अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
कैथल-कुरुक्षेत्र रोड पर नील गाय को बचाने की फिराक में रविवार सुबह पांच बजे चूने से भरा राजस्थान का ट्राला पेड़ से जा टकराया और इसमें सवार तीन लोग करीब चार घंटे तक भीतर फंसे रहे। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद ही तीनों लोग सुरक्षित बाहर निकाले गए। इनमें से एक के सिर में गहरी चोट लगने के कारण लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल कुरुक्षेत्र में प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है, जबकि अन्य दो लोग कुरुक्षेत्र के लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में उपचाराधीन हैं। तीनों की जान बचाने में बड़ी भूमिका ग्रामीणों, पुलिस, डाक्टर, फायर ब्रिगेड कर्मियों और होमगार्ड के जवानों के अलावा क्रेन और जेसीबी वालों की रही।
बताया गया है कि ट्राला नंबर आरजे 06जीए 5277 राजस्थान से यमुनानगर स्थित पेपर मिल के लिए चूना लेकर कैथल से होते हुए यमुनानगर जा रहा था। इसमें ट्राला मालिक झूंझुनूं, राजस्थान वासी विनोद कुमार पुत्र रामनिवास, झूंझनूं निवासी ड्राइवर कृष्ण कुमार और कैथल बाईपास से ट्राले में लिफ्ट लेने वाला यमुनानगर वासी अशोक कुमार सवार था। कैथल से उक्त ट्राला गांव कमौदा के पास पहुंचा ही था कि बस अड्डे से महज कुछ दूरी पहले अचानक ही ट्राले के आगे नील गाय आ गई और चालक उसे बचाने लगा तो ट्राला अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड्ड की ओर पलट गया। इसी के साथ ही ट्राला पेड़ से भी टकरा गया। हादसा इतना भयानक था कि पेड़ ट्राले के केबिन के अधिकतर भाग में घुस गया और ट्राला पेड़ में बुरी तरह से फंस गया।
---------------------------------
ऐसे चला रेस्क्यू आपरेशन
ट्राले में फंसे तीनों लोगों को निकालने में जब तीन क्रेन और दो जेसीबी भी कुछ नहीं कर पाई तो दर्जनों पुलिस कर्मियों व अन्य लोगों ने कड़ी मशक्कत कर कटर से ट्राले का केबिन काट कर करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला। तीनों इतने समय तक दुर्घटनाग्रस्त ट्राले में फंसे होने के चलते बेहोशी की हालत में बाहर निकाले गए तो सभी लोगों ने राहत की सांस ली और उन्हें तत्काल ही एलएनजेपी सिविल अस्पताल में दाखिल कराया। यहां झुंझनूं वासी ट्राला मालिक की गंभीर हालत के चलते उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया।
-------------------------------
रेस्क्यू आपरेशन में ये टीमें पहुंचे
एक ग्रामीण ने हादसे की सूचना सवा पांच बजे ज्योतिसर पुलिस चौकी के प्रभारी राजकुमार को दी थी, जिसके बाद वे तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने ट्रैफिक एसएचओ देवेंद्र कुमार को फोन किया। बताया गया है कि एसएचओ पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और डीसी आफिस के अलावा सीएमओ आफिस में घटना की सूचना दी और बचाव दल की डिमांड की। इसके बाद दमकल कर्मी, एलएनजेपी अस्पताल से एक डाक्टर और अन्य स्टाफ मौके पर पहुंचे।
-------------------------------------------
तीन जिंदगियां बचाने के लिए ये बने संकट मोचक
ज्योतिसर चौकी के प्रभारी राजकुमार, उनकी टीम के सदस्य हवलदार राजेश कुमार, मलकीत सिंह, अनिल कुमार, सिपाही आत्माराम, होमगार्ड के जवान कुल दीप सिंह, ट्रैफिक एसएचओ देवेंद्र कुमार, एएसआई मेवा सिंह, जगदीश, जसबीर के अलावा दमकल केंद्र के कर्मचारी विनोद वर्मा, गुरदेव सिंह, तरसेम, स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस और चिकित्साधिकारी डा. लक्षेंद्र के अलावा गांव बारना वासी सुभाष, हरिकेश, कमोदा वासी महेंद्र और महावीर जैसे अनेक लोग ऐसे रहे, जिन्होंने रेस्क्यू आपरेशन के दौरान बचाव दल का सहयोग किया।
--------------------------------------------
एक घंटा और इंतजार कर लेता तो मिल जाती ट्रेन : अशोक
सिविल अस्पताल में उपचाराधीन यमुनानगर निवासी अशोक कुमार को करीब 2 घंटे बाद होश आया तो उन्होंने बताया कि वह किसी कार्य के चलते शनिवार को कैथल गया हुआ था। सुबह यमुनानगर आने के लिए बाईपास पर सुबह करीब 4 बजे से वाहन का इंतजार कर रहा था। तभी उक्त ट्राला आ गया और उसने ट्राला यमुनानगर जाने का पता लगा तो लिफ्ट ले ली। वह रात भर सोया नहीं था और कुछ देर बाद ही ट्राले में पीछे की सीट पर सो गया। उन्हें पता भी नहीं चल पाया कि हादसा कब और कैसे हो गया। जब उसकी टांग में गहरी चोट लगी और बड़े धमाके की आवाज आई तो अचानक आंख खुली। लेकिन वह कुछ भी समझ नहीं पाया और वहां से निकलने के लिए छटपटाने लगा, लेकिन वे बुरी तहर से फंसे हुए थे और निकल नहीं पाए। जिसके चलते कुछ समय के बाद उन्हें बेहोशी सी होने लगी। उन्होंनें बताया कि वह करीब एक घंटा और वहीं रूक जाता तो कुरुक्षेत्र तक आने के लिए उसे ट्रेन मिल जाती और हादसे से बच जाता। लेकिन यह भी गनीमत रही कि ऐसे भयानक हादसे में भी वे तीनों बच गए। उन्होंने कहा कि पहले पुलिस व अन्य लोगों व बाद में अस्पताल के कर्मियों ने उनकी जान बचा ली।