अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रह्मसरोवर तट पर भारत की सांस्कृतिक विरासत के सहजता से दर्शन हो रहे हैं। इस महोत्सव में देश-विदेश के कलाकार, शिल्पकार अपनी हस्तकला से महोत्सव की रौनक में चार चांद लगा रहें हैं। इतना ही नहीं यह महोत्सव भारत की प्राचीन परंपरा, संस्कृति और शिल्पकला को संरक्षण देने का काम भी बखूबी कर रहा हैं। पिछले 3 सालों से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का दर्जा मिल चुका हैं। गीता महोत्सव में 16 साल पूर्व दो राज्यों के कलाकार ही उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र पटियाला की तरफ से पहुंचते थे, लेकिन आज 14 राज्यों से आए कलाकार और शिल्पकार महोत्सव में अपनी कला का रंग जमा रहे हैं। महोत्सव के इस रंग में रंगने के लिए हर वर्ष लाखों की संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। प्रशासन के आंकड़ों पर नजर डाले तो अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2016 में करीब 20 लाख पर्यटक व 2017 में करीब 25 लाख पर्यटक पहुंचे थे और इस वर्ष केडीबी द्वारा लाखों पर्यटकों के पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं।
सरस व क्राफ्ट मेला में बढ़ी पर्यटकों की भीड़
सरस व क्राफ्ट मेला देखने के लिए लगातार पर्यटकों की भीड़ बढ़ रही है। वहीं ब्रह्मसरोवर के घाट भारत की संस्कृति का केंद्र बन गए है। इस मंच पर सभी प्रदेशों की संस्कृति की झलक देखी जा रही है। यह मेला 23 दिसंबर तक जारी रहेगा । मेले में लगाए गए शिल्प मेले से जहां लोगों को विभिन्न प्रदेशों की शिल्पकला देखने का अवसर मिल रहा हैं वहीं इस प्रकार के महोत्सव से शिल्पकला को संरक्षण देने का कार्य भी सरकार द्वारा किया जा रहा हैं। इस महोत्सव से हजारों शिल्पकारों को आर्थिक रुप से भी फायदा मिलता हैं। मेले में पंजाब, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के लोक कलाकारों ने जमकर पर्यटकों का मनोरंजन किया और सभी को अपने मोहपाश में बांध दिया।
पर्यटकों को पंसद आए बाजीगरों के करतब
महोत्सव में एनजेडसीसी की तरफ से पर्यटकों का मनोरंजन करने के लिए बाजीगरों के एक ग्रुप को आमंत्रित किया गया। इस ग्रुप के कलाकार घाटों के मुख्य मंच पर आदमी के सिर के ऊपर मटका रखा और मटके के ऊपर आदमी को खड़ा करके जो करतब दिखाए, वे काबिले तारीफ थे। इस करतब पर सभी पर्यटकों ने तालियां बजाई। इसके अतिरिक्त इन कलाकारों ने लोहे ही राड़ को मोड़कर दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया।
पंजाबी जूती व वाटर प्रूफ पंजाबी जूतियों की विशेष मांग
अपने पूर्वजों की प्रेरणा को अपने जहन में लेते हुए उनके पिछले सैंकड़ों वर्षों से किए जा रहे पंजाबी जूतियों के व्यापार को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में कई वषों से लाकर एक अनूठा काम कर रहे है पंजाब के पटियाला निवासी प्रदीप गहलोत। क्राफ्ट मेले में बातचीत करते हुए प्रदीप गहलोत ने बताया कि वह 10 सालों से महोत्सव में पहुंच रहे है तथा हर साल पंजाबी जूतियां पर्यटकों की पहली पंसद बनी हुई है। स्टाल में युवाओं के लिए ही नहीं बुर्जुगों व बच्चों के लिए भी पंजाबी जूतियां उपलब्ध है। तिल्ला जूती के स्टाल के संचालक सचिन कुमार के मुताबिक पंजाबी जूतियां पूरे भारतवर्ष की पंसद है, जिसकी मांग विदेशों में भी की जा रही है।
पेंटिंग में दिखाई देती है जीती जागती तस्वीर, हाथों की कारीगिरी के कायल हुए पर्यटक
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में हाथ से बनी पेंटिग ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस पेंटिंग को कपड़े पर बनाया जाता है और इस पेंटिंग की विशेषता है कि यह रात के समय में लाईट की रोशनी की तरह चमक देती है जो कि घरों की दिवारों पर लगी हुई बहुत ही सुंदर लगती है। राजस्थान से आए पुष्पिंद्र ने बातचीत करते हुए बताया कि वह तथा उनका पूरा परिवार इस तरह की पेंटिंग तैयार करता है जो कि अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के साथ-साथ अन्य मेलों में भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यह पेंटिंग ब्लू कपड़े पर बनाई जाती है और इस पेंटिंग को बनाने के लिए कम से कम 5 से 6 घंटे लगते है। उनका पूरा परिवार अपने हाथों से इस पेंटिंग को बनाता है। उन्होंने बताया कि उनके पिता हंसराज साऊ व उनके भाई को इस पेंटिंग के जिलास्तरीय आवार्ड भी मिला है। वे राजस्थानी पेंटिंग, राधा कृष्ण की पेंटिंग, खुजराव, मॉर्डन पेंटिंग और अन्य तरह की पेंटिंग इस महोत्सव में लेकर आएं है जिसे पर्यटक और स्थानीय लोग इसकी जमकर खरीदारी कर रहे है।