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लिंग जांच के अवैध धंधे में संलिप्त कैथल वासी लैब तक नीशियन गिरफ्तार

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लिंग जांच के धंधे में संलिप्त लैब तक्नीशियन गिरफ्तार
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-अंबाला और कुरुक्षेत्र के पीएनडीटी नोडल अधिकारियों की टीम ने की कार्रवाई
-धंधे में शामिल एक डाक्टर के भी मिले हैं संकेत, अभी नहीं किया खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
लिंग जांच के अवैध कारोबार से जुड़े कैथल निवासी एक लैब तक्नीशियन को पड़ोसी जिला अंबाला और जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने काबू किया है। आरोपी के खिलाफ कुरुक्षेत्र पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह शख्स पिछले काफी समय से स्वास्थ्य विभाग के रडार पर था। उसके बारे में कई सूचनाएं स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची थीं। इसके बाद उसे काबू करने के लिए एक गर्भवती महिला को ग्राहक बनाकर भेजा गया था। इस ग्राहक से बाकायदा डील हुई थी,जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी संभव हुई।
अंबाला पीएनडीटी नोडल आफिसर डॉ. विपिन भंडारी और जिला कुरुक्षेत्र पीएनडीटी नोडल आफिसर डॉ. आरके सहाय और इनकी टीम के सदस्यों सहित पुलिस की संयुक्त टीम ने उपरोक्त कार्रवाई को अंजाम दिया। इस टीम ने कुरुक्षेत्र श्रद्धानंद चौक के निकट जीएल नंद रोड पर स्थित निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर के बाहर कैथल वासी देवेंद्र उर्फ रवि को काबू किया। उसे रंगेहाथ पकड़ने के लिये उपरोक्त टीम ने एक गर्भवती महिला को फर्जी ग्राहक बनाया था। इस फर्जी ग्राहक की लिंग जांच कराने के लिए रवि से संपर्क किया गया था। इस काम के लिए रवि तैयार हो गया और उसने लिंग जांच कराने के लिए 32 हजार रुपये मांगे थे,जिसमें से 20 हजार रुपये की राशि एडवांस लेकर महिला को सोमवार पिपली बुलाया गया था।
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बताया गया है कि तय हुई बातचीत के अनुसार सोमवार को जब फर्जी ग्राहक की ओर से रवि को फोन किया गया तो वह उसे कार में बैठाकर नंदाजी मार्ग पर ज्योतिनगर मोड़ के समीप अल्ट्रासाउंड सेंटर पर में लेकर आया था। बताया गया है कि दोनों जिलों की उपरोक्त टीमें पिपली से पहले से मौजूद थीं। जैसे रवि पिपली पहुंचा यहीं, से स्वास्थ्य विभाग की टीम इनके पीछे-पीछे चलते हुए श्रद्धानंद चौक पर आकर रुक गई। लिंग जांच के धंधे में संलिप्त आरोपी रवि जैसे ही अल्ट्रासाउंड सेंटर पर आकर रुका तो यहां फर्जी ग्राहक की ओर से संकेत मिलते ही लैब तक्नीशियन देवेंद्र उर्फ रवि को दबोच लिया गया। बताया यह भी जा रहा है कि इस धंधे में एक डाक्टर भी शामिल है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इसका खुलासा नहीं किया था।
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