अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत-पालि-प्राकृत विभाग में 4 अगस्त से 10 अगस्त तक फैकल्टी लॉज में चल रहे संस्कृत सप्ताह के पांचवें दिन मंगलवार को संस्कृत गीत प्रतियोगिता एवं सद्योभाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ श्रेयांस द्विवेदी मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीकृष्ण संग्रहालय के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र सिंह राणा ने अध्यक्षता की। हिंदी विभाग के पूर्वाचार्य प्रो ब्रह्मानंद मुख्य वक्ता तथा संस्कृतानंद हरि सारस्वत विशिष्ट अतिथि रहे।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ ब्रह्मानंद ने नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि के अवसर पर उनका स्मरण करते हुए भारतीय भाषाओं के प्रति उनकी संवेदना एवं उनके बांग्ला साहित्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रवींद्रनाथ टैगोर के अंदर ललित कलाओं का अनूठा समन्वय था। टैगोर ने सांप्रदायिकता को राष्ट्र की कमजोरी बताते हुए एक ही परमात्मा का ज्ञान सबको प्राप्त करने का तथा भाईचारे का संदेश दिया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ श्रेयांस द्विवेदी ने कहा कि केवल आजीविका के लिए अध्ययन करने वाला कभी विद्वान नहीं बनता अपितु ज्ञान प्राप्ति के लिए अध्ययन करने वाला विद्वान बनता है। उन्होंने कहा कि यह मिथ्या धारणा है कि संस्कृत विषय पढ़ने से रोजगार नहीं मिलता, संस्कृत के अध्ययन से तो वृत्ति तथा ज्ञान दोनों ही प्राप्त होते हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र सिंह राणा ने कहा कि संस्कृत को जो समझ लेता है कि भारत की आत्मा को समझ सकता है। नासा के वैज्ञानिक भी संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता को समझ गए हैं और उसका प्रयोग कंप्यूटर के लिए करने पर विचार कर रहे हैं। प्रतियोगिताओं का निर्णय डॉ शिवानी, मनु आर्य एवं रविदत्त शर्मा ने किया। गीत प्रतियोगिताओं में केयू के संस्कृत विभाग के अंकित कुमार को प्रथम व दीपक को द्वितीय, श्रीकृष्ण चैतन्य शंकर महाविद्यालय कृष्णधाम की वेदवती को तृतीय व कर्मजीत को सांत्वना पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। सद्योभाषण प्रतियोगिता की कुवि संस्कृत विभाग के दीपक को प्रथम व जयरामविद्यापीठ के हर्ष को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ सुरेंद्र मोहन मिश्र ने संस्कृत के छात्रों से संस्कृत में वार्तालाप एवं संस्कृत में ही समस्त कार्य लेखन के लिए आह्वान किया। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ विभा अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया तथा संजय ने मंच संचालन किया। इस अवसर पर प्रो.आरपी मिश्रा, प्रो एएन मिश्र सहित समस्त शिक्षक एवं रीटा, विश्वम्भर, रीजा, रमेश सुखीजा, जयविन्द्र, संजय, पंकज, लखजीत तथा विभाग के सभी छात्र उपस्थित रहे।