अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। दुनिया में महापुरुषों की जयंती तो मनाई जाती हैं, लेकिन किसी पुस्तक या ग्रंथ की जयंती नहीं मनाई जाती। श्रीमद्भागवत गीता दुनिया का एकमात्र ऐसा ग्रंथ है, जिसकी जयंती मनाई जाती है। यह विचार स्वामी ज्ञानानंद ने गीता ज्ञान संस्थानम परिसर में मंदिर एवं यज्ञशाला का शिलान्यास करने के बाद व्यास पीठ से दिए। कार्यक्रम का शुभारंभ अजय पालीवाल, विजयपाल, करनाल की मेयर रेणू बाला, प्रवीण कुमार, सुरेश अरोड़ा पानीपत, रामनिवास गर्ग यमुनानगर, पुनीत जैन एवं अशोक गुप्ता पंचकूला ने किया। केडीबी के मानद सचिव मदनमोहन छाबड़ा, ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के संरक्षक जयनारायण शर्मा, प्रधान येशेंद्र शर्मा, पंडित पवन शर्मा पौनी, पार्षद नीतिन भारद्वाज लाली, पार्षद विवेक मेहता विक्की, जिओ गीता के जिला प्रधान हंसराज सिंगला, गऊशाला के प्रधान सतपाल सिंगला, केडीबी के सदस्य विजय नरूला, प्रदीप मिश्रा, राजीव अच्चू स्वामी, कृष्ण कृपा समिति के प्रधान सुरेश शर्मा तथा महेंद्र सिंगला सहित अन्य शामिल रहे। मानद सचिव छाबड़ा ने निर्माणाधीन गीता ज्ञानम संस्थानम बारे बताते हुए कहा कि इस नौ एकड़ परिसर में गीता पर शोध करने के लिए रिसर्च सेंटर, पुस्तकालय, म्यूजियम, विभूति आवास, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र और गुरुकुल बनाया जाएगा। संस्थानम में दुनिया भर के बुद्धिजीवी आकर गीता पर शोध कर सकेंगे। गुरुकुल दिसंबर में गीता जयंती के अवसर शुरू कर दिया जाएगा। परिसर में जैविक भोजनालय, ओपन एयर थियेटर, लाइट एंड साउंड की व्यवस्था भी होगी। संस्थानम में गीता के शोध करने वालों को हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।