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नवरात्रों के उपलक्ष्य में मंदिरों में सजावट शुरू

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फोटो नंबर - 16 से 19
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आज विशाल शोभायात्रा के साथ भद्रकाली शक्तिपीठ में होगा नवरात्रोत्सव का आगाज
- शारदीय नवरात्रोत्सव पर भव्य रूप से सजाया श्रीदेवीकूप मां भद्रकाली मंदिर दरबार
- 18 अक्तूबर तक रहेगी शक्तिपीठ में नवरात्रोत्सव की धूम
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। 52 शक्तिपीठों में शामिल हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में शारदीय नवरात्र महोत्सव 10 से 18 अक्तूबर तक चलेगा। नवरात्रोत्सव के दौरान भजन संध्या के अलावा 17 अक्तूबर को विशाल भगवती जागरण होगा। इसी को लेकर मंदिर को रंग-बिरंगी लड़ियों, झंडियों एवं फूलों द्वारा भव्य रूप से सजाया गया है। महोत्सव का आगाज 10 अक्तूबर को दोपहर साढ़े 12 बजे होगा। प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज शोभायात्रा को झंडी देकर रवाना करेंगे।
पीठाध्यक्ष पं. सतपाल शर्मा ने बताया कि नवरात्रि उत्सव सुबह 5 बजे मंगल आरती से शुरू होगा। इसके बाद सुबह 8 बजे कलश पूजन, 9 बजे ध्वजारोहण होगा। दोपहर 12 बजे ज्योति पूजन में चंडीगढ़ से सहदेव शर्मा मुख्यातिथि एवं यजमान होंगे। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश धारण कर नगर की परिक्रमा करेंगी। लाल ध्वज, त्रिशूल, मधुर झांकियां, ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों की मधुर धुनों के बीच शोभायात्रा झांसा रोड से होते हुए रविदास चौक, रोटरी क्लब चौक, आहलूवालिया चौक, पुराना बस अड्डा, रेड रोड, नगली वाली कुटिया, रेलवे रोड, न्यू कालोनी, अमीन रोड, गुरुद्वारा छठी पातशाही, मेन बाजार, छोटा बाजार, गोशाला रोड और शेख चेहली मकबरा होते हुए मंबिदर परिसर पहुंचेगी। शोभायात्रा में मां की पावन ज्योति नगर को प्रकाशमान करते हुए शाम को मंदिर में प्रतिस्थापित होगी। ज्योति प्रतिस्थापना में सहकारिता राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर मुख्यातिथि होंगे। शाम 6.30 बजे आईएएस विवेक जोशी महाआरती में भाग लेंगे। पीठाध्यक्ष के अनुसार शोभायात्रा की छटा निराली होगी। यात्रा की समुचित व्यवस्था, दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं पूजन के विशेष प्रबंध किए गए हैं।
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मां भद्रकाली मंदिर की इतिहास एवं मान्यता
दक्ष यज्ञ विध्वंस करके भगवान शिव जब शोक स्वरूप मां सती का शव लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे तो उन्हें शोक मुक्त करने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाया, जिससे माता सती के शरीर के 52 हिस्से होकर भारतवर्ष के सुदूर स्थानों पर गिरने लगे। मां का दायां टखना कुरुक्षेत्र में गिरा। तभी से यह स्थान शक्तिपीठ में गिना जाता है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण औैर बलराम का मुंडन संस्कार भी इसी तीर्थ में हुआ। महाभारत युद्ध में विजय की कामना से पांडवों ने इसी मंदिर में मां भद्रकाली की पूजा की थी और विजयी होने पर घोड़े चढ़ाए थे। तबसे इस मंदिर में घोड़े चढ़ाने की परंपरा आरंभ हुई, जोकि अभी तक चल रही है।

इन मंदिरों में भी रहेगी नवरात्र की धूम
काली कमली आश्रम स्थित वैष्णवी भद्रकाली मंदिर, सन्निहित सरोवर स्थित महाकाली मंदिर, अष्टभुजा दुर्गा मंदिर एवं खेड़ी मारकंडा स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर, गीता धाम स्थित सर्वेश्वरी मंदिर इत्यादि में नवरात्र महोत्सव की धूम रहेगी।
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नवरात्रों के उपलक्ष्य में मंदिरों में सजावट शुरू
इस्माईलाबाद। नवरात्र शुरू होने से पहले कस्बे एवं क्षेत्र के मां दुर्गा मंदिरों में सफाई एवं सजावट कार्य जोरों पर रहा। बालापुर में स्थित बालासुंदरी मंदिर के पुजारी शंभूगिर ने बताया कि मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर में सभी तैयारियां पूरी हैं। वहीं सनातन धर्म मंदिर कमेटी के प्रधान विनोद पपनेजा ने बताया कि नए शिव मंदिर में स्थित मां दुर्गा के मंदिर को लाइट एवं फूलों से सजाया गया है।
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