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रजिस्ट्री करते समय जमीन वैध, अब निर्माण पर ठोक रहे केस

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
प्रदेश सरकार ने प्लॉटों की रजिस्ट्री के बहाने लोगों की जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा तो राजस्व के रूप में बेझिझक ले लिया, लेकिन उस जगह पर निर्माण करने में जमीन मालिकों को कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, इस पर ध्यान नहीं दिया। लोगों को उस जगह का मालिकाना हक मिल चुका है, लेकिन बावजूद इसके प्रशासन की आपत्तियों के चलते वे वहां पर निर्माण नहीं कर पा रहे।
मामला पिपली-लाडवा रोड पर सड़क के दोनों तरफ 30 मीटर में रजिस्ट्री हुए प्लाटों और अन्य क्षेत्रों का है। इस पर टाउन प्लानिंग ने प्रतिबंधित एरिया बताकर निर्माण से रोक लगा दी है। रजिस्ट्री के दौरान और इंतकाल के समय टाउन प्लानिंग विभाग का तहसील कार्यालय में कोई रोल नहीं था। न ही निर्माण के लिए टाउन प्लानिंग विभाग की अनुमति लेने की जरूरत होती थी। फिर भी टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट ने बीच में अपना अड़ंगा डालकर यहां निर्माण पर आपत्ति जताकर रोक लगा रखी है।
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पब्लिक लाभ से जुड़ते ही शुरू हुआ झमेला
जिस क्षेत्र को प्रतिबंधित दायरे में लाया गया है, उसमें प्लाटों की रजिस्ट्री तहसीलदार ने ही की थी। रेवेन्यू ऑफिसर ने बगैर किसी आपत्ति के राजस्व ले लिया। कानूनगो ने भी बिना आनाकानी के इंतकाल कर दिया। इस सब के बाद भी वैध जमीन पर किए जाने वाले निर्माण को अवैध करार दिया जा रहा है। साफ है कि राज्य सरकार को रुपयों संबंधी लाभ पहुंचाते समय अधिकारियों ने नियम या वैध-अवैध की तरफ ध्यान नहीं दिया। बात पब्लिक के लाभ से जुड़ी तो अधिकारियों ने तमाम तरह की आपत्ति लगा दीं।

भू-मालिक होते हुए भी निर्माण से रखा जा रहा वंचित : मांगेराम
गांव मथाना निवासी वरिष्ठ नागरिक मांगेराम शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने वर्ष 2011 में प्रॉपर्टी डीलर नैब सिंह के माध्यम से उनके ही परिवार की महिला से पिपली-लाडवा रोड पर प्लाट खरीदा था। इसकी रजिस्ट्री तहसीलदार ने की थी। रजिस्ट्री में स्पष्ट है कि जगह में यदि कोई कमी-पेशी या वाद-विवाद होता है तो बेचने वाला गुनहगार समझा जाएगा। शर्मा ने कहा कि उन्होंने प्लॉट पर निर्माण शुरू किया तो टाउन प्लानिंग विभाग ने आपत्ति जता दी। टाउन प्लानिंग की रजिस्ट्री में रत्ती भर भी भूमिका नहीं थी। कुछ दिन बाद उन पर केस दर्ज कर दिया गया।

विधायक से लेकर सीएम तक शिकायत, नतीजा सिफर
मांगेराम शर्मा ने बताया कि इस समस्या को लेकर वे सीएम मनोहर लाल, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कैबिनेट मंत्री अनिल विज को शिकायत पत्र भेज चुके हैं। इसका करीब तीन वर्ष बाद भी कोई जवाब नहीं आया। सीएम विंडो पर भी फरियाद की। इसके अलावा उनके हलका लाडवा से विधायक पवन सैनी से भी मिलकर कई बार गुहार लगाई, लेकिन समस्या समाधान तो दूर की बात आश्वासन तक नहीं मिला।

यदि जगह में गड़बड़ थी तो रजिस्ट्री कैसे हो गई : रोहित
पिपली-लाडवा रोड पर प्लाट धारक रोहित ने कहा कि यदि जगह प्रतिबंधित थी या इसमें कोई गड़बड़ थी तो वहां रजिस्ट्री कैसे हो गई। खाली प्लॉट था तो सरकार खुश थी। उन्होंने अपना काम शुरू किया तो निर्माण को अवैध घोषित कर दिया गया। मकान, प्रतिष्ठान गिरा दिए गए। सरकारें जनता की भलाई के लिए बनती हैं या उन्हें परेशान करने को। तहसीलदार ने प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर रजिस्ट्री के इस खेल को अंजाम दिया है। परमिशन दे नहीं रहे। बोला जाता है कि सरकार के ऑर्डर नहीं है। सरकार को समय रहते इस समस्या पर जनहित में कोई पॉलिसी लानी चाहिए।

इंतकाल के बाद व्यक्ति पूर्णत: मालिक, केस करना समझ से बाहर : दीपक
इनेलो नेता दीपक फौजी ने कहा कि रजिस्ट्री होने के बाद खरीदने वाला इंतकाल होने पर अपनी जमीन का मालिक हो जाता है। उसे निर्माण करने का भी अधिकार है। यदि निर्माण पर केस होता है तो यह समझ से बाहर है। यदि जगह प्रतिबंधित थी, तो इसमें प्लाटों की रजिस्ट्री कैसे हो जाती है। इसका मतलब तहसीलदार, पटवारी, रेवेन्यू ऑफिसर, कानूनगो, डीटीपी आदि अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभा रहे। लोगों को कभी केस करने तो कभी निर्माण गिराने का डर दिखाया जाता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर जनता को मूर्ख बना रखा है। भविष्य में इनेलो सरकार आती है तो जनता की इन समस्याओं को दूर किया जाएगा।

करीब डेढ़ माह से धरने पर बैठे हैं हाकम सिंह
प्रतिबंधित क्षेत्र में तहसीलदार द्वारा रजिस्ट्री करने के बाद जमीन खरीदने वाली महिलाओं के नाम केस दर्ज कर दिया गया। अधिकारियों के इस रवैये से खफा बहादुरपुरा निवासी हाकम सिंह पिछले 48 दिनों से लघु सचिवालय में डीसी कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठे हैं। हाकम सिंह ने बताया कि उन्होंने जो जमीन खरीदी है, वह सड़क से कुछ ही दूरी पर है। अधिकारियों ने यहां जमीन लेने पर परिवार की महिलाओं पर ही केस दर्ज कर दिया। इसके लिए वे प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि तहसीलदार और बेचने वालों की बजाय खरीददार पर केस दर्ज करना बड़ी हैरानी की बात है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

सभी डिपार्टमेंट अपने एक्ट के अनुसार करते हैं कार्य : डीटीपी
डीटीपी सुतीश पुनिया से जब पूछा गया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री होते समय, रेवेन्यू लेते वक्त और इंतकाल के समय टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट का कोई रोल ही नहीं था तो आप कार्रवाई कैसे कर सकते हैं। इस पर डीटीपी ने कहा कि सभी डिपार्टमेंट अपने-अपने एक्ट के अनुसार कार्य करते हैं। जैसा तहसीलदार को ठीक लगा, उन्होंने रजिस्ट्री कर दी। यदि कालोनियां या निर्माण अवैध होगा तो उस पर टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट केस कर सकता है। इस बारे में उनकी ओर से तहसीलदार को रजिस्ट्री न करने को लेकर कोई लैटर नहीं दिया जाता। यह काम सरकार का है।
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प्रतिबंधित जगह में रजिस्ट्री पर डीसी ने साधी चुप्पी
डीसी सुमेधा कटारिया ने कहा कि रेवेन्यू एक्ट के अनुसार रजिस्ट्री से मना नहीं किया जा सकता। लेकिन, इसका ये मतलब नहीं है कि खरीददार को निर्माण की स्वीकृति भी मिल गई। रजिस्ट्री से निर्माण का अधिकार नहीं मिलता। टाउन प्लानिंग विभाग के अपने नियम-कायदे हैं, तहसीलदार के अपने। जब डीसी से यह पूछा गया कि प्रतिबंधित जगह में रजिस्ट्री क्यूं हो जाती है तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं।
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