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जिला भर में रोडवेज की 13

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रअमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र। अपनी मांगों को लेकर रोडवेज कर्ऱ्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर मंगलवार को दिन भर जिला की करीब 138 से अधिक बसों का चक्का जाम रहा, जिससे विभाग को करीब 10 लाख रुपये का फटका लगा है। रोडवेज कर्मचारी बसों को छोड़ दिन भर धरना देते रहे तो सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

हड़ताल में सभी यूनियनें एकजुट भी दिखाई दी और हड़ताल पूरी तरह से सफल रही, लेकिन यात्रियों को अपने-अपने गंत्वयों तक पहुंचने के लिए भटकने को मजबूर होना पड़ा। हड़ताल के चलते बस अड्डे पर पुलिस बल तैनात रहा तो वहीं रोडवेज बसों की हड़ताल का निजी बस व अन्य वाहन चालकों ने जमकर फायदा उठाया और करीब दो गुना तक यात्रियों से किराया वसूल किया। अनेकों वाहन चालकों ने मनमाना किराया भी वसूल किया तो यात्रियों को लेकर निजी बस चालकों में कहासुनी भी हुई। मोटर वाहन एक्ट 1988 बिल में संशोधन के विरोध में कुरुक्षेत्र से अल सुबह चार बजे दिल्ली- मथुरा के लिए चलने वाली बस से लेकर दिन में बस अड्डे से एक भी बस बाहर नहीं जाने दी और लगभग सभी कर्मचारियों ने हड़ताल का समर्थन किया। रात को रूटों पर गई बसें भी जब अड्डे पर वापस लौटी तो उनके चालक, परिचालक भी बसें रोककर हड़ताल के समर्थन में आ गए।
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कर्मचारी नेताओं ने कहा मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2017 को रद्द करवाने, सरकार द्वारा 700 बसें ठेके पर लेने के विरोध में, आमजन की बेहतर, किफायती, व सुरक्षित सरकारी परिवहन सेवा को बचाने के लिए व परिवहन के क्षेत्र में सरकारी रोजगार को बचाने आदि मुद्दों को लेकर पूरे प्रदेश में रोडवेज का पूर्ण चक्का जाम किया गया। उन्होंने कहा की केंद्र सरकार नए मोटर व्हीकल एक्ट को लागू करके सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र का पूर्ण निजीकरण तथा आम जनता से किफायती व सुरक्षित सरकारी परिवहन सेवा छीनना चाहती है । इससे सार्वजनिक परिवहन सेवा का क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा।

इन कर्मचारी नेताओं किया संबोधित

एसकेएस जिला प्रधान सुरेश गुढ़ा, राज्य उपप्रधान मूल चंद तिगरी, डिपो प्रधान बलवंत देशवाल, नरेश कुमार ,भीम सिंह, महासंघ के नेता सुरेंद्र बारवा व सूरजभान, प्रेम सिंह मराठा व गजे सिंह जैनपुर के अलावा इंटक सहित अन्य रोडवेज कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन ने हड़ताल खुलवाने के लिए दबाव देने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो पाया और हर कर्मचारी ने हड़ताल को सफल बनाया। उन्होंने दावा किया कि डिपो की सभी बसें जाम रखी गई।


दो घंटे में हड़ताल से न लौटने पर सेवाएं समाप्त करने का थमाया नोटिस, नहीं हुआ असर

हड़ताल के बीच प्रशासन अचानक ही दोपहर के समय हरकत में आया और नारेबाजी कर रहे प्रोबेशन पर चल रहे कर्मियों को नोटिस थमा दिया, जिसमें दो घंटे में ड्यूटी पर न लौटने पर सेवाएं समाप्त कर देने का अल्टीमेटम दिया गया। कर्मचारियों पर इस नोटिस का कोई विशेष असर दिखाई नहीं दिया और न ही देर शाम तक विभाग कोई कार्रवाई कर पाया था। विभाग ने नोटिस में स्पष्ट किया था कि इन कर्मचारियों का प्रोबेशन अभी पूरा नहीं हुआ है, जिसके चलते सेवाएं समाप्त की जा सकती है।


करीब 35 बसें रही रूटों पर : जीएम

कुरुक्षेत्र डिपो जीएम लेखराज का कहना है कि हड़ताल में हालांकि सभी यूनियनें शामिल रही, लेकिन 173 बसों में से करीब 35 बसें रूटों पर चलती रही। ये बसें रात से ही डिपो से बाहर थी और इन्हें वहीं से ही अलग-अलग रूटों पर चलाया गया। उन्होंने दावा किया कि वर्कशॉप एवं कार्यालय कर्मचारी सभी ड्यूटी पर रहे जबकि अन्य हड़ताल पर उतरे कर्मचारियों की अनुपस्थिति दर्ज की गई है।


हड़ताल में फंस गया संस्कार में जा रहा परिवार

रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल का असर आम लोगों पर किस कदर पड़ा है, यह पिहोवा वासी ऋषिपाल का परिवार ही महसूस कर सकता है, जो अपने रिश्तेदार की मौत के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जाते हुए बीच अधर में ही फंस गया। ऋषिपाल ने बताया कि वह अपनी पत्नी सुषमा व बेटी रीतू के साथ हरिद्वार में अपने रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में जा रहा था। पिहोवा से निजी बस में सवार होकर कुरुक्षेत्र तक पहुंच गए, लेकिन यहां आकर ही पता चला कि हड़ताल है। अब वे कैसे पहुंच पाएंगे, समझ नहीं आ रहा।


बीमार बेटी को ले जा रही थी, लेकिन अब... राजकौर

गांव लुखी निवासी राजकौर ने बताया कि वह निजी बस से अपनी बीमार बेटी को लेकर कुरुक्षेत्र पहुंच गई, लेकिन अब करनाल कैसे पहुंच पाएंगी, यह सोच कर घबराईं है। कर्मचारियों की हड़ताल का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
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फोटो नंबर- 8


हड़ताल से यात्रियों को उठानी पड़ी परेशानी

इस्माईलाबाद। रोडवेज कर्मियों की हड़ताल का असर कस्बे में भी देखने को मिला। यात्रियों को अपने गंतव्य पर जाने में घंटो इंतजार करना पड़ा ,जिसके चलते भारी परेशानी उठानी पड़ी। कस्बा में बस स्टैंड पर शेल्टर न होने से यात्रियों को बरसात के मौसम में खुले आसमान के नीचे इंतजार करने पर मजबूर होना पड़ा। वहीं हड़ताल के चलते प्राइवेट वाहनों की चांदी बनी रही। यात्रियों को दो गुना तक किराया देकर अपने गंतव्य पर जाना पड़ा।
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