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सुबह से आए विद्यार्थी खड़े रहे माईग्रेशन सर्टिफिकेट के इंतजार में, पांच बजे तक भी नहीं मिला

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सुबह से आए विद्यार्थी खड़े रहे माइग्रेेशन सर्टिफिकेट के इंतजार में, पांच बजे तक भी नहीं मिला
- केयू प्रशासन की कार्यप्रणाली से खफा रहे दूर-दराज से आए सैकड़ों विद्यार्थी, बोले: क्या ऐसी है ए-प्लस ग्रेड यूनिवर्सिटी
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। रिजल्ट ब्रांच के पंजीकरण कार्यालय में वीरवार को सैकड़ों विद्यार्थी माइग्रेशन न मिलने के कारण कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली से खफा दिखे। बीए, बीटेक, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमकॉम, एलएलबी सहित अन्य अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट के विद्यार्थी जुटे रहे। जबरदस्त हंगामे के बीच कई विद्यार्थियों को माइग्रेशन सर्टिफिकेट मिला तो अधिकांश बच्चे लेटलतीफी के चलते वापस लौट गए।
हिसार, फतेहाबाद सहित अन्य दूरस्थ स्थानों से माइग्रेशन लेने आई मोनिका, सुदेश, पूजा और रमन इत्यादि ने यूनिवर्सिटी प्रशासन की कार्यप्रणाली को बेहद ढीली करार दिया। सुदेेेेश ने बताया कि वे सुबह 10 बजे से बहन मोनिका को साथ लेकर बीकॉम का माइग्रेेशन सर्टिफिकेट लेने पंजीकरण कार्यालय में पहुंच गए थे, लेकिन यहां के अधिकारी एवं कर्मियों ने उनका सर्टिफिकेट बनाने की बजाय सिफारिशी लोगों को डील किया। वहीं मोनिका एवं दीपेंद्र के अनुसार कुछ व्यक्ति जो कि स्टूडेंट ही नहीं लगते थे, वे आए और दस-दस, बीस-बीस फॉर्म एकसाथ देकर अपना सर्टिफिकेट बनवाने लगे। जब कई घंटों से खड़े विद्यार्थियों ने थोड़ा विरोध जताया तो अधीक्षक उन पर ही भड़क गए और सर्टिफिकेट बनाने में देरी की। पंजीकरण कार्यालय से पांच बजे के बाद निकले फतेहाबाद वासी दीपेंद्र बराड़ ने आरोप लगाया कि माइग्रेेशन लेने के दौरान अधीक्षक ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। बताया जाता है कि पंजीकरण कार्यालय के अधीक्षक की दुर्व्यवहार संबंधी शिकायत कुछ दिन पहले ही वीसी को सौंपी गई है, जिसके बाद अधीक्षक कई दिन की छुट्टियों पर चले गए थे। हिसार से सुदेश और फतेहाबाद से दीपेंद्र ने केयू प्रशासन की व्यवस्था पर तंज कसते हुए सवाल उठाया कि ए-प्लस ग्रेड यूनिवर्सिटी ऐसी ही होती है क्या? विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि माइग्रेशन सर्टिफिकेट समय पर तैयार किए जाने की व्यवस्था की जाए।
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पांच बजे के बाद भी लगी रही भीड़
समय पर जरूरी कागजात न बनने के चलते वीरवार को पांच बजे के बाद भी पंजीकरण कार्यालय में विद्यार्थियों की भारी भीड़ रही। दूर-दराज से आए विद्यार्थी लगातार अधीक्षक से अपने माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनवाने की गुहार लगाते रहे। शाम को अपने-अपने गंतव्य तक जाने वाली गाड़ियां लेट होने की टीस भी उनके चेहरों पर स्पष्ट दिखाई दी। फतेहाबाद से बीए का माइग्रेशन लेेने आए दीपेंद्र बराड़ ने कहा कि पंजीकरण कार्यालय वाले जानबूझकर बाय हैंड सर्टिफिकेट को भी समय पर नहीं देते। साढ़े चार बजे फतेहाबाद की ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन पांच बजे के बाद फ्री होकर अब लेट तक घर पहुंचने में काफी दिक्कतें आएंगी।

दूसरी सीटों पर भी दी जा रही सर्टिफिकेट बनाने की जिम्मेदारी
वहीं विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि यह समस्या स्टाफ की कमी के चलते पैदा हो रही है। पंजीकरण कार्यालय में जिन कर्मचारियों के कंधों पर माइग्रेेशन बनाने की जिम्मेदारी है, वे यह काम अपने विभाग के दूसरे कर्मचारियों पर डाल कर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते हैं। इस वजह से विद्यार्थियों के अलावा दूसरी सीटों पर कार्य करने वाले कर्मचारी भी परेशान हैं।
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कार्यालय में स्टाफ की कमी, सात बजे काम निपटा कर लौटी हूं घर: अधीक्षक
पंजीकरण कार्यालय अधीक्षक पिंकी कालड़ा ने कहा कि यह माइग्रेशन लेने का सीजनल मौका होता है। इस दौरान बच्चों की संख्या रूटीन के मुकाबले कुछ ज्यादा बढ़ जाती है, लेकिन फिर भी अपनी तरफ से उन्होंने बच्चों को परेशानी से बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया और अब लगभग सात बजे तक बच्चों को फ्री करके कार्यालय से घर लौटीं। कार्यालय में स्टाफ की कमी है, इसीलिए देरी हो रही है। वहीं उन्होंने दुर्व्यवहार संबंधी आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे बच्चों को सुविधा देने के लिए ही बैठे हैं। यदि फिर भी बच्चों को ऐसा लगता है तो उनकी इंक्वायरी करा ली जाए।
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