कोर्ट के आदेशों के बाद कुंटिया में बढ़ी बेचैनी, पिछले शनिवार की तरह धरने पर नहीं बैठे कर्मचारी
- दिनभर चला बैठकों का दौर, आंदोलन के लिए सेकेंड लाइन तैयार, पांडेय होंगे चेयरमैन
- बोले, कुलपति ने विश्वविद्यालय में पैदा किए आपातकालीन हालात
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। कुंटिया की हड़ताल के चलते शुक्रवार को कोर्ट के स्टे ऑर्डर से केयू के गैर शिक्षक कर्मचारी नेताओं की बेचैनी बढ़ चुकी है। अब इस आंदोलन को आगे जारी रखने के लिए सेकेंड लाइन तैयार की गई है। इधर शनिवार को छुट्टी के बावजूद दिन भर बैठकें चलीं। कुंटिया कार्यालय में हुई बैठक में आंदोलन को जारी रखने के लिए 21 सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। चेयरमैन कृष्ण कुमार पांडेय को बनाया गया है। छह लोगों को संचालन का जिम्मा सौंपा गया है। चेयरमैन कृष्ण कुमार पांडेय के नेतृत्व में यह कमेटी केयू के गैर शिक्षक कर्मचारी नेताओं को साथ लेकर आंदोलन जारी रखेगी। इसी के साथ आगे के आंदोलन को लेकर कानूनविदों से भी राय ली गई है, ताकि किसी भी तरह से कोर्ट की अवमानना जैसे मामले बचा जा सके। शनिवार को बड़ी संख्या में कुंटिया नेता एवं सदस्य संगठन कार्यालय पर एकत्रित हुए और केयू प्रशासन के रवैये पर रोष जताते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। गौरतलब है कि कुंटिया की अनिश्चितकालीन हड़ताल 11वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। केयू प्रशासन के रवैये को लेकर भड़के कर्मचारियों ने कुलपति पर विश्वविद्यालय परिसर में आपातकालीन जैसे हालात पैदा कर दिए है। उपस्थित कर्मचारियों को संबोधित करते हुए पूर्व प्रेस सचिव सुरेंद्र मलिक, पूर्व कोषाध्यक्ष रामेश्वर सैनी व पूर्व प्रेस सचिव नरेंद्र सारसा ने दावा किया कि कोर्ट के आदेशानुसार कुंटिया के केवल 17 कर्मचारियों के खिलाफ 50 मीटर के दायरे में धरने-प्रदर्शन में भाग लेने पर रोक लगी है,जबकि केयू के अन्य गैर शिक्षक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर केयू प्रशासन के खिलाफ सभी प्रकार के धरना-प्रदर्शन में भाग ले सकते हैं। इन्होंने कहा कि कुंटिया के कर्मचारियों को घबराने की जरूरत नहीं है। जब तक कुलपति उनके हकों को नहीं देंगे तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल इसी तरह चलती रहेगा । कुंटिया नेताओं ने कहा कि कुलपति ने विश्वविद्यालय में आपातकालीन जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा हैै जो कर्मचारी बोलते हैं उनके खिलाफ कोर्ट का सहारा लेकर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं ,लेकिन कुंटिया नेतृत्व अब नए जोश के साथ मैदान में उतरेगा। अपने हकों को लेने के लिए उन्हें जो भी कुर्बानी देनी पड़े उससे पीछे नहीं हटेंगे।
संशय में रहे कर्मचारी, धरना स्थल पर खाली रहा टेंट
कोर्ट के आदेशों के बाद कुंटिया सदस्य शनिवार को संशय में रहे, जिसके चलते वे धरना स्थल पर भी नहीं बैठे। जहां धरना स्थल पर खाली टेंट लगा रहा, कुंटिया नेताओं का कहना था कि शनिवार को छुट्टी के चलते धरना नहीं दिया गया। बता दें कि गत सप्ताह शनिवार को भी कुंटिया ने छुट्टी के बावजूद धरना दिया था। वहीं इस शनिवार को भले ही कुंटिया सदस्यों ने रोष जताया, इसके बावजूद शायद यह कोर्ट के आदेशों का ही असर रहा कि कुंटिया की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में अगुवाई करने वाले किसी नेता व कर्मचारी के नाम का जिक्र तक नहीं किया गया।
नहीं मिली कोर्ट के आदेशों की कॉपी
रोष जता रहे कर्मचारियों ने कहा कि अभी तक उन्हें पास कोर्ट के आदेशों की कॉपी नहीं मिली है। अब सोमवार को ही यह कॉपी मिलेगी, जिसके बाद आदेश पूरी तरह स्पष्ट हो पाएंगे।
आज विजय ग्राउंड में जुटेंगे कर्मचारी
कर्मचारियों ने केयू प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि कुंटिया का अपना एक इतिहास है। अगर जरूरत पड़ी तो कुंटिया अपना इतिहास दोहराने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने सभी कर्मचारियों का आह्वान किया कि 10 सितंबर दिन सोमवार को कुंटिया के सभी कर्मचारी विजय ग्राउंड में इकट्ठे होंगे। उन्होंने कहा कि वे अपने जायज हकों के लिए कुंटिया कभी पीछे नहीं हटी थी और न कभी हटेगी।
अब केयू से बाहर भी धरना दे सकते हैं कर्मचारी, कई घंटे चलती रही गुप्त बैठक
केयू प्रशासन द्वारा 17 कर्मचारियों के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किए जाने व कोर्ट द्वारा शुक्रवार को उनकी गतिविधियों पर स्टे लगाए जाने के बाद शनिवार को कर्मचारी गुप्त बैठक करते रहे। इसमें कर्मचारी अदालत के आदेशों की पालना करते हुए अपना आंदोलन चलाने को लेकर रणनीति बनाते रहे। कई कर्मचारियों की मानें तो उक्त 17 कर्मचारी विश्वविद्यालय के 50 मीटर दायरे से बाहर कर्मचारियों से बैठक कर सकते हैं तो आंदोलन भी चला सकते हैं। ऐसे में ये कर्मचारी विश्वविद्यालय से बाहर धरना शुरू कर आंदोलन शुरू कर सकते हैं। इस पर भी अधिवक्ताओं से राय ली जाती रही।