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केयू प्रशासन की अपील, सभी गैर शिक्षक कर्मी संस्थान व विद्यार्थियों के हित में हड़ताल छोड़ काम पर लौटें

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फोटो नंबर-26 व 27
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- केयू प्रशासन की अपील, सभी गैर शिक्षक कर्मी संस्थान व विद्यार्थियों के हित में हड़ताल छोड़ काम पर लौटें -हड़ताल पूरी तरह से अवैधानिक, काम पर नहीं लौटे तो परिणाम के लिए स्वयं जिम्मेवार होंगे कर्मचारी
- रजिस्ट्रार डॉ. नीता खन्ना के फरमान से रास्ता साफ, केयू प्रशासन इस बार झुकने वाला नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहे 1350 कर्मचारियों को हड़ताल छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया है। केयू रजिस्ट्रार ने विज्ञप्ति जारी कर दो टूक कहा है कि अगर वे शीघ्र काम पर नहीं लौटे तो इसके गंभीर परिणाम के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे। हालांकि केयू गैर शिक्षक कर्मचारी संघ अभी भी हड़ताल से पीछे नहीं हट रहा है।
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केयू प्रशासन ने हड़ताल को अवैधानिक करार देते हुए कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। उनका कहना है कि बार-बार हड़ताल से विश्वविद्यालय की छवि को क्षति पहुंच रही है। इसका नुकसान विश्वविद्यालय व विद्यार्थी दोनों को उठाना पड़ रहा है। कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना ने कहा है कि कर्मचारियों की मांग पर ही विश्वविद्यालय प्रशासन एआर व डीआर की प्रमोशन के केस को कार्यकारिणी परिषद की बैठक में ले गया था। कार्यकारिणी परिषद ने चार कर्मचारियों की योग्यता को देखते हुए उन्हें पदोन्नत कर दिया। चतुर्थ श्रेणी से क्लर्क पद पर पदोन्नति के लिए टाइप टेस्ट में छूट के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन नियमों के विपरीत नहीं जा सकता। सातवें वेतन आयोग का एरियर राज्य सरकार से ग्रांट मिलते ही जारी कर दिया जाएगा। कुछ गैर शिक्षक कर्मचारी जानबूझ कर अपने काम निकालने के लिए दूसरे कर्मचारियों के काम में बाधा डाल रहे हैं। इनके व्यवधान के कारण ही अगस्त का वेतन जारी नहीं हो सका।

कुलपति आवास के समक्ष जमकर किया प्रदर्शन
अपनी मांगों को लेकर 29 अगस्त से हड़ताल पर उतरे केयू गैर शिक्षक कर्मचारियों की हड़ताल छठे दिन भी जारी रही। रविवार को छुट्टी व बारिश के बावजूद भी सैकड़ों कर्मचारियों ने कुलपति आवास के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। कर्मचारियों ने यूनिवर्सिटी परिसर में भी रोष मार्च निकाला।

बिन वेतन भजन न होये गोपाला, इसलिये मनेगी काली जन्माष्टमी
मांगों और हड़ताल को अवैधानिक करार दे चुका केयू प्रशासन इस बार कुंटिया को आईना दिखाने की तैयारी कर रहा है। इसी वजह से जहां केयू के शिक्षकों का वेतन दो दिन पहले जारी हो चुका है, वहीं केयू के गैर शिक्षक कर्मचारियों के खातों में इस बार वेतन नहीं गया, लिहाजा उन्हें खाली जेब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनानी होगी। इधर कुंटिया महासचिव नीलकंठ शर्मा ने सोमवार शाम पांच बजे सभी कर्मचारियों को अपने परिवार सहित कुलपति आवास के सामने एकत्रित होने की अपील के साथ काली जन्माष्टमी मनाने का ऐलान किया है।

कौन डलवा रहा आग में घी
धरने का नेतृत्व कर रहे कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन जानबूझ कर कर्मचारियों को लंबे संघर्ष में धकेल रहा है। कर्मचारियों के जायज हकों को देने की बजाय प्रशासन गलत बयानबाजी कर आग में घी डालने का काम कर रहा है। इधर इस हड़ताल के खिलाफ सोशल मीडिया पर भी जंग छिड़ चुकी है। सोशल मीडिया पर हड़ताल की वजह से विद्यार्थियों को रही परेशानी को लेकर कड़ी आलोचना की जा रही है। इस आलोचना के साथ सोशल मीडिया पर यह बहस भी छिड़ चुकी है कि क्या बगैर टाइपिंग टेस्ट और शैक्षणिक योग्यता बिना प्रमोशन होनी चाहिए या नहीं। सोशल मीडिया पर इस बहस में शामिल ज्यादातर लोग इस मुद्दे पर केयू प्रशासन के सख्त फैसले के समर्थन में दिख रहे हैं।
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मुख्य रूप से ये हुए हड़ताल में शामिल
इस अवसर पर कुंटिया पूर्व प्रधान सुनील कक्कड़, पूर्व महासचिव दीपक शर्मा, विष्णु नाथ, संत कुमार, भूषण कुमार, भारत भूषण, रूपेश खन्ना, नरेंद्र वर्मा, सतनारायण वर्मा, नरेंद्र सारसा, नरेश, राजबीर, तेजा जड़ौला, रामफल, पुष्पेंद्र तोमर, सतीश शर्मा, सुरेंद्र मलिक, सतीश कुमार, हरि सिंह, गिरीश, अमित भटनागर सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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