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गीता जयंती : दावा इंटरनेशनल लेवल का, ब्रांडिंग में फेल

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गीता जयंती : दावा इंटरनेशनल लेवल का, ब्रांडिंग में फेल
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव-2017 की ब्रांडिंग और अन्य इंतजामों में हो रही लेटलतीफी पिछले चार माह की दर्जनों बैठकों के प्रयासों पर पानी फेर रही है। केडीबी के मानद सचिव भी मानते हैं कि जिन एजेंसियों को पूरे इंतजाम करने हैं, उन्हें अब तक काम ही अलॉट नहीं किए गए। ये हालात तब हैं जब कि पिछले कई महीनों में गीता जयंती के लिए दर्जनों बैठकें और घोषणाएं कुरुक्षेत्र के साथ ही चंडीगढ़ और दिल्ली तक में हो चुकी हैं। बावजूद इसके इस उत्सव टेंडरों, तैयारियों और व्यवस्था में लेटलतीफी साफ दिखाई देती है। इस देरी पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि गीता जयंती उत्सव का समय एक साल पहले से निर्धारित होता है। यह दूसरा मौका है, जब गीता जयंती महोत्सव 17 नवंबर से तीन दिसंबर तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने जा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि ठीक 14 वें दिन इस विराट उत्सव का आगाज कुरुक्षेत्र में होगा। इसमें भारत के राष्ट्रपति, मॉरिशस के पूर्व प्रधानमंत्री सहित कई बड़ी हस्तियां शिरकत करेंगी। छह देशों और भारत के सभी राज्यों के कलाकार भी इस उत्सव में शामिल होंगे। इस पर भी अब तक इस उत्सव की ब्रांडिंग शुरू नहीं हुई है। पिछले वर्षों में हरियाणा रोडवेज की बसों पर गीता जयंती की शानदार ब्रांडिंग करीब दो महीने पहले शुरू हो जाती थी। अब इस महोत्सव में मात्र चार दिन रह गए हैं, लेकिन कई पर भी इसका प्रचार-प्रसार नजर नहीं आ रहा।
ब्रांडिंग में हरियाणा टूरिज्म की साइटें भी पिछड़ीं
किसी भी उत्सव को इंटरनेशनल लेवल पर आयोजित करने का मकसद सीधे तौर पर अन्य देशों की भागीदारी सुनिश्चित करना होता है। दूसरे देशों के आम और खास नागरिक भी इस आयोजन का हिस्सा बनें। अब सवाल उठ रहे हैं कि जिस जिले और राज्य में यह आयोजन होने जा रहा है, वहीं प्रचार नहीं हो रहा तो दूसरे देशों के लोगों को कैसे इससे जोड़ने में सफलता मिलेगी। बता दें कि अभी तक हरियाणा टूरिज्म की अधिकृत साइट पर भी गीता जयंती उत्सव की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जब किसी को पता ही नहीं होगा, तो वे इस महोत्सव में जुड़ कैसे पाएंगे।
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अव्यवस्थाएं चरम पर
जीटीरोड पिपली में गीता द्वार से सटे हरियाणा टूरिज्म के पुराने कांप्लेक्स को पर्यटक सूचना केंद्र के लिए केडीबी को सौंपा गया है। यहां पहले भी सूचना केंद्र स्थापित किया गया था, लेकिन बाद में हालात बिगड़ने के बाद उसे बंद कर दिया गया। इसी गेट पर एक छोटे से कमरे में पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित किया था। इसकी दुर्दशा के बारे में अमर उजाला ने प्रकाशित भी किय था। इसके बाद आज यहां टायलेट निर्माण के लिए खुदाई का काम गीता जयंती से ठीक 14 दिन पहले शुरू हुआ है।

हरियाणा पर्यटन विभाग भी गीता जयंती में सहयोगी है। वर्षों से गीता जयंती के तमाम पोस्टर और अन्य प्रचार सामग्री में पर्यटन विभाग को भी स्थान मिल रहा है। बावजूद इसके अब तक हरियाणा टूरिज्म के कांप्लेक्सों में प्रचार सामग्री और साइट पर इस समारोह की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस सबंध में पर्यटन विभाग के डिवीजनल मैनेजर अनिल कुमार ने यह कह कर पल्ला झाड़ दिया कि यह जिम्मा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का है। कार्यक्रम का शेड्यूल क्या होगा, आयोजन किस प्रकार होगा, क्या कार्यक्रम होंगे। इसकी जानकारी कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को उपलब्ध करानी थी। अब तक न तो पर्यटन विभाग के कांप्लेक्स में पहुंची है और न ही टूरिज्म विभाग की अधिकृत के लिए सामग्री उपलब्ध कराई गई है।

दिल्ली में काफी टेबल बुक तक है नदारद
अकेले कुरुक्षेत्र जिला में हरियाणा टूरिज्म चार कांप्लेक्स हैं। इनमें जीटीरोड पिपली स्थित पैराकीट, इसी से सटे आयसिस, कुरुक्षेत्र कैथल मार्ग पर ब्रह्मसरोवर के निकट नीलकंठी यात्री निकास और हिसार-चंडीगढ़ रोड पर पिहोवा में स्थित अंजन यात्रिका शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि 15 अक्तूबर को दिल्ली में गीता जयंती की ब्रांडिंग के लिए पोस्टर और वीडियो के अलावा टेबल बुक मुख्यमंत्री ने जारी की थी। अब तक किसी भी पर्यटन वभाग के किसी भी कांप्लेक्स में इनमें से कोई सामग्री न तो भिजवाई गई और न ही वीडियो और प्रचार सामग्री अपलोड की गई। स्थिति साफ है कि किसी भी दूसरे राज्य या देश से आने वाले लोग सबसे पहले उस क्षेत्र के अधिकृत टूरिस्ट साइटों को खंगालते हैं, जबकि यहां ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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अभी काम ही अलॉट नहीं हुए एजेंसियों को : केडीबी मानद सचिव
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव अशोक सुखीजा ने बताया आज उन्होंने ब्रह्मसरोवर और आयोजन स्थल के आसपास का मुआयना किया है। उन्होंने माना कि अभी रिपेयर वर्क और बहुत से काम अधूरे हैं। लेकिन, अधिकारियों ने यह काम 15 नवंबर तक पूरे करने की संभावना व्यक्त की है। उन्होंने माना कि अभी तक गीता जयंती आयोजन के लिए अधिकांश एजेंसियों को काम तक अलॉट नहीं हुआ। गौरतलब है कि ब्रांडिंग का काम भी इसी में शामिल हैं। ब्रह्मसरोवर को भरने में भी करीब 20 दिन से ज्यादा का समय लगेगा। उसमें भी आज पानी छोड़ा गया है।
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