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शाहाबाद में नियमों को ताक पर रखकर बना दी गई 25 सड़कें

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नियमों को ताक पर रखकर बना दी गईं 25 सड़कें
- विजिलेंस जांच में फेल साबित हुए सैंपल, आरटीआई कार्यकर्ता ने की थी शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
शाहाबाद।
शाहाबाद क्षेत्र में नगर पालिका ने 170 में से 25 सड़कें नियमों को ताक पर रखकर बना दी। यह खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता राकेश बैंस की याचिका पर उच्च न्यायालय के आदेशों पर 9 अक्तूबर 2015 को विजिलेंस विभाग के लिए गए सैंपल की रिपोर्ट में हुआ। विभाग ने माना है कि यह सभी सड़कें निर्धारित मापदंडों के अनुसार नहीं बनाई गई है। इसके चलते विजिलेंस ने सड़कों का निर्माण करने वाले ठेकेदारों व मिलीभगत करने वाले नपा कर्मचारियों के खिलाफ रिकवरी सहित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता राकेश कुमार ने न्यायालय में शिकायत दी थी कि शाहाबाद की सड़कों व गलियों के निर्माण में धांधली हुई है। इसके अलावा यह भी शिकायत की गई थी कि जिन सड़कों की शिकायत न्यायालय में की गई है, नगर पालिका उन सड़कों से तथ्यों को मिटाने का काम कर रही है। इस पर उच्च न्यायालय के निर्देशों पर डीएसपी शीतल सिंह धालीवाल के नेतृत्व में शाहाबाद पहुंची विजिलेंस की टीम ने यह सभी सैंपल आरटीआई कार्यकर्ता राकेश कुमार की मौजूदगी में लिए थे।
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नगरपालिका प्रधान ने किया शक्तियों का दुरुपयोग
विजिलेंस जांच में तत्कालीन नगरपालिका प्रधान की ओर से स्पीड ब्रेकर खरीदे जाने में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने के मामले में आरोप सिद्ध हो गया है। विजिलेंस की रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि स्पीड ब्रेकर खरीदने का कार्य 15 लाख का था लेकिन तत्कालीन प्रधान ने इस कार्य को अपनी शक्तियों के अधीन रखने के लिए एक ही तिथि में 4 अलग-अलग प्रस्ताव पास किए जबकि एक ही प्रस्ताव पास करके स्पीड ब्रेकर खरीदे जा सकते थे। विजिलेंस ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में कार्रवाई की जानी उचित बनती है।

दशहरा ग्राउंड मिट्टी घोटाले का आरोप भी सिद्ध
विजिलेंस की रिपोर्ट में दशहरा ग्राउंड में मिट्टी भराई को लेकर अनियमितताएं पाई गई हैं और इस मामले में तत्कालीन सचिव के खिलाफ उचित कार्रवाई का सुझाव भी दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता ने शिकायत की थी कि तत्कालीन प्रधान, पार्षदों और नपा अधिकारियों ने सायं 5 बजे के बाद मिट्टी का टेंडर ओम कंस्ट्रक्शन के नाम जारी करके नियमों का उल्लंघन किया था। पहला टेंडर 249 रुपये प्रति क्यूबिक था जिसे यह कहकर छोड़ दिया गया कि इसकी एनओसी सिंचाई विभाग से नहीं ली गई। जबकि बाद में यही टेंडर 379 रुपये क्यूबिक के हिसाब से ठेकेदार दलजीत सिंह को दे दिया गया। इस ग्राउंड में एमबी के अनुसार 6982 क्यूबिक मिट्टी डाली गई थी और 379 रुपये के हिसाब से 26 लाख 46 हजार की रकम अदा कर दी गई थी। ऐसे में विजिलेंस ने स्पष्ट किया कि इस कार्य में नपा के फंड का दुरुपयोग किया गया है। विजिलेंस ने सुझाव दिया कि इस कारण इनके खिलाफ कार्रवाई उचित बनती है।
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उच्च न्यायालय ने भी लिया संज्ञान : राकेश
आरटीआई कार्यकर्ता राकेश कुमार ने बताया कि उनके वकील प्रदीप रापड़िया ने विजिलेंस रिपोर्ट को उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया है। इस पर उच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए इन सभी मामलों के तथ्यों का रिकार्ड अगली सुनवाई पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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