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ब्रहमसरोवर से प्रतिदिन निकाली जा रही है 2 ट्राली घास की:चांवरिया

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अमर उजाला इंपैक्ट
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फोटो नंबर-20 और 36
- आखिरकार केडीबी जागा, सीईओ ने ब्रह्मसरोवर की सफाई के लिए नियुक्त किए छह स्वयंसेवक
- अब उठ रहा है बड़ा सवाल, कहां है कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के कर्मचारी
- सीईओ ने कहा स्वयं सेवक प्रतिदिन निकाल रहे हैं हाइड्रिला घास की दो ट्रॉली
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद केडीबी की नींद खुली है और छह स्वयंसेवक ब्रह्मसरोवर की सफाई के लिए लगाए गए हैं। मगर सवाल यह उठ रहा है कि ब्रह्मसरोवर की सफाई के लिए कार्यरत स्टाफ क्या कर रहा है। यह हालत तब है जब ब्रह्मसरोवर भारत सरकार की ओर से चयनित देश के 30 प्रतिष्ठित स्थलों में है।
अमर उजाला ने 16 जुलाई को ब्रह्मसरोवर में फैली गंदगी, खाली बोतलें व अन्य कचरे से ब्रह्मसरोवर के जल की पवित्रता भंग होेने का मुद्दा उठाया था। इसके अगले दिन कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पूजा चांवरिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ब्रह्मसरोवर की सफाई के लिए छह स्वयं सेवक लगाने की जानकारी दी। विज्ञप्ति में केडीबी की सीईओ ने कहा कि ब्रह्मसरोवर से घास निकालने के लिए 6 सुलभ स्वयंसेवक की नियुक्ति की गई है। यह सेवक प्रतिदिन ब्रह्मसरोवर से 2 ट्रॉली घास की निकाल रहे हैं। ब्रह्मसरोवर के पश्चिमी भाग को वर्ष 2017 में बिल्कुल खाली कराकर डीबेडिंग कराई गई थी, जिसमें घास नहीं रही और अब ब्रह्मसरोवर के पूर्वी तट की घास निकलवाया जाना प्रस्तावित है। इस कार्य को लगभग 7 से 8 माह का समय लगता है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र गीता महोत्सव समारोह के बाद यह कार्य कराया जाना है। इस समय यह हाइड्रिला घास हवा के साथ-साथ किनारे पर आती रहती है।
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पवित्र जल में गंदगी देखकर भंग होती श्रद्धालुओं की आस्था
सोमवार को अमर उजाला ने ब्रह्मसरोवर के जिस हिस्से में घास-गंदगी मामला प्रकाशित किया था, वह ब्रह्मसरोवर की ऐसी लोकेशन है, जहां स्नान के बाद दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु अक्सर सेल्फी और फोटो खिंचवाते देखे जा सकते हैं। मगर पौराणिक मंदिर सर्वेश्वर महादेव मंदिर के पास ब्रह्मसरोवर के पवित्र जल के यह हालात देखकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आस्था भंग होती है।

केंद्र सरकार के मंत्रालय से की गई है डिमांड-मानद सचिव
केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि भारत सरकार के जल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने ब्रह्मसरोवर सहित अन्य चयनित प्रमुख स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं रखरखाव के लिए जिन चीजों की आवश्यकता है, उसकी सूची मांगी थी। हैदराबाद कॉन्फ्रेंस में केडीबी ने यह डिमांड मंत्रालय को सौंपी है। लोगों में भी यह जागरुकता होना लाजिमी है कि सरोवर को स्वच्छ और साफ रखने में वे कैसे सहयोग दें।

ब्रह्मसरोवर की अलग-अलग दिशा में लगेंगे बॉटल क्रशर
ब्रह्मसरोवर में चलायमान जल के लिए मौजूदा सरकार ने 2017 में 17 करोड़ रुपये खर्च किए थे। ब्रह्मसरोवर के जल को स्वच्छ बनाने के लिए जल चक्की भी लगेगी। केंद्र सरकार के मंत्रालय से पानी को स्वच्छ बनाने के लिए जल चक्की, बॉटल क्रशर मशीनों के अलावा काफी सामग्री मांगी है। सामग्री के मिलने के पश्चात सरोवर के घाटों, जल को पवित्र और स्वच्छ रखने के अलावा साफ सफाई करने में काफी मदद मिलेगी।
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तीर्थ में नहीं सिर्फ एक घाट में था पानी,दो दर्जन से अधिक हुए थे घायल
पिहोवा के तीर्थ पुरोहित सुभाष चंद्र और विनोद पांचौली के मुताबिक केडीबी के दावे हवा हवाई हैं। 14 और 15 जुलाई को यहां चौदस और अमावस्या का स्नान था, लेकिन इन महत्वपूर्ण मौके पर पिहोवा का महत्वपूर्ण सरस्वती तीर्थ पूरी तरह से खाली था। जबकि सिर्फ एक घाट को पानी के टैंक की तरह भरा गया था। हजारों श्रद्धालुओं ने दो दिन इसी छोटे से टैंक में स्नान किया। फिसलन अधिक होने के कारण दो दर्जन से अधिक श्रद्धालु जख्मी हुए थे।
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