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जीटी रोड पर छह किलोमीटर रॉन्ग साइड में चल रहे वाहन, जान गंवा रहे यात्री

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जीटी रोड पर छह किलोमीटर रॉन्ग साइड में चल रहे वाहन, जान गंवा रहे यात्री
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
जीटी रोड पर कुरुक्षेत्र के पिपली से लेकर गांव झिरबड़ी तक करीब छह किलोमीटर लंबे क्षेत्र में हर रोज सैकड़ों वाहन चालक रॉन्ग साइड से गुजरते हैं। इस दौरान यात्रियों की जिंदगी दांव पर लगाती रहती है। इस क्षेत्र में हर दो से तीन माह में कोई न कोई हादसे का शिकार हो रहा है। इसके बावजूद करीब पांच वर्षों से न तो जिला प्रशासन और न ही प्रदेश सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर हुई है। केंद्र सरकार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने ही भी इस पर संज्ञान नहीं लिया है। यह स्थिति तब है, जबकि गांव झिरबड़ी सहित आसपास के आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतें आने- जाने के लिए जीटी रोड पर अंडर पास या किसी अन्य रास्ते के लिए गुहार लगा चुकी हैं।
क्षेत्र के निवासियों ने सिर्फ कागजों पर ही नहीं, बल्कि हाईवे जाम कर भी यह मांग उठाई है। इसके बावजूद इस ओर कोई गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। रॉन्ग साइड चलने के कारण हादसों का क्रम बढ़ता जा रहा है। इसके चलते अब ग्रामीणों में यहां से गुजरते समय दहशत रहती है। परिजन अपने बच्चों को यहां से घर पहुंचने से परहेज करने के साथ अब खुद उनके साथ जाने लगे हैं। यहां तक कि जीटी रोड के दूसरी ओर स्थित खेतों में जाने में भी ग्रामीण डरने लगे हैं। बता दें कि जीटी रोड पर पिपली से लेकर झिरबड़ी गांव तक करीब छह किलोमीटर के लंबे रास्ते में कोई भी अंडरपास नहीं है। इस क्षेत्र में कोई सब-वे भी नहीं हैं। जोहड़ का पानी ओवरफ्लो होकर पुल तक पहुंचा जाता है। अब इसके नीचे से बने रास्ते से दूसरी ओर भी जाने लगा है। इस वजह से ग्रामीण यहां से पैदल भी नहीं निकल सकते। ऐसे में लोगों को रॉन्ग साइड से ही गांव समानी तक पहुंचना पड़ता है। इसके बाद वे वापस झिरबड़ी पहुंच पाते है। गांव फतुहुपुर, चंद्रभानपुर, खासपुर और अमीन का संपर्क भी इसी गांव से होते हुए जीटीरोड तक है। इन सभी गंावों ने सामूहिक रूप से पंचायतों की ओर से रेजूलेशन विधायक डॉ. पवन सैनी को करीब चार माह पहले सौंपा था। इसके बावजूद अभी तक समस्या समाधान नहीं हो सका है।
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ये लोग हो चुके है हादसों का शिकार
वर्ष 2017 में संतरो देवी पत्नी ईश्म सिंह, नाथा राम और सुरजीत की जीटीरोड के इस क्षेत्र मेें हुए हादसों में मौत हो चुकी है। हरकेश, उनका बेटा विशाल और बलवंत पुत्र शंकरदास यहां हुए हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वर्ष 2016 में गांव के ही तीन लोगों की मौत हुई थी। गांव की महिला सरपंच रीना देवी के पति राजपाल की मानें तो करीब पांच वर्षों के दौरान करीब 12 लोगों की मौत जीटी रोड पर हादसे में हो चुकी है।
खेतों में जाने के लिए भी नहीं रास्ता : राजपाल
गांव की महिला सरपंच रीना देवी के पति राजपाल का कहना है कि गांव के लोगों के दूसरी ओर बड़ी संख्या में खेत हैं। वहां जाने के लिए कोई रास्ता जीटी रोड पर नहीं है। अनेक लोग खेतों से आते-जाते समय हादसे का शिकार हो चुके है। गांव के निवासी अब जीटीरोड पर जाने से डरने लगे हैं।
संपर्क रास्तों से जाने लगे है लोग : शमशेर
गांववासी शमशेर सिंह का कहना है कि जीटी रोड पर केवल रॉन्ग साइड से ही रास्ता होने के चलते अब लोग संपर्क रास्तों से ही जाने लगे हैं। जीटी रोड पर वाहन चालकों में भय बना रहने लगा है। इसी के चलते ही लोग कई-कई किलोमीटर अधिक सफर कर दूसरे गंावों के रास्तों से आ रहे हैं।
जो रास्ता था, वहां पर गंदा पानी भरा : गुरमीत
गांववासी गुरमीत सिंह का कहना है कि जो जीटी रोड के नीचे से रास्ता था, वह पिछले तीन वर्ष से गंदा पानी भरा होने के कारण लगभग बंद ही है। इस वजह से क्षेत्र के निवासी रॉन्ग साइड से ही सफर करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
भेजा है प्रस्ताव, लेकिन जवाब नहीं आया : विधायक
क्षेत्र के विधायक डॉ. पवन सैनी का कहना है कि यहां बहुत से लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। इसके चलते आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों ने रास्ता बनाने की मांग को लेकर एक सामूहिक प्रस्ताव हाईवे अथॉरिटी को भेजा है। इस पर उन्होंने भी सिफारिश की है, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं आया है।
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बुलाए जाएंगे एनएचआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर : डीसी
डीसी सुमेधा कटारिया का कहना है कि उनके संज्ञान में आया है कि पिपली से गांव झिरबड़ी तक के रास्ते में कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। इन गांवों के लिए जीटीरोड से कोई रास्ता अवश्य होना चाहिए। इसके लिए वे अगले एक-दो दिन में खुद मुआयना करेंगी। साथ ही एनएचआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को भी मौके पर बुलाया जाएगा।
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