नई बसें आई नहीं, चहेते चालकों की नियुक्ति के लिए मंत्रियों तक की पहुंच रहीं सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। हरियाणा रोडवेज के कुरुक्षेत्र डिपो के बेड़े में 10 नई बसें मार्च में शामिल होंगी। अभी ये बसें डिपो तक नहीं पहुंची हैं, लेकिन इन बसों पर तैनाती के लिए चालकों और परिचालकों में सिफारिशी दौड़ शुरू हो गई है। इसके लिए चालक और परिचालक उच्च अधिकारियों से लेकर सत्तासीन कार्यकर्ताओं के साथ ही नेताओं तक की शरण में पहुंचे चुके हैं। इसके बाद इन सभी मेें अपने-अपने चहेते चालक-परिचालकों को नई बसें दिलाने के लिए होड़ सी लगी है। शायद यहीं कारण है कि स्थानीय अधिकारियों पर सिफारिशों के अंबार लग रहे है। पिछले करीब एक माह से यह प्रयास किए जा रहे है। अब विभाग में चर्चा हो रही है कि आखिर नई बसें किन चालकों और परिचालकों को मिलेंगी। विभाग के अधिकारियों की मानें तो ऐसे हालात में योग्य चालक, परिचालक की तैनाती नहीं हो पाती। बता दें कि करीब दो वर्ष पहले भी बेड़े में नौ बसें शामिल हुई थीं।
दूसरे प्रदेशों में खटारा नहीं, नई बसें जाएंगी
कुरुक्षेत्र से जयपुर, मथुरा, लुधियाना, मनाली, शिमला सहित शहरों में अब पुरानी या खटारा बसें नहीं जाएंगी, बल्कि बेड़े में शामिल होने वाली नई बसें ही दौड़ेंगी। डिपो महाप्रबंधक का कहना है कि इन सभी बसों को इन रूटों पर ही उतारे जाने की योजना बनाई गई है।
बढ़ेगा नहीं बल्कि कम होगा बेड़ा
दस नई बसें आने के बाद भी डिपो में बसों का बेड़ा बढ़ नहीं पाएगा। डिपो की 10 बसें पहले ही कंडम हो चुकी हैं। इनकी घोषणा अगले माह ही की जाएगी। इसके साथ ही आठ लो फ्लोर बसें चालकों की कमी के चलते पिछले एक वर्ष से वर्कशॉप में खड़ी हैं। बता दें कि डिपो में आज भी 46 चालकों की कमी है।
स्पेयरपार्ट की भी है कमी
लोगों को बेहतर बस सुविधाएं देने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि हालात यह हैं कि डिपो में 46 चालकों की भी किल्लत है। इस वजह से दर्जन भर से अधिक बसें सड़कों पर ही नहीं उतर पा रहीं। इसके साथ ही स्पेयरपार्ट का भी टोटा है। आठ लो फ्लोर बसें स्पेयर पार्ट की और चालकों की एक वर्ष से खड़ी हैं।
160 बसें दौड़ रही सड़कों पर : गोयल
डिपो महाप्रबंधक आरके गोयल का कहना है कि वर्तमान में कुरुक्षेत्र मेन और पिहोवा सब डिपो के तहत कुल 180 बसों में से करीब 160 बसें हर रोज सड़कों पर दौड़ रही हैं। नई बसें मार्च माह के पहले सप्ताह में ही आ जाएंगी। उनकी कागजी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद सभी को सड़कों पर उतारा जाएगा। इन बसों पर उन्हीं चालक और परिचालकों को लगाया जाएगा जो योग्य होंगे। चालकों की कमी से लेकर बसों की सर्विस आदि के लिए सामान की पूर्ति करने के संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।