समय हो तो उनको आयरन की सुक्रोज डोज या दवा देकर उपचार दिया जाता है। किसी की डिलीवरी में कम समय बचा तो उसे रक्त चढ़ाकर कमी को पूरा करने का प्रयास किया जाता है।
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