अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
स्वर्ण जयंती के चलते मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर की भरतमुनि रंगशाला में साप्ताहिक संध्या के तहत पंजाबी नाइट आयोजित की गई। इस अवसर पर शमिंद्र शम्मी ने गुरदास मान के गीत प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। कार्यक्रम में पंजाबी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र सिंह विर्क मुख्य अतिथि थे। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय सिक्ख संगत के जिलाध्यक्ष परमजीत सिंह रहे। मंच का संचालन विकास शर्मा ने किया।
मैक के मुख्य सलाहकार महेश जोशी ने कहा कि विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से संस्कृति का विस्तार करना ही मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर का ध्येय है। इस कारण प्रदेश के सभी कलाकारों को मैक मंच प्रदान कर रहा है। मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह विर्क ने कहा कि कला के बिना जीवन अधूरा होता है। कला प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का हिस्सा होती है। कला का संवर्द्धन और संरक्षण करते हुए युवा पीढ़ी तक संस्कृति को पहुंचाना मैक की अटूट पहल है। शमिंद्र शम्मी ने अपने कार्यक्रम की शुरुआत सूफी गीत दिवानी दिवानी मैं तो रे दिवानी, अपने पिया की दिवानी से किया। कमली यार दी कमली, सोणा नहीं आया माही नहीं आया, छन्नों दा जवानी विच पैर पै गया, पिण्ड विच मुण्डया दा कहर पै गया, काला डोरया कुण्डे नाल अड़या ओए छोटा देवरा पाबी नाल लड़या ओए सुनाकर शम्मी ने खूब तालियां बंटोरी। शमिंद्र शम्मी ने श्रोताओं की फरमाइश पर गुरदास मान के बहुत से गीत प्रस्तुत किए। मामला गड़बड़ है, यार बदनीतियां तू चंगी नहीं कितीयां, दिल दा मामला है, की खट्या मैं तेरी हीर बणके, बाबे पंगड़ा पोंदे ने जैसे गीत जब शम्मी ने सुनाने शुरू किए तो श्रोता भी अपनी सीट से उठ खड़े हुए। गीतों पर सभी ने थिरकना शुरू कर दिया। एक के बाद एक बेहतरीन गीत ने सभी में जोश भर दिया। इस अवसर पर लखविंद्र पाल सिंह ग्रेवाल, एडवोकेट सोमनाथ कक्कड़, सूफी गायक राज गुरमीत, डॉ. कृष्ण कुमार, स्वामी सत्यप्रेम भिक्षु, नरेश सागवाल, शिवकुमार किरमिच, मैक ललित कला समन्वयक सीमा कांबोज, मदन डागर, धर्मपाल आदि उपस्थित रहे।