अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
कल्चरल मैपिंग ऑफ इंडिया की शुरुआत विश्व पर्यटन स्थली कुरुक्षेत्र से होगी। इसके लिए थानेसर ब्लॉक का चयन किया गया है। देश में सबसे पहले थानेसर ब्लाक के कलाकारों का डाटा एकत्रित किया जाएगा। इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद देश के सभी ब्लाक स्तर पर कलाकारों का डाटा बैंक तैयार होगा। इस प्रोजेक्ट पर केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव एके सिन्हा की अध्यक्षता में हुई बैठक के तमाम सदस्यों ने अपनी मोहर लगा दी हैं।
कल्चरल मैपिंग कमेटी के सदस्य डॉ. रामेंद्र सिंह ने वीरवार को विद्या भारती में बातचीत करते हुए बताया कि संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की योजना के अनुसार संपूर्ण देश के कलाकारों की कल्चरल मैपिंग की जाएगी। इसके लिए थानेसर ब्लॉक को चयनित किया गया है। विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान, कुरुक्षेत्र के विशेष प्रयासों से कल्चरल मैपिंग के लिए मॉडल पायलट थानेसर ब्लॉक को प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि इस योजना को थानेसर में शुरू करने से कुरुक्षेत्र को आध्यात्मिक एवं पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ सांस्कृतिक क्षेत्र में भी बड़ी पहचान मिलेगी। निश्चित रूप से प्राचीन भारत में थानेसर सांस्कृतिक राजधानी रही है और वर्तमान में सांस्कृतिक मानचित्रण के लिए थानेसर ब्लॉक का चयन होना प्रदेश वासियों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि शहरों के साथ-साथ लगभग 6.5 लाख गांवों में जाकर कलाकारों की खोज की जाएगी और उनका डाटा संग्रह किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान देशभर में चार विषयों पर कार्यशालाएं आयोजित करके लगभग 7.5 लाख छात्र-छात्राओं के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों को अपने साथ जोड़ चुका है। भारत के सांस्कृतिक मानचित्रण के लिए यह जुड़ाव मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने सरकारी, गैर सरकारी एवं निजी क्षेत्र की संस्थाओं से आह्वान किया है कि कलाकारों की जानकारी संकलित करने हेतु अग्रणी भूमिका प्रस्तुत कर अपना योगदान अवश्य दें।
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किन-किन विधाओं का तैयार होगा डाटा बैंक
डॉ. रामेंद्र सिंह ने बताया कि कल्चरल मैपिंग के लिए तीन विधाओं दृश्य, प्रदर्शन एवं साहित्यिक विधाओं का चयन किया गया है। इसके अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में आने वाले कलाकारों, संगीतकारों एवं साहित्य जगत से जुड़ी प्रतिभाओं का डाटा संग्रह किया जाएगा। दृश्य श्रेणी में मुख्य रूप से वास्तुशिल्प एवं मूर्तिकला (मृत्तिका, पत्थर, लकड़ी, धातु, शीशा), चित्रकला (भित्ति, लघु, कागज, कपड़ा, शीशा), हस्तकला (मृत्तिका, पत्थर, लकड़ी, धातु, शीशा, तंतु, घास) इत्यादि को सम्मिलित किया गया है। प्रदर्शन श्रेणी में मुख्य रूप से संगीत (गायन/वादन, शास्त्रीय परंपरा, लोक/क्षेत्रीय परंपराएं, अनुष्ठान, भक्ति, समकालीन), नृत्य (शास्त्रीय, लोक/क्षेत्रीय, समकालीन), नाटक/रंगमंच (शास्त्रीय, लोक/क्षेत्रीय, एकल/नुक्कड़, अनुष्ठानिक, समकालीन), पुतली कला (धागा, दंड, दस्ताना, छाया, समकालीन) को एवं साहित्यिक श्रेणी में मुख्य रूप से मौखिक (कथा), लिखित (क्षेत्रीय, धार्मिक, लोक, समकालीन) व अन्य को सम्मिलित किया गया है। इन श्रेणियों से युक्त एक विस्तृत प्रोफार्मा तैयार कर इन क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों से आवेदन लिए जाएंगे और उनका डाटा बैंक तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस कार्य से ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाएं उजागर होंगी और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।