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सुरमयी शाम में गूंजी स्वर लहरियां, पुराने नगमों से बंधा समां

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र। कला एवं संस्कृति विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल ने कहा कि कला एवं संस्कृति विभाग का जन्म महज डेढ़ साल पहले हुआ है। इसी दौरान ही प्रदेश में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने का कार्य किया है। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए कला एवं सांस्कृतिक विभाग द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर कार्यालय खोलने का प्रस्ताव है। वे कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा बुधवार देर सायं मैक में सुरमयी शाम मेरी आवाज मेरी पहचान कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में बोल रही थी। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। खंडेलवाल ने 16 जिलों से आए कलाकारों को स्मृति चिह्न व 10-10 हजार की राशि के चेक देकर सम्मानित भी किया। एसीएस ने कहा कि कला एवं सांस्कृतिक विभाग द्वारा प्रदेश के सभी कलाकारों व संगठनों से सहयोग और सुझाव आमंत्रित किए गए है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शीघ्र ही कला एवं संस्कृति पर एक नीति तैयार करेगी। इस नीति को तैयार करने में सभी कलाकारों और संगठनों के सहयोग की जरूरत होगी। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक शहर और गांव से कलाकारों को आगे लाया जाए और कलाकारों का कारवां आगे बढ़ता रहे। क्षेत्रीय निदेशक संजय भसीन ने कहा कि कला के क्षेत्र में प्रदेश के कलाकार जहां अपनी प्रतिभा के माध्यम से हरियाणा का नाम रोशन कर रहे हैं, वहीं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा उच्च अधिकारीगण के मार्गदर्शन में उच्च स्तर के कार्यक्रम आयोजित कर कलाकारों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कला एवं सांस्कृतिक विभाग की संगीत सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. दीपिका वालिया ने मैक में लगातार 3 दिन 16 जिलों के 25 कलाकारों को खूब रियाज करवाया। डॉ. दीपिका वालिया के प्रयासों से सुरमयी शाम मेरी आवाज मेरी पहचान का सफल आयोजन हुआ।
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इन कलाकारों ने बिखेरी गीतों की छटा
इस सुरमयी शाम की पहली प्रस्तुति में जींद की शीतल चहल ने नाम गुम जाएगा गीत से अपनी छाप छोड़ी, वहीं करनाल के निर्मल द्वारा गाए गए गीत आजा तुझको पुकारे मेरे गीत ने सभी का भरपूर मनोरंजन किया। यमुनानगर की तनुश्री ने वादा करो नहीं छोड़ोगे तुम मेरा साथ तथा शाहबाद की वंदना शर्मा ने मैं तेरे ईश्क में मर ना जांऊ कहीं गीत गाकर अपनी आवाज से सभी को मदमस्त कर दिया। आशा भौंसले, लता मंगेशकर, मन्ना डे, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, मुकेश, सलमा आगा जैसे बेहतरीन गायक-गायिकाओं के गीत ने माहौल को खुशनुमा बनाए रखा। हिसार के अजय आर्य, कुरुक्षेत्र की रोजी पाठक, यमुनानगर से दिनेश कश्यप, करनाल से दिव्यम सोढ़ी, अम्बाला से सुनीता, करनाल से कृष्णपाल ने भी जहां एक ओर अपनी मधुर आवाज की छाप छोड़ी वहीं कैथल से रवि, नरवाना से राहुल शर्मा, करनाल से अश्विनी व मीनाक्षी, अंबाला से एकांश व वर्षांजलि, रेवाड़ी से आकाश तथा कुरुक्षेत्र के जितेंद्र तथा पूजा कथूरिया ने अपने गीतों से सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। चयनित प्रतिभागियों के अलावा वायस ऑफ इंडिया फेम फतेहाबाद के दिपेश राही ने भी अपनी गायिका का कमाल दिखाया तो वहीं कुरुक्षेत्र की लाडो कोमल वशिष्ठ ने ये मेरा दिल यार का दिवाना गाकर खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा सूफी गायक विक्रम सिरोहवाल ने भी अपनी गायकी का जलवा दिखाया। सेवानिवृत अधिकारी रोशन लाल ने भी अपनी गायकी से खूब समां बांधा। मंच संचालन कर रही पुनीता बावा ने किया। इस दौरान संगीत निर्देशक वेवल शर्मा, मैक के क्षेत्रीय निदेशक संजय भसीन, महेश जोशी, प्रो. शुचिस्मिता, डॉ. महासिंह पुनिया सहित अन्य अतिथियों को भी सम्मानित किया गया।
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