कुरुक्षेत्र। अस्पताल में नेत्रदान करने के लिए लोगों को जागरूक करते नेत्र रोग विशेषज्ञ।
कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ की ओर से लोगों को नेत्रदान करने के लिए जागरूक किया गया। शनिवार को 25 लोगों ने मरणोपरांत नेत्रदान करने का शपथ पत्र भरा। उप-सिविल सर्जन एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मेजपाल ने बताया कि भारत में 30 लाख से ज्यादा लोग पुतली खराब होने के कारण अंधापन से पीड़ित हैं, जिसमें 10 लाख बच्चे भी शामिल हैं। इन लोगों की दुनिया रोशन करने के लिए अंधापन और दृष्टिहीन के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम चल रहा है। मेरे बाद मेरी आंखें-दुनिया नई देखें थीम के तहत 25 अगस्त से आठ सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। शनिवार तक 52 लोग नेत्रदान के लिए सहमति दे चुके हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन मेहता ने बताया कि कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र में आंखें दान कर सकता है, भले ही आंखों में लेंस, चश्मा लगा हो या फिर आंख का ऑपरेशन हुआ हो। उच्च रक्तचाप, मधुमेह व अस्थमा बीमारी वाले व्यक्ति, जिस व्यक्ति का कॉर्निया मृत्योपरांत पारदर्शी रहे उसके नेत्रदान लिए जा सकते हैं। नेत्रदान एक प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति के मरने के बाद उसकी आंखों का दान किया जाता है। यह व्यक्ति की पूर्व इच्छा या परिजनों की इच्छा पर निर्भर करता है। उधर, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिता गोयल ने बताया कि मृत्यु के बाद छह से आठ घंटे के बीच में नेत्रदान करवा देना चाहिए, जिसमें 10 से 15 मिनट का समय लगता है। नेत्रदान करने से चेहरे पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। देश में प्रत्येक वर्ष करीब 90 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इसमें सिर्फ 20 हजार के करीब लोगों का ही नेत्रदान होता है। इस मौके पर काउंसलर निर्मला समेत अन्य मौजूद रहे।