30 अप्रैल तक जिला प्रशासन को मंदिर की बाकी जमीन पर दिलाना ही होगा कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। ठाकुर द्वारा नाभि कमल मंदिर व जाट सभा के बीच विवादित रही तीन एकड़ जमीन जिला प्रशासन के गले की फांस बन गई है। इस जमीन पर अदालत के आदेशानुसार 9 मार्च को प्रशासन द्वारा मंदिर संस्था को करीब चार घंटे तक कार्रवाई कर कब्जा दिलाए जाने के बाद प्रशासन ने कुछ राहत की सांस ली थी, लेकिन अब फिर अदालत ने आदेश दिए हैं कि इस जमीन की पूरी निशानदेही दोबारा कर बाकी जमीन पर भी 30 अप्रैल तक कब्जा दिलाया जाए। न्यायाधीश नीतू नागर की अदालत द्वारा वीरवार को जारी आदेशों के अनुसार प्रशासन को यह कार्रवाई कर तय तिथि पर अदालत में रिपोर्ट पेश करनी होगी। अदालत के इन आदेशों के बाद एक बार फिर जिला प्रशासन की सांसें फूली हुई दिखाई देने लगी है।
अदालत ने स्पष्ट कहा है कि संबंधित जमीन की फिर से निशानदेही करवाई जाए। इस दौरान स्कूल के भी इसमें आने वाले निर्माण को हटाया जाए। जमीन पूरी तरह से खाली करवा मंदिर संस्था को कब्जा दिलाया जाए। इसके लिए अदालत ने एसडीओ को लोकल कमीश्नर के तौर पर नियुक्त किए जाने के अलावा जरूरत पड़ने पर पुलिस बल का भी सहयोग लिए जाने के आदेश दिए हैं। इन आदेशों के बाद प्रशासन ने फिर से कार्रवाई को लेकर योजना बनानी शुरू कर दी है।
बता दें कि 9 मार्च को जिला प्रशासन का अमला अल सुबह ही उक्त जमीन पर कब्जा दिलाने पहुंच गया था। भारी पुलिस बल व ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह की तैनाती में करीब चार घंटे तक कार्रवाई चली थी। कई निर्माण भी ढहा कर जमीन पर मंदिर संस्था को कब्जा दिलाया गया था। इस दौरान हालांकि मंदिर के महंत ने प्रशासनिक अधिकारियों का आभार भी व्यक्त किया और संतुष्टि भी जताई थी, लेकिन बाद में महंत विशाल मणी ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रशासन ने पूरी जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया है। अभी भी करीब 2 कनाल जमीन पर जाट सभा का कब्जा बना हुआ है, जिसमें कुछ हिस्सा स्कूल का भी है। अदालत ने इस याचिका को मंजूर करते हुए जिला प्रशासन व जाट सभा से भी जवाब मांगा था। जिला प्रशासन ने कई कार्रवाई की बनवाई गई सीडी सहित कई प्रमाण अदालत में पेश किए, लेकिन यह सब काम नहीं आए और अब फिर अदालत ने आदेश दिए हैं कि 30 अप्रैल तक पूरी जमीन पर कब्जा दिलाकर रिपोर्ट दी जाए।
कुछ जमीन छोड़ आया था प्रशासन : महंत
मंदिर के महंत विशाल मणी का कहना है कि कब्जा दिलाने के दौरान प्रशासन जमीन पूरी नहीं करवा कर गया था। करीब 2 कनाल जमीन पर कब्जा रह गया था। इसी को लेकर उन्होंने दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अब अदालत के नए आदेश के अनुसार प्रशासन को पूरी जमीन दिलानी होगी। इसके लिए फिर से निशानदेही करवानी होगी।
सही निशानदेही के बाद ही प्रशासन ने की थी कार्रवाई: अंग्रेज
कुछ दिन पहले ही जाट समाज की बनी नई कार्यकारिणी के प्रधान अंग्रेज सिंह का कहना है कि प्रशासन ने कब्जा दिलाने की जो कार्रवाई की थी, उस समय सही निशानदेही के बाद ही की गई थी। अब एक इंच जमीन भी इधर-उधर नहीं है। पूरे मामले को लेकर समाज की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई है।
आदेश नहीं जानकारी मिली है : परमिंद्र
पहले की गई कार्रवाई में ड्यूटी मजिस्ट्रेट रहे नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह का कहना है कि अदालत ने अब फिर से निशानदेही करवा कर पूरी जमीन पर कब्जा दिलाने के आदेश दिए हैं। हालांकि उन्हें अभी आदेश की कॉपी नहीं मिली है, लेकिन प्रशासनिक तौर पर उन्हें यह जानकारी मिल गई है। अदालत द्वारा दिए गए आदेशों के अनुसार समय पर अवश्य ही पूरी कार्रवाई की जाएगी।
यह था पूरा मामला
नाभि कमल मंदिर में जाट धर्मशाला को वर्ष 1999 में यह तीन एकड़ जमीन 20 वर्षों के लिए लीज पर दी थी, जिसकी एवज में जाट सभा को 12 लाख रुपये देने थे, लेकिन ढाई लाख की अदायगी के बाद मंदिर को बाकी राशि नहीं दी गई। न ही जमीन दी गई। वर्ष 2002 में मंदिर सभा की ओर से यह मामला स्थानीय अदालत में ले जाया गया। अदालत ने जमीन मंदिर की करार दी तो जाट समाज हाईकोर्ट चला गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद वर्ष 2014 में मंदिर संस्था के पक्ष में फैसला दिया गया। इसके बाद स्थानीय न्यायाधीश नीतू नागर की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू कराने के लिए तीन जनवरी 2018 को जिला प्रशासन को आदेश दिए। इसके बाद प्रशासन ने जमीन मंदिर को दिलाने के लिए 15 जनवरी को पहली बार कार्रवाई की औपचारिकता निभाई। 21 फरवरी को प्रशासन निशानदेही करवा कर लौट गई। मंदिर संस्था अदालत पहुंची तो अदालत ने प्रशासन को जमीन खाली करवाकर कब्जा दिलाने के आदेश दिए। प्रशासन ने अपने 10वें प्रयास में करीब चार घंटे तक कार्रवाई कर मंदिर संस्था को जमीन पर कब्जा दिलाया था। इस पर भी महंत संतुष्ट नहीं हुए। पूरी जमीन न मिलने को लेकर अदालत में फिर से याचिका दायर कर दी। इस पर अब अदालत ने फिर प्रशासन को पूरी जमीन पर कब्जा दिलाने के आदेश दिए हैं।