अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
कुरुक्षेत्र स्थित बौद्ध स्तूप का तोरण द्वार भी ठीक वैसा ही दिखेगा, जैसा मध्यप्रदेश के सांची में दिखता है। सांची स्तूप यूनेस्को की विश्व धरोहर सूचि में शुमार है। इस तोरण द्वार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और हरियाणा पर्यटन विभाग के संयुक्त सहयोग से लगाया जा रहा है। भविष्य में देश-विदेश से कुरुक्षेत्र आने वाले सैलानियों और तीर्थ यात्रियों के लिए स्तूप का यह भव्य गेट सुंदर सेल्फी प्वाइंट बन सकता है।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी और ब्रह्मसरोवर के प्राचीन शेरों वाले घाट के पीछे स्थित यह बौद्ध स्तूप स्थल आने वाले समय में विशेष आकर्षण का केंद्र हो सकता है। इस गेट को बंगाल के कारीगरों ने तैयार किया है। सांची के स्तूप की रेपलिका तैयार करने वाली टीम के प्रमुख बंगाल के कृष्णा नगर निवासी विश्वजीत मजूमदार ने बताया कि उनका लक्ष्य गीता जयंती से पहले इस गेट का काम पूरा करना है। इसे तैयार करके यहां लाया गया था। इसके बाद कुरुक्षेत्र बौद्ध स्तूप स्थल के एंट्री गेट पर स्थित पत्थर के दो स्तंभों पर इसे खड़ा किया गया। उल्लेखनीय है कि यूपीए सरकार के दौरान बौद्ध सर्किट की घोषणा हुई थी। इसके बाद यह काम लंबे ठंडे बस्ते में चला गया। वर्तमान सरकार में इस काम को गति मिली है। बता दें कि कुरुक्षेत्र भी उन स्थलों में शामिल हैं, जहां महात्मा बुद्ध के चरण पड़े थे।
कुरुक्षेत्र से पहले साउथ कोरिया में लगा था ऐसा तोरण द्वार
विश्वजीत मजूमदार ने बताया कि तोरण द्वार पर जातक कथाओं को उकेरा गया है। इस गेट को फाइबर ग्लास से बनाया गया है। कुरुक्षेत्र में लगने वाले गेट की ऊंचाई 35 फुट और चौड़ाई 28 फुट होगी। कुरुक्षेत्र से पहले वह ऐसा गेट साउथ कोरिया के सियोल इंटरनेशनल बुक फेयर में लगा चुके हैं। यह बुक फेयर इंडिया थीम पर आधारित था। तब इस गेट को लगाने का उन्हें ऑर्डर मिला था। मजूमदार ने बताया कि कुरुक्षेत्र में इस गेट का काम पूरा करने के लिए एक दर्जन से अधिक कारीगर जुटे हैं। हरियाणा टूरिज्म के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश्वर शर्मा और अन्य अधिकारी भी तोरण द्वार के काम का जायजा ले चुके हैं।
हरियाणा टूरिज्म के एमडी बोले जल्द पूरा होगा काम
हरियाणा टूरिज्म के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश्वर शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि कुरुक्षेत्र में स्थित बौद्ध स्तूप का जीर्णोद्धार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की देखरेख में हो रहा है। इस स्तूप स्थल को आकर्षण बनाने के लिए इसके एंट्री गेट पर मध्यप्रदेश में स्थित सांची स्तूप के तोरण की तर्ज पर यहां भी तोरण द्वार बनाया जा रहा है।