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मारपीट के डर से बाल अनाथ आश्रम से देर रात भागी लडकी

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फोटो 6,7
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मारपीट के डर से बाल अनाथ आश्रम से देर रात भागी लड़की
- डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर शहर पहुंची तो कुत्ते पीछे पड़े
- लोग लड़की को ले गए अनाथ आश्रम, संचालक को देख फिर भागी
अमर उजाला ब्यूरो
लाडवा।
बाल अनाथ आश्रम में मारपीट के डर से दस वर्षीय एक बच्ची बुधवार देर रात आश्रम से भाग गई। कुछ शहरवासी पुलिस की मौजूदगी में उसे बाल आश्रम छोड़ने आए तो वह दोबारा देर रात उनके सामने से ही भाग गई। उसका वीरवार देर शाम तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। लड़की के इस तरह देर रात भागने से जहां बाल अनाथ आश्रम रहने वालों बच्चों की देखभाल व सुरक्षा पर सवालिया निशान लगे हैं वहीं पुलिस इस मामले की कोई जानकारी न होने का हवाला देकर टालमटोल करती दिख रही है।
लाडवा से गांव समालखा जाने वाली सड़क पर स्थित बाल अनाथ आश्रम से बुधवार देर रात 11 बजे दस वर्षीय एक लड़की मौका देखकर भाग गई। वह आश्रम से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पैदल चलकर लाडवा अनाजमंडी के पीछे रेड रोड स्थित एक कॉलोनी में पहुंची। कॉलोनी में लड़की के पीछे कुत्ते पड़ गए। इसके बाद वह भाग कर एक कोठी के सात फुट के गेट को फांदकर कोठी में दाखिल हुई और कोठी का दरवाजा खटखटाकर मदद की गुहार लगाई। कोठी की मालकिन आशा अरोड़ा और उनके पुत्र मोहित अरोड़ा ने बताया कि लड़की रात करीब साढ़े बारह बजे उनकी कोठी में आई थी और बुरी तरह डरी हुई और भूखी थी। अरोड़ा ने बताया कि लड़की ने आते ही घर में एक रात के लिए जगह देने की गुहार लगाई। उसने बताया कि वह बाल अनाथ आश्रम में रहती है। वहां उसके साथ मारपीट की जाती है और भूखा रखा जाता है। आशा ने बताया कि उन्होंने उसे खाने के लिए कुछ मिठाई दी और उनके बेटे मोहित ने पुलिस को फोन किया और कॉलोनी के चौकीदारों को बुलाया। आशा के अनुसार पुलिस व चौकीदारों के आने के बाद मोहित ने उस बच्ची को पुलिस के सुपुर्द करना चाहा तो पुलिसकर्मियों ने लड़की को वहीं रखने व मामले को सुबह देखने की बात कहकर पल्ला झाड़ना चाहा। इस पर मोहित अरोड़ा और उनके पड़ोसियों की पुलिसकर्मियों से बहस हो गई। बाद में पुलिस मोहित के साथ लड़की को बाल अनाथ आश्रम छोड़ने पर राजी हो गई। पुलिस मोहित अरोड़ा व दोनों चौकीदारों के साथ वीरवार तड़के दो बजे समालखा रोड बाल अनाथ आश्रम पहुंची तो लड़की ने बाल अनाथ आश्रम जाने से इनकार कर दिया। मोहित ने बताया कि लड़की उसे वापस अपने साथ ले जाने के लिए कहने लगी। इस दौरान आश्रम का संचालक शीशपाल मढान वहां आ गया जिसे देखकर लड़की हाथ छुड़ाकर आश्रम के पास चरी व गन्ने के खेतों में भाग गई। समाचार लिखे जाने तक न तो लड़की कुछ पता चला और न ही बाल अनाथ आश्रम संचालक ने पुलिस को कोई शिकायत दी थी।
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बच्ची से मारपीट की जांच की जाए: शहरवासी
लाडवा की रेड रोड कॉलोनी के मोहित अरोड़ा, जगमोहन शर्मा, अशोक कुमार, नरेश गोयल, रामगोपाल व विनोद कुमार आदि का कहना है कि लड़की जब उनकी कॉलोनी में आई तो बुरी तरह डरी हुई थी और उसने अपने साथ मारपीट करने की जानकारी देते हुए अपने हाथ पर चोट के निशान भी दिखाए थे। उन्होंने कहा कि आश्रम में वापस छोड़ने पर वह मारपीट से डर कर ही आश्रम के बाहर से भागी। उन्होंने प्रशासन से इस मामले की जांच की मांग की है।
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बच्ची पहले भी भाग चुकी है : संचालक
बाल अनाथ आश्रम के संचालक शीश पाल मंढान का कहना है कि यह लड़की आश्रम से पहले भी तीन बार भाग चुकी है, जिसे तलाश कर वापस लाया गया था। उन्होंने बताया कि बाल कल्याण समिति ने मार्च 2017 में इस लड़की को इसके तीन अन्य भाई-बहनों के साथ आश्रम में छोड़ा था। लड़की की मां की मौत हो चुकी है और पिता टीबी का मरीज है। शीशपाल ने बाल अनाथ आश्रम में बच्चों के साथ किसी तरह की मारपीट से इनकार किया है।
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नहीं है मामले की जानकारी : थाना प्रभारी
लाडवा के थाना प्रभारी निर्मल कुमार ने इस संबंध में मामले की जानकारी होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उनके पास इस तरह को कोई भी मामला नहीं आया है। वहीं लड़की को छोड़ने के समय पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बारे में भी उन्होंने अनभिज्ञता जताई।
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