अमर उजाला ब्यूरो
बाबैन।
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए जीएसटी टैक्स प्रणाली का सीधा असर पंचायतों द्वारा किए जानेे वाले विकास कार्यों पर भी पड़ा है। जीएसटी टैक्स प्रणाली लागू होने से विकास कार्यों में प्रयोग होने वाला रेत, बजरी, सीमेंट व अन्य सामान 13 प्रतिशत से बढ़ कर 28 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। इससे चल रहे विकास कार्यों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।
खंड के सरपंचों का कहना है कि पहले से जारी विकास कार्यों के एस्टीमेट भी पिछली दरों के हिसाब से ही बने थे परंतु अब टैक्स बढ़ जाने से वर्तमान में चल रहे विकास कार्यों में पैसे की कमी हो जाएगी, जिससे विकास कार्यों को पूरा करना पंचायतों के लिए मुश्किल हो गया है। सरपंचों का यही कहना है कि सरकार ने निर्माण सामग्री के जो रेट निर्धारित किए हुए है वे बहुत ही कम है। उन दरों पर बाजार में कोई भी सामान उपलब्ध नहीं है। सरपंचों का कहना है कि सरकार ने ईट का रेट 4000 रुपये निर्धारित कर रखा है परंतु बाजार में ईट 4800 से 5000 में मिल रही है जिसके अंतर को सरपंच कहा से पूरा करे।
बैठक का जताया विरोध
उधर खंड कार्यालय में आयोजित सरपंच एसोसिएशन की बैठक में सभी सरपंचों ने निर्माण सामग्री के रेटों में बढ़ोतरी का कड़ा विरोध जताया। एसोसिएशन के प्रधान सुभाष कसीथल व वरिष्ठ उपप्रधान गुरदीप सिंह मंगौली की अध्यक्षता में हुई बैठक में खंड के सरपंच रशपाल सिंह कालवा, साहब सिंह ईशरहेडी, बलविंद्र बेरथली, मेजर सिंह मंगौली रांगडान, सुखबीर खिडकी, सुखविंद्र फालसंडा जाटान, रणबीर सिंह बिन्ट, गुरमुख सिंह सैनी माजरा, गुरमीत सिंह कलाल माजरा, रविन्द्र भैणी, सुरेश हमीदपुर सहित अनेक सरपंचों ने भाग लिया। प्रधान सुभाष कसीथल व गुरदीप सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा लगाए गए जीएसटी से गांव के विकास कार्यों में प्रयोग की जाने वाली सामग्री रेत, बजरी, ईंट, सरिया व सीमेंट के दाम आसमान को छूने लगे है। उन्होंने कहा कि जो सामान पहले 13 से 5 प्रतिशत टैक्स में मिलता था अब वही सामान जीएसटी लगने से 28 प्रतिशत महंगा हो गया है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर रेट अनुसार पंचायतों को ईंट 4 हजार रुपये प्रति हजार के हिसाब से मिलती थी लेकिन अब 4800 रुपये प्रति हजार तक पहुंच गई है लेकिन विकास कार्यों की अनुदान राशि पहले एस्टिमेट के हिसाब से कम पड़ रही है और गांवों में विकास कार्य अधूरे पडे़ हैं। खंड सरपंच एसोसिएशन ने जिला प्रशासन व सरकार से मांग की है कि पंचायतों को जारी की गई अनुदान राशि में जीएसटी के तहत बढ़ोतरी की जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिल सकें।