अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. जसपाल कौर ने कहा कि इतिहास तथा अन्य समाज विज्ञान में उत्तर आधुनिकता की परवर्ती का उदय 1970-80 के दशकों में हुआ। वे वीरवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में चल रहे आईसीएसएसआर क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के प्रात: कालीन सत्र में दसवे दिन बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस परवर्ती के तहत विद्वानों ने यह कहा कि इतिहास तथा समाज विज्ञानों का विज्ञान होने का दावा स्वीकार नहीं हो सकता क्योंकि मुख्यत: तीन आधारों पर उनका यह दावा समस्याग्रस्त हो जाता है जो है तार्किकता, वस्तुनिष्ठता और विश्वसनीयता विशेषकर इतिहास में इतिहास जैसे विषय में वस्तुनिष्ठता का मुद्दा संदेहास्पद हो जाता है क्योंकि इतिहास में वस्तुनिष्ठता की समस्या विद्यमान होती है। अपराह्न सत्र में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के अर्थशास्त्र विभाग की अध्यक्षा प्रोफेसर संतोष नांदल ने शोध कार्य में चोरी तथा नकल की समस्या विषय पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम के अंत में कार्यशाला के निदेशक प्रोफेसर एसके चहल ने सभी मेहमानों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डा. नीरज कुमार, गुरलाल, गुरमीत आदि मौजूद रहे।