कुरुक्षेत्र। गांव किरमिच के निवासी भले ही कई समस्याओं से घिरे हों, लेकिन लगातार गिरते जा रहे भूजल को बचाने में यह गांव अब मॉडल गांव बनने जा रहा है। यहां न केवल हर साल 30 करोड़ लीटर पानी रिचार्ज होगा बल्कि गांव की आबोहवा भी और बेहतर होगी। इसके लिए गांव में नौ जोहड़ो की खुदाई कर नया रूप दिया जा रहा है। यह योजना अगले तीन माह तक पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद गांव ही नहीं आसपास के क्षेत्र भी बाढ़ की विभीषिका से भी बच पाएंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की थ्री पोंड योजना पर कार्य करते हुए पंचायती राज विभाग ने करीब 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में नौ जोहड़ों को नया रूप देने का निर्णय लिया है। गांव में आंरभ से ही जोहड़ रहे हैं, जहां पशुओं के लिए पेयजल एकत्रित किया जाता था। समय बीतने के साथ ये जोहड़ अपना अस्तित्व खोने लगे थे और यहां महज गांव का गंदा पानी ही स्टोर किया जा रहा था, लेकिन अब इन जोहड़ों के बदलते स्वरूप से जोहड़ों के दिन बहुरेंगे। इससे न केवल जलस्तर में सुधार होगा, बल्कि जोहड़ों पर पौधरोपण से आबोहवा और बेहतर होगी।
नीर संस्था के सहयोग से लगाए जाएंगे 10 हजार पौधे
गांव में विकसित किए जा रहे सभी नौ जोहड़ों को आकर्षक भी बनाया जाएगा। चहारदीवारी के साथ-साथ पक्के घाट भी बनाए जाएंगे। यही नहीं इन जोहड़ों पर सामाजिक संस्था नीर के सहयोग से 10 हजार पौधे भी लगाए जाएंगे। इससे गांव की आबोहवा भी स्वच्छ होगी। नीर संस्था के संस्थापक एवं सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच का कहना है कि संस्था की ओर से गांव को और भी सुंदर बनाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि ये जोहड़ तैयार होने के बाद हर साल करीब 30 करोड़ लीटर पानी रिचार्ज होगा, जिससे क्षेत्र में गिरते भूजल को रोकने में बड़ी मदद मिल पाएगी। इसके साथ ही गांव व आसपास के क्षेत्र पर बाढ़ का खतरा भी नहीं रहेगा।
चार जोहड़ किए जा चुके हैं तैयार : सरपंच
गांव के सरपंच रणबीर सिंह का कहना है कि सभी नौ जोहड़ों को नया रूप दिए जाने की योजना है। चार जोहड़ तैयार भी कर लिए गए हैं। बाकी पर भी कार्य चल रहा है। सभी जोहड़ तैयार होने के बाद बड़ी मात्रा में पानी रिचार्ज होगा तो पशुओं व अन्य कार्यो के लिए भी पानी प्रयोग किया जा सकेगा।