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भाजपा सरकार का सबका विकास-सबका साथ भी पिछड़ा वर्ग के साथ नहीं कर पाया न्याय : सैनी

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भाजपा सरकार पिछड़ा वर्ग के साथ नहीं कर पाई न्याय : सैनी
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। सांसद राजकुमार सैनी ने विपक्षी दलों कांग्रेस व इनेलो के साथ भाजपा सरकार को भी निशाने पर लिया और कहा कि भाजपा सरकार का सबका विकास-सबका साथ नारा भी पिछड़ा वर्ग के साथ न्याय नहीं कर पाया है। प्रदेश में आज भी पिछड़ा वर्ग भेदभाव का शिकार है। पिछड़ा वर्ग में भी सबसे बड़ी सैनी बिरादरी की ज्यादा अनदेखी होती रही है, लेकिन अब इस अन्याय का जवाब देने का समय आ गया है, जिसके लिए पिछड़ा वर्ग के लोगों को विभिन्न पार्टियों के नेताओं की चाटुकारिता छोड़ अपना राजनीतिक वजूद बनाने के लिए एकजुट होना होगा। सांसद सैनी रविवार को सैनी समाज सभा के 38वें वार्षिकोत्सव में बोल रहे थे। समारोह के मुख्यातिथि केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा के समक्ष उन्होंने भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया और कहा कि प्रचंड बहुमत की सरकार भी एक विशेष समुदाय के दबाव में आ गई और प्रदेश को आग में झोकने के बावजूद भी उनके मुकदमों को रद्द करने तक निर्णय लिया गया। यहीं नहीं यह विशेष समुदाय प्रदेश की आबादी का खुद को 20 फीसदी होने का दावा कर गुमराह करता रहा, जिसके साथ ही 50 फीसदी से अधिक नौकरियां हासिल कर लीं, जबकि प्रदेश में किसी भी वर्ग की आबादी 10 फीसदी से अधिक नहीं है। पिछड़ा वर्ग महज दो फिसदी तक सिमट कर रह गया। इसी वर्ग को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने समाज के लोगों के साथ मिलकर छह साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी, जिस पर तीन करोड़ रुपये खर्च कर असलियत सामने लाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछड़ा वर्ग का पक्ष लिया।
उन्होंने होईकोर्ट में सरकार द्वारा दाखिल किए गए दस्तावेजों की प्रतियां लहराते हुए कहा कि पिछड़ा वर्ग के साथ बड़ा धोखा हुआ है, जबकि इस वर्ग ने पांच-पांच मुख्यमंत्रियों को ताज पहनाकर देख लिया है। सभी ने उन्हें दरकिनार ही किया है। सभी वर्ग का भला करना है तो शत-प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करना होगा। हालांकि समारोह में मंच का राजनीतिकरण न करने का आह्वान किया जाता रहा, लेकिन सांसद सैनी ने सीधे तौर पर चुनावी संबोधन किया तो केंद्रीय राज्यमंत्री सहित समाज के सभी नेताओं को एक मंच पर आने का आह्वान किया।
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गरीब का बेटा महान वैज्ञानिक बन सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं : कुशवाहा
केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आज देश व प्रदेश की राजनीति में ओबीसी समाज को हिस्सेदारी के हिसाब से पूरी भागीदारी नहीं मिली, जिसको पूरा करने के लिए देश में संवैधानिक व्यवस्था लागू करने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में एससी, एसटी और ओबीसी समाज की भागीदारी लगभग शून्य है। उन्होंने कहा कि आज गरीब का बेटा देश व विश्व का महान वैज्ञानिक तो बन सकता है, लेकिन हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं बन सकता है, जो चिंतनीय है।
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