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पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए गीता ज्ञान के साथ आरटीआई ज्ञान भी जरूरी : कपूर

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पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए गीता ज्ञान के साथ आरटीआई ज्ञान भी जरूरी : कपूर
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
बड़े-बड़े धार्मिक आयोजनों में भागवत गीता पर लंबे चौड़ेे उपदेश प्रवचन देने वाले स्वामी ज्ञानानंद 60 दिन बीतने के बाद भी आरटीआई का जवाब देने के लिए तैयार नहीं हैं। आरटीआई कानून के अनुसार यह सूचना 30 तीन में देनी थी। जन अभियान मंच के संस्थापक और आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने स्वामी ज्ञानानंद महाराज से पूछा है कि भागवत गीता का ज्ञान बड़ा है या आरटीआई का ज्ञान, जो 60 दिन बीत जाने पर भी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का संगठन जीयो गीता संस्थानम मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं। कपूर ने महाराज से कहा कि भागवत गीता के ज्ञान के साथ पारदर्शिता-जवाबदेही के लिए आरटीआई एक्ट का ज्ञान होना भी जरूरी है। वरना, जुर्माना लग सकता है।
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कपूर ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि उन्होंने 20 दिसंबर को आरटीआई लगाकर स्वामी ज्ञानानंद के एनजीओ जीयो गीता संस्थानम के संविधान, कार्यक्रम और पदाधिकारियों की सूची मांगी थी। साथ ही कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) ने उनके 27 नवंबर के आरटीआई आवेदन को 22 दिसंबर को जीया गीता संस्थानम को भेजकर सूचना मांगी थी। इसके तहत कपूर ने कुरुक्षेत्र में नौ एकड़ भूमि पर निर्माणाधीन गीता रिसर्च सेंटर के स्वीकृत नक्शे और इसके सर्टिफिकेट की प्रतियां मांगी गई थीं। कपूर ने बताया कि दो महीने बीत जाने पर भी स्वामी ज्ञानानंद के एनजीओ ने उनकी आरटीआई की सूचना नहीं दी है। कपूर ने इसके विरुद्ध आरटीआई एक्ट-2005 के सेक्शन 19(1) के अंतर्गत जीयो गीता संस्थानम के प्रथम अपीलीय अधिकारी को अपील करके तत्काल सूचनाएं दिलाने की मांग की है। साथ ही आरटीआई एक्ट-2005 का सम्मान करने की मांग भी स्वामी ज्ञानानंद से की है। कपूर ने कहा कि यदि सूचना नहीं दी गई तो वह राज्य सूचना आयोग में अपील करेंगे।
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