यह मौसम पीला रतुआ के लिए अनुकूल, किसान रखें खेतों में नजर : कर्मचंद
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
जिला स्तरीय पेस्ट एवं एडवाइजरी यूनिट की बैठक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. कर्मचंद की अध्यक्षता में हुई। इस दौरान सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. बलबीर सिंह भान, उप मंडल कृषि अधिकारी थानेसर डॉ. सुरेश, उप मंडल कृषि अधिकारी पिहोवा डॉ. मदन सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेएन भाटिया और यूनिट के अन्य सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में गेहूं में लगने वाले घातक रोग पीला रतुआ और अन्य फसलों के विभिन्न कीड़े, बीमारियों पर चर्चा की गई। यूनिट सदस्य सचिव सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी कुरुक्षेत्र डॉ. बलबीर सिंह भान ने बताया कि अभी तक कुरुक्षेत्र में कहीं भी पीला रतुआ के लक्षण नहीं मिले हैं। हालांकि, यह मौसम पीला रतुए के संक्रमण के लिए अनुकूल है। इसलिए किसान नियमित रूप से खेतों में जाकर गेहूं में पीले रतुए की जांच करें।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में संक्रमण फोसाई के रूप में 10-15 पौधों पर एक गोल दायरे में होता है। इसके बाद यह खेत में फैलता है। पीबीडब्लू 343, पीबीडब्ल्यू 373, डब्ल्यूएच 147, पीबीडब्लू 550, एचडी 2967, डीबीडब्ल्यू 88, एचडी 3059, डब्लूएच 1021 और सी 306 जैसी किस्मों में पीले रतुए का प्रकोप होने की आशंका है। इन पर नजर रखी जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि संक्रमण के होने पर रोगी पत्ती पर पीले पाउडर के साथ पीली पट्टियों का विकास होता है। जब दो उंगलियों के साथ संक्रमित पत्ती रगड़ते हैं तो पीले रंग का पाउडर उंगलियों पर आ जाता है। पीला रतुआ आने पर 200 मिलीलीटर प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी को 200 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ प्रभावित फसल पर फ्लैट फैन नोजल से स्प्रे करें। रोग के प्रकोप तथा फैलाव को देखते हुए दूसरा छिड़काव 15 से 20 दिन के अंतराल पर करें।