अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
निजी बसों को परमिट दिए जाने के विरोध में पांच दिन बाद शुक्रवार को रोडवेज कर्मियों ने फिर चक्का जाम कर दिया। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पहले दो घंटे तक जीएम की ओर से मिलने वाले जवाब की इंतजार की, नहीं मिल पाया तो कर्मचारी एकाएक ही हड़ताल पर उतर आए और करीब चार घंटे तक बसें बंद रही। कर्मचारियों ने मुख्य द्वार के समीप ही धरना देकर प्रदेश सरकार व विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
हड़ताल का निजी बस संचालकों व अन्य वाहन चालकों ने जमकर फायदा उठाया तो एक भी निजी बस दिन भर बस अड्डे के अंदर नहीं घुस पाई। 3 जून को कर्मचारियों द्वारा दिन भर हड़ताल की गई थी, जिस दौरान सरकार की ओर से आश्वासन मिला था कि निजी बसें अगले निर्णय तक नहीं चलाई जाएंगी और नई नीति भी बनाई जाएगी तो उस दौरान हड़ताल वापस ले ली थी। लेकिन शुक्रवार को जब कर्मचारियों को चार ओर नई बसों को परमिट दिए जाने की सूचना लगी तो सभी आठों यूनियन एकजुट हुई और कर्मचारी हड़ताल पर उतर आए। इस दौरान कर्मचारियों को मायाराम, नरेश साकरा, सुल्तान सिंह, अरूण अत्री, शशि भूषण, सुरेंद्र टोपी, जसपाल भटटी, सुरेंद्र सिंह लाठर व नरेश कुमार सहित सभी यूनियन प्रधान व अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया और ऐलान किया कि सरकार ने फिर वादाखिलाफी की तो वे चक्का जाम कर देंगे। इस दौरान नरेश कुमार, बलवंत सिंह, सुरेंद्र, मूलचंद, पवन व नवीन शर्मा सहित भारी संख्या में कर्मचारी धरने में शामिल रहे। उधर आज भी रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को कई अन्य संगठनों ने भी समर्थन किया। हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ संबंधित भारतीय मजदूर संघ के प्रांतीय प्रवक्ता नरेश कुमार ने बताया कि सरकार व विभाग के अधिकारी जानबूझ कर उन्हें हड़ताल करने पर मजबूर कर रहे है। यहां तक कि हर रोज निजी बसों के नए परमिट जारी किए जा रहे है जबकि पहले से ही निजी बसें नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रही है।
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विभाग व सरकार को दी है जानकारी : जीएम
जीएम रोहताश सिंह का कहना है कि कर्मचारियों ने फिर से अचानक हड़ताल कर दी, जिसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी है। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद बसें शुरू हो गई और यात्रियों को अधिक परेशानी नहीं हुई।
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कैथल नहीं पहुंचे तो नहीं मिलेगी मजदूरी: मोहन
दिल्ली से टॉवर का सामान लेकर कैथल जा रहे मोहन सिंह का कहना था कि वे कुरुक्षेत्र आकर हड़ताल के चलते फंस गए है। वे कैथल नहीं पहुंचे तो उन्हें मजदूरी नहीं मिल पाएगी और टॉवर का काम भी प्रभावित होगा। कैथल से वापस दिल्ली भी लौटना है और अब क्या होगा कुछ पता नहीं। गांव रोहटी निवासी वृद्व महिला मोहनी का कहना था कि वह अपने परिवार के तीन छोटे बच्चों व अन्य सदस्यों के साथ करनाल में एक कार्यक्रम से लौटे थे। अब उन्हें पहले झांसा जाना था, जहां से वे अपने घर लौटते, लेकिन बसें बंद होने पर अब घर कैसे पहुंचे कुछ समझ नहीं आ रहा।
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पिहोवा में रोडवेज कर्मचारियों ने किया चक्का जाम
पिहोवा। नई प्राईवेट बसे चलने के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने शुक्रवार सुबह ही रोडवेज की बसों का चक्का जाम कर दिया और सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। चक्का जाम की सूचना मिलते ही मौके एचएचओ प्रतीक कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। सब डिपो प्रधान निशान ने बताया कि रोडवेज कर्मचारी लगातार नए निजी परमिटों का विरोध कर रहे है। इसके बावजूद भी आज सब डिपू में 5 नई निजी बसे चलाई जा रही है। जो कि सरासर गलत है और रोडवेज कर्मचारी इसका विरोध कर रहे।