मंत्री जी! आपके क्षेत्र में हाउस और जनता हो रही गुमराह
अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद।
राज्यमंत्री जी, आपके विधानसभा क्षेत्र में हाउस और जनता गुमराह हो रही है। आप चुप क्यों है ? यह सवाल शाहाबाद नगर पालिका के उपाध्यक्ष गुलशन कवात्रा ने राज्यमंत्री कृष्ण बेदी से किया है। दरअसल, पिछले दिनों शाहाबाद एलाइड कॉलोनी निवासी मनजीत कौर ने शाहाबाद नगर पालिका में आरटीआई लगाकर विकास कार्यों के लिए सरकार द्वारा भेजी गई अनुदान राशि के साथ कितना और कहां-कहां खर्च हुआ का ब्योरा मांगा था। आरटीआई के तहत सूचना मांगे जाने पर महिला को असंतोषजनक जानकारी दी गई, जिस पर सूचना आयुक्त ने कड़ा संज्ञान लेते हुए नपा सचिव मदन चौहान पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया था। सूचना आयुक्त के आदेशानुसार यह राशि नपा सचिव के वेतन से दो किश्तों मेें काटी गई थी।म गर इसमें नपा की बड़ी लापरवाही तब उजागर हुई, जब नपा द्वारा सचिव को बचाने के लिए नगर पालिका अध्यक्ष बलदेव चावला की अध्यक्षता में नियमों को ताक पर रखते हुए प्रस्ताव पास कर दिया। इस प्रस्ताव के अनुसार अपील पर जो खर्च होगा, उसके लिए वकील की फीस भुगतान नगर पालिका के खाते से किया जाएगा। वहीं नपा अध्यक्ष बलदेव राज चावला का कहना है कि जो भी हुआ है वह नियमानुसार है।
आरटीआई में महिला ने मांगी थी यह जानकारी
वार्ड नंबर-9 लाडवा रोड पर स्थित एलाइड कॉलोनी में क्या विकास कार्य हुए।
-उनकी कॉलोनी में गलियों को पक्का करने के लिए कितनी राशि आई।
-इस कार्य पर कितना सरकारी अनुदान खर्च हुआ।
-कॉलोनी में सभी गलियां पक्की कर दी गई हैं या नहीं।
-जो गलियां पक्की नहीं हुई, वे कौन-कौन सी हैं।
-गलियों में ट्यूब लाइट्स पूरी हैं या नहीं।
-सीवरेज, नालियां पूरी है या नहीं की
कई बार सुनवाई के बाद आयुक्त ने लगाया जुर्माना
आरटीआई में गोलमोल जवाब मिलने पर महिला ने प्रथम अपील के बाद द्वितीय अपील सूचना आयोग में दायर की। इसकी कई सुनवाई होने के बाद जन सूचना आयोग ने सचिव को दोषी मानते हुए 18 जनवरी को उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए वेतन से दो किश्तों में 25 हजार की राशि काटने के आदेश दिए थे।
एजेंडे में गुमराह करने पर लामबद्ध हुए पार्षद
मामले में नगरपालिका ने सचिव के बचाव के लिए नियमों को भी ताक पर रख दिया और 28 फरवरी को हुई बैठक में नगर पालिका के नियमों से बाहर जाकर प्रस्ताव पास कर दिया। इस प्रस्ताव के अनुसार नपा ने सचिव पर हुए जुर्माना मामले में उच्च न्यायालय में सूचना आयोग के खिलाफ अपील दायर करने और इसके लिए वकील की फीस नगर पालिका द्वारा दिए जाने का प्रस्ताव पास किया था। नपा उपाध्यक्ष सहित अन्य नगर पार्षदों का कहना है कि जो एजेंडा उन्हें दिया गया था उसमें इस मामले का जिक्र नहीं था।
पार्षदों को कहा, डीसी के पास भेजी गई है एजेंडे की कॉपी
पार्षदों का आरोप है कि जब यह मामला संज्ञान में आया तो उन्होंने नगर पालिका से पारित हुए एजेंडे के प्रस्ताव की कॉपी मांगी, लेकिन नपा के कर्मियों द्वारा यह जवाब दिया गया कि अभी एजेंडे में शामिल प्रस्ताव पास होने के लिए डीसी के पास भेजे गए हैं। इसके बाद ही एजेंडे की कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि नियमानुसार बैठक के तीन दिन के भीतर सभी पार्षदों को कार्यवाही रजिस्टर की कॉपी उपलब्ध करानी होती है।
नपा सचिव की प्रतिक्रिया
नपा सचिव अंकुश पराशर ने माना कि प्रस्ताव कॉपी पार्षदों को उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन उनके संज्ञान में नहीं कि यह कॉपियां पार्षदों को मिली हैं या नहीं। बताया गया है कि इसके बाद पार्षदों ने नपा के सूत्रों की मदद से बिना हस्ताक्षरों वाली कॉपी हासिल की, जिसमें लिखित रूप में नपा सचिव वाले मामले से संबंधित प्रस्ताव भी शामिल था। वहीं पार्षदों का कहना है कि जो एजेंडा उन्हें भेजा गया था उसमें यह प्रस्ताव शामिल नहीं था।
एजेंडें में जोड़ा गया यह गुप्त प्रस्ताव
हाउस की बैठक में सभापति की अनुमति से बिंदु नंबर-10 के भाग 11 में यह दर्शाया गया कि भवन निरीक्षक की रिपोर्ट अनुसार राज्य जनसूचना आयुक्त हरियाणा द्वारा सचिव पर लगाया जुर्माना राशि मूल्य 25 हजार रुपये बारे उच्च न्यायालय में विचार-विमर्श और प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकार है एवं महाधिवक्ता के बिलों की अदायगी की जाना भी सर्वसम्मति से स्वीकार है, दर्शाया है।
डीसी से प्रस्ताव निलंबित करने व उच्च स्तरीय जांच की मांग
नपा उपाध्यक्ष गुलशन कवात्रा, पार्षद अंजली गुप्ता, कमल शर्मा, नीलम साहनी, सतविंद्र सिंह, सुरेंद्र शर्मा व अन्य पार्षदों ने हस्ताक्षरित पत्र डीसी को लिख हरियाणा नगर पालिका अधिनियम 1973 की धारा 246 के तहत इस प्रस्ताव को निलंबित करने की मांग की है। पार्षदों ने मांग की कि भविष्य में कार्यवाही रजिस्टर की कॉपी तुरंत प्रभाव से जांच की जाए। कवात्रा के मुताबिक पहले भी एजेंडे में इस तरह का हेरफेर हुआ है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
आरटीआई कार्यकर्ता की बदौलत उजागर हुआ मामला
यह पूरा मामला आरटीआई कार्यकर्ता राकेश कुमार बैंस की बदौलत उजागर हुआ है। बैंस ने कहा कि सभापति द्वारा जो प्रस्ताव बिंदु गुप्त रखे जाते हैं वह गैर कानूनी है। सभी प्रस्ताव एजेंडे में शामिल होने चाहिए और इन सभी की जानकारी पार्षदों के पास भी होना अनिवार्य है। बैठक के बाद इसमें मनमर्जी से प्रस्ताव शामिल किया जाता है, तो निश्चित तौर पर वह किसी को निजी रूप से फायदा पहुंचाने के लिए प्रस्ताव गुप्त रखे जाते हैं।