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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के रंग से सराबोर हुआ ब्रह्मसरोवर परिसर

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के प्रमुख आयोजन स्थल ब्रह्मसरोवर को यहां बनाई जा रही कलाकृतियां अनूठा रूप प्रदान कर रही हैं। तट के चारों ओर बने परिसर के ऊपरी हिस्से में महाभारत तथा रामायण कालीन कलाकृतियां बनाई जा रही हैं, जिससे परिसर में प्रवेश करते ही एक अलग ही अनुभूति का अहसास होने लगता है। गीता जयंती महोत्सव में आने वाले पर्यटकों के लिए चित्राकृतियां बेहद दर्शनीय बनी हुई हैं। स्टॉलों के ऊपर भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं। साथ ही महाभारत व रामायण के विभिन्न प्रसंग जीवंत होते दिखाई देते हैं। बेहद आकर्षक रूप में बनाई गई चित्राकृतियां बोलती प्रतीत होती हैं। चित्राकृतियों में प्रमुख रूप से महाभारत के प्रसंगों को दर्शाया गया है। इन बड़ी-बड़ी मूर्तियों में कर्ण तथा कुंती के संवाद को दर्शाया गया है तो अर्जुन के साथ हुए कर्ण के युद्ध को भी खुबसूरती के साथ दर्शाया है। माता सीता को अपने वीर पुत्रों लव-कुशी के साथ दर्शाया गया है तो लव-कुश को अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े की लगाम थामे भी दिखाया गया है। यही नहीं हमारी अन्य धार्मिक कथाओं के प्रसंग तथा महापुरुषों को भी दर्शाया गया है। गुरुनानक देव को अपने शिष्यों को शिक्षा देेते हुए बड़ी खुबसूरती के साथ दर्शाया गया है तो गौतम बुद्ध के दर्शन भी इन चित्राकृतियों में किये जा सकते हैं।
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पर्यटकों को लुभा रही कोल्हापुरी चप्पल
देश-विदेश में धूम मचा चुकी कोल्हापुर की मशहूर चप्पल व जूतियां गीता महोत्सव के अंतर्गत सरस मेले में भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। यही नहीं इन चप्पलों की विशेषता है कि ये विभिन्न प्रकार की बिमारियों से लोगों को संरक्षित करती है। इस कारण लोगों में इन चप्पलों के लिए विशेष उत्सुकता नजर आती है। सरस मेले की स्टाल नंबर-122 पर कोल्हापुरी की अनूठी व आकर्षक चप्पल उपलब्ध हैं। महाराष्ट्र के जिला कोल्हापुर निवासी सरजव राव व उनकी धर्मपत्नी मनीषा ने बताया कि पहली बार उन्हें अंतराष्ट्रीय गीता जंयती के महोत्सव में आने का मौका मिला है। उन्हें यहां स्टाल के माध्यम से हिंदुस्तान की पंसद माने जानी वाली कोल्हापुरी चप्पल को दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि 7 दिंसबर को सरस मेले के उद्घाटन के बाद लोगों यहां पर चप्पल, बैली, सैंटल व अन्य प्रकार की लैदर बनी चप्पलों को खरीद रहे है। उन्होंने कहा कि वह कोल्हापुरी चप्पलों से संबधित स्टालों को होशियारपुर, तमिलाडू, दिल्ली, बाम्बे, विजयवाड़ा आंध्राप्रदेश, गुजरात व सूरत में ले जा चुके है जहां पर उन्हें काफी अच्छा रिसोंपस मिला।
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