संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। हरियाणवी संस्कृति का महाकुंभ मंगलवार से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में शुरू होगा जिसमें प्रदेशभर के 3500 कलकार चार दिन तक छह मंचों पर धूम मचाएंगे। चारों ओर से हरियाणवी बोली से लेकर बैंजू, तबला, चिमटा, ढोल, नगाड़े गूजेंगे। कहीं सांग तो कहीं रागनी से लेकर चुटकुले तक गुदगुदाएंगे।
सबसे बड़े व खास महोत्सव के लिए विश्वविद्यालय को दुल्हन की तरह हरियाणवी अंदाज में ही सजाया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही महोत्सव की झलक दिखाई पड़ने लगती है। देर रात तक कारीगर तैयारियों को अंतिम रूप देते रहे और वहीं सोमवार को कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने तैयारियों का जायजा लिया। विभिन्न विश्वविद्यालयों से पहुंचे लोक कलाकारों की ओर से की जा रही रिहर्सल को भी देखा महोत्सव का आयोजन 28 से 31 अक्तूबर तक होगा। कुलपति प्रो. सचदेवा ने बताया कि रत्नावली समारोह हरियाणा की लोक संस्कृति का ऐसा समागम है जिसमें विशुद्ध रूप से हरियाणवी संस्कृति को केंद्रित कर हरियाणा की लोक परंपराओं से जुड़ी विधाओं को मंच दिया गया है। उन्होंने बताया कि हरियाणवी संस्कृति के संरक्षण के लिए रत्नावली एक कार्यशाला है जिसमें हमारी आने वाली पीढ़िया सांस्कृतिक मूल्यों की वाहक बनती हैं।