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बॉलीवुड अभिनेता एवं विख्यात रंगकर्मी यशपाल शर्मा ने की नाटकों पर चर्चा

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फोटो नंबर - 34, 35

हेडिंग साहित्य को आम लोगों के बीच ले जाने की जरूरत
- तीसरे सृजन उत्सव का प्रख्यात साहित्यकारों, पत्रकारिता एवं मनोरंजन जगत से जुड़े कलाकारों की मौजूदगी में रंगारंग समापन
-बॉलीवुड अभिनेता एवं विख्यात रंगकर्मी यशपाल शर्मा ने की नाटकों परिचर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। विश्वविद्यालय के आरके सदन में दो दिवसीय हरियाणा सृजन उत्सव का प्रख्यात साहित्यकारों एवं रंगकर्मियों की मौजूदगी में समापन हुआ। आलोक श्रीवास्तव ने वर्तमान दौर की चुनौतियां और सृजन विषय पर समापन भाषण दिया। उन्होंने कहा कि रचनाओं में भाषा और विषय-वस्तु के नए आयाम सृजित करने होंगे। दूसरी भाषाओं के साहित्य को अनुवाद के जरिए अपनी भाषाओं को समृद्ध कर सकते हैं। भाषाई आदान-प्रदान और विश्व साहित्य के साथ जुड़ने की ज्यादा जरूरत है। साहित्य को लोगों के बीच में ले जाने के लिए नए तरीके अपनाने होंगे। पुस्तकालय खोलने और किताबों के पठन-पाठन तथा चर्चा का माहौल बनाना होगा। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुभाष सैनी ने कहा कि लगातार तीन साल से हरियाणा सृजन उत्सव का आयोजन लोगों एवं साहित्यकारों के सहयोग से हो रहा है। सभी रचनाकारों और कलाकारों को विचार-विमर्श के अवसर मिलते हैं। दूसरे दिन हाली पानीपती और बालमुकुंद गुप्त के संदर्भ में हरियाणा की साहित्यिक परंपराएं विषय पर संगोष्ठी हुई। उर्दू के जाने-माने साहित्यिकार एमपी चांद ने हाली पानीपती के जीवन और साहित्य पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि हाली पानीपती उर्दू के पहले साहित्यालोचक और जीवनी लेखक हैं। वे प्रख्यात शायर मिर्जा गालिब के शिष्य हैं। साहित्यकार सत्यवीर नाहडिया ने बालमुकुंद गुप्त के जीवन तथा साहित्य एवं पत्रकारिता में उनके योगदान को रेखांकित किया। बताया कि उन्होंने रचनाओं के जरिए समय की सत्ताओं और चुनौतियों को मुखरता के साथ उजागर किया।
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हीरो से संवाद सत्र में बॉलीवुड अभिनेता एवं विख्यात रंगकर्मी यशपाल शर्मा ने पसंदीदा नाटकों पर चर्चा की। उन्होंने गिरीश करनाड के प्रसिद्ध नाटक- तुगलक एवं आईंस्टीन पर फोकस करते हुए अभिनय की बारीकियां बताई और अपने अनुभव भी सांझे किए। हरियाणा के मनोरंजन व्यवसाय पर भी खुली बहस की गई। कमलेश भारतीय ने कहा कि समाचार-पत्र एवं पत्रकार राजनीति और अपराध के पीछे भाग रहे हैं, जबकि बड़े-बड़े साहित्यिक कार्यक्रमों और कलाकारों की अनदेखी करते रहते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि कलाकारों को भी हरियाणा की नब्ज पहचाननी होगी। हरविंदर मलिक ने कहा कि अपनी बोली-भाषा को बढ़ावा देने के लिए वे प्रयासरत हैं। हरियाणा की कला और मनोरंजन काम से जुड़ रहे हैं। इस अवसर पर अविनाश सैनी, डॉ. कृष्ण, धर्मवीर, सुरेंद्रपाल सिंह, इकबाल सिंह, मोनिका भारद्वाज, अरुण कैहरबा, विकास साल्याण, दीपक राविश, नरेश दहिया, बृजपाल, सुनील थुआ, जितेंद्र सिंग्रोहा, प्रदीप स्वामी, रानी, राजेश कासनिया, बलजीत, गीता पाल, विपुला तथा कीर्ति मौजूद रहे।
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