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गीता शोध केंद्र में होगा पवित्र ग्रंथ गीता के एक-एक शब्द पर शोध : ज्ञानानंद

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गीता शोध केंद्र में होगा पवित्र ग्रंथ गीता के एक-एक शब्द पर शोध : ज्ञानानंद
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि गीता ज्ञान संस्थानम में गीता शोध केंद्र और गीता ग्रंथालय का निर्माण किया जाएगा। इस गीता शोध केन्द्र में पवित्र ग्रंथ गीता के एक-एक शब्द पर शोध किया जाएगा। गीता ग्रंथालय में गीता से संबंधित विश्व का सारा साहित्य उपलब्ध होगा। इस गीता स्थली कुरुक्षेत्र में गीता पर शोध करने वाले विश्वभर से शोधार्थी कुरुक्षेत्र में पहुंचेंगे। इन दोनों प्रोजेक्ट की आधारशिला 25 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के उद्वाटन के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रखेंगे। शीघ्र ही स्वस्थ राजनीति समृद्ध राष्ट्र गीता का विमोचन भी किया जा रहा हैं। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद बुधवार को निर्माणाधीन गीता ज्ञान संस्थानम परिसर में पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे।
जेलों में हजारों बंदी नियमित कर रहे गीता पाठ
उन्होंने कहा कि करनाल जेल में 2300 बंदियों में से एक हजार बंदी, हिसार जेल में 1200 में से 700 बंदी नियमित रूप से गीता पाठ कर रहे हैं। वर्तमान की सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण का समाधान भी गीता में निहित हैं। राजनीति विषय को लेकर स्वस्थ राजनीति समृद्ध राष्ट्र गीता पर पुस्तक लिखी गई है। इसका विमोचन भी जल्द किया जा रहा हैं। इसके पश्चात व्यवसाय प्रबंधन, वरिष्ठ नागरिकों सहित अन्य क्षेत्रों को भी गीता से जोड़कर पुस्तक लिखी जाएगी। स्कूलों में गीता विषय को पढ़ाया जाए, इस पर भी फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 27 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में संत सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा हैं।
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नियमों के अनुसार ही मिली जमीन, तो प्रशासन सीधे खरीद रहा गीता
जियो गीता संस्थान के लिए दी गई जमीन और गीता महोत्सव में 60 रुपये वाली गीता 600 रुपये में बेचे जाने के आरोपों पर स्वामी ज्ञानानंद ने सफाई दी। उन्होंने पत्रकारवार्ता में कहा कि पहले उन्होंने सरकार को ऐसा संस्थान बनाए जाने के लिए कहा था, लेकिन सरकार ने ऐसा निजी संस्थान ही बनाए जाने को प्राथमिकता दी। इसके बाद ही जियो गीता संस्थानम को नियमों के अनुसार ही जमीन दी गई। जब पूरा प्रोजेक्ट राज्यपाल के पास पहुंचा तो उन्होंने जमीन में विस्तार किया। स्वामी ने कहा कि प्रशासन दिल्ली स्थित पब्लिकेशन से स्वत: ही गीता खरीद कर मेले में बेचे जाने के लिए ला रहा है। उन्होंने प्रशासन को सिर्फ पब्लिकेशन बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न राजनीति में आने के इच्छुक है और न ही गीता से संबंधित मामलों के अलावा सरकार के किसी कार्य का हिस्सा बनते है। यहां तक कि दूसरे किसी भी मामले को लेकर हुई किसी सरकारी बैठक में वे शामिल नहीं हुए हैं। वह महज गीता को बढ़ावा देना चाहते हैं।
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