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प्रशासन ने दिखाई सख्ती, तो आधा घंटा भी नहीं टिक पाया कर्मचारियों का वर्कशॉप गेट पर लगाया ताला

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प्रदेश सरकार द्वारा लाई जा रही 720 निजी बसों के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों का चक्का जाम जिले में पूरी तरह विफल रहा। हरियाणा रोडवेज यूनियनें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और प्रदेश सरकार की सख्ती के आगे बिखर गईं। कर्मचारियों द्वारा वर्कशॉप गेट पर सुबह लगाया गया ताला आधा घंटा भी नहीं टिक सका। सड़कों पर बसों का संचालन भी सामान्य रहा।
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हरियाणा रोडवेेज वर्कर्स यूनियन के अलावा किसी यूनियन के कर्मचारियों ने धरना नहीं दिया। जिन कर्मचारियों ने धरना दिया, उन पर कार्रवाई के लिए भी रोडवेज प्रशासन ने तैयारी कर ली है। पूरे मामले की निगरानी के लिए डीसी डॉ. एसएस फुलिया व एसपी सुरेंद्र पाल सिंह ने मोर्चा संभाला है। निजी बसें लाए जाने के विरोध में रोडवेज जॉइंट एक्शन कमेटी व तालमेल कमेटी के आह्वान पर बुधवार को चक्का जाम का ऐलान किया गया था।

मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे ही कर्मचारियों ने बसें बंद कर दी थीं। सख्त रुख अपनाते हुए जहां एस्मा लागू कर दिया तो जिला प्रशासन ने देर रात बस अड्डे के आसपास धारा 144 भी लागू कर दी थी। बुधवार सुबह कर्मचारियों ने वर्कशॉप में खड़ी बसें रोकने की मंशा से वर्कशॉप गेट पर ताला जड़ दिया। इस पर डीसी डॉ एसएस फुलिया, एसपी सुरेंद्र पाल सिंह, रोडवेज जीएम लेखराज ने सख्ती दिखाई तो यह ताला भी आधे घंटे से पहले ही खुल गया।
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कर्मचारी भी बसें लेकर सड़कों पर निकल गए। कर्मचारियों की मानें तो चक्का जाम का आह्वान करने वाले कर्मचारी संगठनों के बीच आपसी तालमेल न होने के कारण ही हड़ताल सफल नहीं हो पाई। अब सभी संगठनों में एक-दूसरे पर आरोप लगाने का दौर भी शुरू हो गया है।

हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के ही अधिकतर कर्मचारी धरने पर बैठे रहे। इनमें डिपो प्रधान नवीन शर्मा, प्रदेश उप महासचिव माया राम उनियाल, रणजीत करोड़ा, प्रदीप शर्मा, हेमराज सैनी, नरेंद्र पांचाल, सुनील तंवर शामिल रहे।

सरकार ने किया कर्मचारियों की आवाज दबाने का काम : माया राम
कर्मचारी यूनियन के राज्य उपमहासचिव माया राम उनियाल ने धरने को संबोधित करते कहा कि सरकार ने कर्मचारियों की आवाज दबाने का काम किया है, जो तानाशाही है। रोडवेज कर्मचारी विभाग को बचाने व जनहित में हड़ताल कर रहे थे, लेकिन सरकार ने एस्मा का डर दिखाकर हड़ताल विफल कराई है।

जन संघर्ष मंच ने दिया हड़ताल को समर्थन
भले रोडवेज कर्मियों की हड़ताल सफल नहीं रही, लेकिन धरना दे रहे कर्मचारियों को समर्थन देने के लिए जन संर्घष मंच के जिला प्रधान संसार चंद, उषा रानी, सोमनाथ, कुलदीप सिंह, आरती सहित अन्य पदाधिकारी पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार एस्मा लगा कर कर्मचारियों की आवाज दफन कर रही है। इससे सरकार की दमनकारी नीति सामने आ गई है। ऐसे हालात में कर्मचारियों में सरकार के प्रति रोष और बढ़ेगा।

हड़ताल पर उतरे 40 कर्मचारियों भेजी सूची, सभी बसें चलाईं: जीएम
जीएम लेखराज का कहना है कि जहां सभी बसें रूटों पर सामान्य दिनों की तरह चलाई गईं वहीं हड़ताल कर रहे 40 कर्मचारियों की पहचान की गई है, जिनकी सूची सरकार को भेज दी गई है। उच्चाधिकारियों की ओर से जैसे ही आदेश आएंगे वैसे ही कार्रवाई की जाएगी।

डीसी ने किया बस अड्डों का निरीक्षण, तैनात रहे नोडल अधिकारी
रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के चलते डीसी डॉ. एसएस फुलिया ने मोर्चा संभाला और वे सुबह ही कुरुक्षेत्र सहित जिले के अन्य बस अड्डों पर पहुंच गए। उन्होंने करीब पौने सात बजे ही बस अड्डों का निरीक्षण किया। उन्होंने रोडवेज कर्मियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए कि एस्मा व धारा 144 का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस पर कर्मचारी हड़ताल से पीछे हट गए तो वहीं सभी बस अड्डों पर नोडल अधिकारी भी तैनात रहे।

रोडवेज कर्मियों की हड़ताल का नही दिखा लाडवा में असर
लाडवा। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल पूरी तरह विफल रही। यातायात पूरी तरह सामान्य रहा और लोगों को आने-जाने में कोई असुविधा नही हुई। हड़ताल को देखते हुए प्रशासन व पुलिस ने पुख्ता प्रबंध कर रखे थे। प्रशासन ने लाडवा बस स्टैंड पर नायब तहसीलदार आत्मप्रकाश की देखरेख में पुलिस, फायर ब्रिगेड को तैनात किया था। आरएएफ की दुर्गा वाहिनी भी बस स्टैंड पर मुस्तैद थी। एसडीएम कंवर सिंह ने भी बस स्टैंड व इंद्री चौक का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। नायब तहसीलदार आत्मप्रकाश ने बताया कि लाडवा में यातायात सामान्य है और कोई कर्मचारी हड़ताल पर नहीं रहा।

पिहोवा में 50 में से 40 बसें चलीं, एक घंटे बाद ही काम पर लौटे रोडवेज कर्मी
पिहोवा। हड़ताल पर गए रोडवेज कर्मचारी एस्मा के डर से एक घंटे के बाद ही काम पर लौट आए। हालांकि कुछ कर्मचारी धरना प्रदर्शन पर डटे रहे। बलदेव मामूमाजरा ने कहा कि प्रदेश सरकार रोडवेज को नीलाम करने पर तुली है। सरकार किलोमीटर स्कीम के तहत 720 प्राइवेट बसें चलाकर जनता एवं कर्मियों का शोषण कर रही है। जबकि रोडवेज में 500 बसें कर्मियों के बिना खड़ी हैं। इस स्कीम को रद्द कर सरकार रोडवेज में नई बसें शामिल करे और कर्मियों की भर्ती करे।

उन्होंने कहा कि रोडवेज के कई साथी हड़ताल छोड़कर जरूर गए हैं, लेकिन उनके जाने से हड़ताल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार की कार्रवाई चाहे जो भी हो, वह अपनी मांग पर अडिग हैं। उधर, संस्थान प्रबंधक रघबीर सिंह ने बताया कि पिहोवा रोडवेज डिपो में 50 बसें हैं। इनमें से करीब 40 बसें अपने अपने रूट पर चल रही हैं। पूर्व नियोजित हड़ताल का पिहोवा में कोई असर नहीं है। जो कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हैं उसकी रिपोर्ट बनकार उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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