भागवत कथा में सुनाया गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण का प्रसंग
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गो-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति की पिपली के श्रीराम मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कथावाचक पंडित अनिल शास्त्री ने गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण का प्रसंग विस्तार से सुनाया। इस मौके पर गोवर्धन पर्वत की झांकी पेश की गई। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाए गए।
कथा आयोजकों और श्रद्धालुओं ने भागवत पूजन करके दीप प्रज्ज्वलित किया। शास्त्री ने कहा कि क्रोध मनुष्य का शत्रु है। कई बार क्रोध और आवेश में आकर मनुष्य अनाप-शनाप बोल देता है। इससे गोपनीयता भंग हो जाती है। हमेशा परिस्थितियों के अनुसार समझौता कर लेना चाहिए। चापलूस व्यक्तियों से हमेशा सावधान रहना चाहिए। क्योंकि, ये दोनों पक्षों में लगे रहते हैं। यदि एक का बन कर रहोगे, तो समाज में सम्मान मिलेगा। याद रखो, एक साधे सब सधे, सब साधे सब जाए। जो व्यक्ति ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करता है, उसकी सफलता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहती। इस मौके पर सुनाए गए भजन महिमा भागवत धाम की पर श्रद्धालु झूम उठे। भागवत आरती में आचार्य श्रीकांत तिवारी, पुजारी बैजनाथ शर्मा, पंच विमला देवी, सुदेश रानी, रानी देवी, मोनिका अरोड़ा, अनिल अरोड़ा, विजय गांधी, लक्ष्मी नारायण शर्मा, नीरज मदान, पंच चरणजीत मेंहदीरत्ता, हेमंत वधवा, राजीव कौशिक, अवतार सैनी, डॉ. राजेश गौतम, भूपेंद्र चोपड़ा, धर्मपाल गर्ग, विरेंद्र परुथी, हरदेव जोशी, दयानंद दीक्षित, कृष्णा देवी, रानी सैनी, रेयान वधवा, कमल कक्कड़, पूजा कुकरेजा, सुमन गोयल और ऋतु वधवा मौजूद रहे।