कुरुक्षेत्र। जिले भर के स्कूलों में पढ़ाई की खस्ता हालत को देख जहां जिला उपायुक्त शिक्षकों को कड़ी फटकार लगा चुके हैं तो वहीं अब इन स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों को कक्षा अनुसार सक्षम बनाने में सक्षम युवक-युवतियां सारथी साबित होंगे। ये युवक-युवतियां इन बच्चों व शिक्षकों के बीच न केवल कड़ी का काम करेंगे बल्कि बच्चों को एजुसेट व कंप्यूटर के माध्यम से नई तकनीकों के साथ पढ़ाई करने की कड़ी का काम करेंगे। विशेष तर पर तीसरी, पांचवीं व सातवीं कक्षा के इन बच्चों को मैथ व हिंदी विषय में विशेष तौर पर कक्षा अनुसार सक्षम बनाने में विशेष सहयोग का जिम्मा इन युवक-युवतियों को सौंपा गया है। इसके लिए 225 युवक-युवतियों को स्कूलों में उतारा गया है तो वहीं उन्हें विशेष तौर पर प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। शनिवार को भी जिला सूचना अधिकारी ने उन्हें इसी कड़ी में विशेष तकनीक से रूबरू कराया गया। प्रदेश सरकार की सक्षम युवा रोजगार योजना के तहत कार्यरत इन युवक-युवतियों में अधिकतर उच्च शिक्षा ग्रहण किए हुए है तो वहीं तकनीकी रूप से भी जानकारी उन्हें हासिल है। इसी के चलते ही जहां वे कई वर्षो से ठप पड़े एजूसेट सिस्टम को दुरुस्त करवा चुके हैं तो वहीं कंप्यूटरों के माध्यम से भी बच्चों को शिक्षित करने का कार्य करने लगे हैं।
एजूसेट सिस्टम दुरुस्त कराए तो सोलर पैनल भी लगाए
जिला के शाहाबाद व बाबैन में आज एक भी स्कूल ऐसा नहीं है जहां बिजली की किल्लत के चलते एजूसेट सिस्टम ठप हो। सक्षम युवाओं की बदौलत ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर जहां एजूसेट सिस्टम चालू हालत में कर लिए गए हैं तो वहीं अनेकों स्कूलों में सोलर पैनल भी लगाए जा चुके हैं।
मैथ के फार्मूले व कविताएं भी कंप्यूटर पर
अलग-अलग कक्षा के अनुसार मैथ के फार्मूलों से लेकर हिंदी की कविताएं भी कंप्यूटर पर दिखाकर बच्चों को सिखाने के लिए विशेष तौर पर सामग्री तैयार की गई है, जिससे बच्चे आसानी से समझ सकते है।
शिक्षकों को साथ लेकर बच्चों को सुगमता से सिखाया जा सकेगा : डीआईओ
डीआईओ विनोद सिंगला का कहना है कि एजूसेट व कंप्यूटर के माध्यम से संबंधित शिक्षकों को साथ लेकर बच्चों को सुगमता से संबंधित विषय को सिखाया जा सकेगा। इसके लिए तैयार सामग्री को पेन ड्राइव व सीडी में भी सक्षम युवक-युवतियों को दिया गया है।
40 फीसदी भी नहीं सक्षम बच्चे
बता दें कि डीसी डॉ. एसएस फुलिया व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतनाम सिंह भट्टी के अलावा अन्य अधिकारियों ने उक्त कक्षाओं के बच्चों के साथ निरीक्षण के दौरान संवाद किया तो उनका स्तर 40 फीसदी भी नहीं मिला। यहां तक कि मिर्जापुर स्कूल के चार शिक्षकों को नोटिस जारी करने के आदेश देने पड़े तो बच्चों के स्तर को लेकर गहरी चिंता भी जताई गई।