अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
जिले में बुधवार की अल सुबह ही इंद्रदेव की मेहरबानी दिखी। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी की मार झेल रहे लोगों ने झमाझम बारिश से राहत की सांस ली तो वहीं कई जगह पानी भरने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिले के लाडवा क्षेत्र में सबसे अधिक 35 एमएम बारिश दर्ज की गई तो वहीं पिहोवा में सबसे कम बारिश रही।
बारिश के बाद करीब 10 बजे तक जारी रही बूंदाबांदी के बाद दिन भर ठंडी हवाएं चली, जिससे मौसम सुहाना हो गया। हालांकि बारिश के बाद पूरा दिन मौसम साफ रहा, लेकिन बारिश के कारण लोगों ने गर्मी से भारी राहत महसूस की, जिसके साथ ही सार्वजनिक स्थलों, बाजारों में भी एकाएक ही रौनक लौट आई। सुबह करीब 3 बजे हल्की बारिश शुरू हुई तो तेज हवाएं भी चलने लगी। इसके बाद करीब सात बजे जोरदार बारिश हुई, जिससे धर्मनगरी के अधिकतर क्षेत्र पानी से लबालब हो गए। इसके बाद भी कई घंटे तक बूंदाबांदी चलती रही तो वहीं दिन भर ठंडी हवाएं भी चली। बता दें कि पिछले करीब एक सप्ताह से भीषण गर्मी पड़ रही थी। पारा लगातार बढ़ता हुआ 45 डिग्री के पार पहुंच गया तो दिन के साथ-साथ रात को भी लू चलने लगी थी। ऐसे में जनजीवन अस्त व्यस्त होने लगा तो सार्वजनिक स्थलों व बाजारों की रौनक भी गायब हो गई थी। बाजारों में खरीददारी पर बड़ा असर पड़ने लगा था तो लोग दिन के समय घरों में दुबकने को मजबूर होने लगे थे। लोगों के साथ-साथ पशु पक्षियों का भी जीना बेहाल होने लगा था। बुधवार अल सुबह आई बारिश ने एकाएक ही गर्मी से राहत दिलाई तो पारा करीब 10 डिग्री नीचे गिर गया। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बारिश का कई दिनों तक फायदा होगा और गर्मी का असर कम रहेगा।
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लाडवा में हुई 35 एमएम बारिश
जिला के लाडवा क्षेत्र में 35 एमएम बारिश दर्ज की गई तो वहीं पिहोवा में 26 एमएम, थानेसर में 27 एमएम, बाबैन में 30 एमएम, इस्माईलाबाद में 28 एमएम व शाहाबाद में 32 एमएम बारिश हुई।
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धान की पौध व सब्जी की फसल को फायदा: कर्मचंद
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद का कहना है कि जिला भर में अच्छी बारिश रही है। जिससे न केवल गर्मी से बड़ी राहत मिली है बल्कि किसानों द्वारा रोपी गई धान की पौध व सब्जियों व अन्य फसलों में बड़ा फायदा होगा।
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फोटो-23
पानी से लबालब हुई सड़कें, बह गई सूरजमुखी की फसल
इस्माईलाबाद। बारिश से जहां आम आदमी को गर्मी से राहत मिली वहीं दालों व सूरजमुखी उत्पादक किसानों के लिए यह किसी आफत से कम नहीं है। इसके साथ ही गांवों में विकास के दावों की पोल भी खोलकर रख दी। आलम यह था कि गांव झांसा के सभी चौराहे, गलियां व मुख्य बाजार व अनाज मंडी तालाब में तब्दील नजर आए और पंजाब नेशनल बैंक के सामने भी करीब 1 फीट तक पानी भर गया था। आधी रात से शुरू हुई इस बारिश से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। बारिश के समय करीब 15 से 20 एकड़ तक की फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी थी। मंडियों में बिकवाली के लिए आई सूरजमुखी की फसल भीगने के अलावा तेज बारिश व हवा के बीच बह गई है। वहीं खेत में कटाई की गई दालों व सूरजमुखी की फसल को भी भारी नुकसान हो सकता है। बारिश काफी ज्यादा होने से खेतों में अगले कई दिनों तक फसल की निकासी का काम नहीं हो सकेगा। जिस कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। गांव सलपानी के किसान हरभजन सिंह ने बताया कि सूरजमुखी की फसल को जहां पहले से ही कोई खरीददार नहीं मिल रहा है। लेकिन रात को होने वाली बारिश में मंडी में पड़ी उसकी 4 एकड़ की सूरजमुखी की फसल पूरी बह गई है।
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कछुआ गति से चल रहा मंडी में शेड लगाने का काम
गांव झांसा में 17 एकड़ में नई मंडी बनानी प्रस्तावित हुई थी। जिसके तहत उसके आधे हिस्से का काम हो गया है और आधी मंडी अधूरी पड़ी है। वही पिछले करीब पिछले 1 साल से मंडी में शेड लगाने का काम कछुआ गति से काम चल रहा है। अगर समय रहते शेड बनाने का कार्य पूरा किया जाए तो किसान भारी आर्थिक नुकसान से बच सकते है। अनाज मंडी के पूर्व प्रधान दिनेश कंसल बिट्टू व निर्दोष ककक्ड़ ने बताया कि नई अनाज मंडी का कार्य न पूरा होने से किसान के साथ साथ आढ़तियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है।