भागवत कथा में सुनाया श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। गो-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति की पिपली के श्रीराम मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक पंड़ित अनिल शास्त्री ने श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग सुनाया। इस मौके पर समाजसेवी रामभज मनचंदा, रमेश अरोड़ा, जगदीश शर्मा, लक्ष्मीनारायण शर्मा और डॉ. भारत पराशर ने यजमान के रूप में भागवत पूजन किया। शास्त्री ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप श्रीकृष्ण की प्रतिमा भेंट की।
प्रवचनों में उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण अष्टांग योग के अधिष्ठाता हैं। न तो राज लक्ष्मी अत्यधिक गुणवानों के पास रहती है और न ही बहुत निर्गुणों के पास। यह न तो बहुत से गुणों को चाहती है और न यह गुणहीनों से लगाव रखती है। किसी उन्मत्त गाय की भांति यह लक्ष्मी कहीं-कहीं ही रुकती है। इसलिए लक्ष्मी का सम्मान करो। जय-जय श्री राधे के पवित्र उद्घोष के साथ सुनाए गए भजन मेरे बालापन के यार सुदामा कैसे आए। अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो कि दर पे सुदामा गरीब आ गया है...पर श्रद्धालु जमकर थिरके। भागवत आरती में पंड़ित श्रीकांत तिवारी, विनोद शास्त्री, महावीर शर्मा, वैजनाथ शर्मा, राजीव कौशिक, पंच चरणजीत मेंहदीरत्ता, नीरज मदान, हेमंत वधवा, अवतार सैनी, भूपेंद्र चोपड़ा, कृष्णा देवी, रानी सैनी, पूजा कुकरेजा, सुमन गोयल और ऋतु वधवा आदि शामिल रहीं।