हड़ताल पर गए 1350 कर्मियों का 22 दिन का वेतन काटेगा केयू, जो हड़ताल छोड़ काम पर लौटे उन पर नरम
- कुंटिया की संगठन शक्ति बनाम केयू प्रशासन की सख्ती : प्रशासन ने
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। केयू प्रशासन हड़ताल पर गए कुंटिया के 1350 कर्मचारियों का वेतन काटने की पूरी तैयारी कर चुका है। हालांकि उन कर्मचारियों के लिए लचीला रवैया भी अपनाने जा रहा है, जोकि हड़ताल छोड़ ड्यूटी पर लौटेंगे। वहीं उन कर्मचारियों का वेतन अब कटना तय है, जो केयू प्रशासन के नो वर्क नो पे के आदेशों को हवा में उड़ाते हुए ड्यूटी से नदारद हैं। कुल मिलाकर केयू प्रशासन कुंटिया को अपनी शक्ति और सख्ती का अभास कराने के मूड में है।
हरियाणा की मजबूती कर्मचारी यूनियन में शुमार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय गैर शिक्षक कर्मचारी संघ (कुंटिया) ने पिछले वर्षों में कई बार केयू प्रशासन को झुकने पर विवश किया है। वहीं पदभार संभालने के चंद घंटों बाद ही कुंटिया की अनिश्चितकालीन हड़ताल के फैसले के बाद नो वर्क नो पे का फरमान केयू की नई रजिस्ट्रार ने निकाला था। जिसकी परवाह किए बगैर कुंटिया ने हड़ताल रद्द नहीं की। लिहाजा इस गैरफरमानी का नतीजा कुंटिया सदस्यों को अगले दिनों सैलरी कर कैंची लगने से भुगतना पड़ सकता है। केयू प्रशासन ने इसकी रूपरेखा तैयार कर दी है। बताया जा रहा है कि 2018 में केयू यह दूसरा मौका है जब केयू प्रशासन को अनिश्चितकालीन हड़ताल से निपटने के लिए नो वर्क नो पे का आदेश जारी करना पड़ा, लेकिन पहली बार 6 मार्च 2018 के इस आदेश के बावजूद कई दिनों तक हड़ताल जारी रखी, इसके बावजूद 1350 कर्मचारियों में से किसी भी कर्मी का वेतन नहीं काटा गया था। केयू प्रशासन ने इस बार सख्त रवैया दिखाते हुए पिछले महीनों में हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की दफ्तर में गैरमौजूदगी को चेक कराने के बाद ही इनकी सैलरी बनाने की निर्देश दे दिया है। इसकी पुष्टि केयू प्रवक्ता ने भी की है। पता ये भी चला है कि इस आदेश के बाद करीब 1350 कर्मचारियों की सैलरी में से 20 से 22 दिन का वेतन कटेगा। इस प्रक्रिया व अन्य कारणों से केयू के गैर शिक्षक कर्मचारियों की सैलरी नहीं बनी। सिर्फ आपात सेवाओं में शामिल, स्वास्थ्य, बिजली और सेनिटेशन शाखाओं के कर्मचारियों की सैलरी बन सकी है, क्योंकि केयू की इन शाखाओं के कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं होते।
एरियर बस बहाना, मकसद तो प्रमोशन पाना
केयू प्रशासन के एक अधिकारी ने इस हड़ताल की पोल खोलते हुए कहा कि कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से प्रमोट हुए थे। लेकिन अब अगली प्रमोशन में टाइपिंग का अनुभव और इसका टेस्ट पास करना अनिवार्य है। रामकुमार गुर्जर और अन्य कुछ कर्मचारी बगैर टेस्ट पास किए प्रमोशन चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग का एरियर एक बहाना है, जबकि असली मामला केयू प्रशासन पर दबाव बनाकर प्रमोशन पाना है।
सरकारी ग्रांट के बिना केयू प्रसासन जेब से नहीं दे सकता एरियर : वीसी
वीसी डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा का कहना है कि केयू प्रशासन सातवें वेतन आयोग का एरियर अपनी जेब से नहीं दे सकता। इसके लिये केयू प्रशासन को सरकार से मिलने वाली 100 करोड़ की ग्रांट का इंतजार है। इस ग्रांट के मिलने के बाद ही 10 करोड़ रुपये का एरियर दिया जा सकता है। इसके अलावा डीए के एक करोड़ कर्मचारियों को हड़ताल से एक दिन पहले ही जारी किए जा चुके हैं। सिर्फ वरिष्ठता की वजह से बगैर टाइपिंग टेस्ट व दूसरे नियमों को पूरा किए बगैर प्रमोशन नहीं संभव नहीं है। अगर बगैर टाइपिंग टेस्ट पास किए किसी भी यूनिवर्सिटी में प्रमोशन का मामला संज्ञान में है तो उसका प्रमाण प्रस्तुत करें। केयू भी उन्हें प्रमोशन देने को तैयार है।
क्या दे दी जाए नियमों की आहुति
केयू के वीसी का कहना है कि केयू की गरिमा और इस प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए जो मानदंड़ है केयू प्रशासन उन्हें पूरा कराने के लिये वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि केयू को ए ग्रेड प्लस का सम्मान दिलाने में केयू के शिक्षकों और शिक्षकों का बड़ा योगदान है, लेकिन चंद लोगों को संतुष्ट करने के लिए नियमों की आहुति नहीं दी जा सकती। कुलपति होने के नाते उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि वे जिम्मेदारी को समझें और ड्यूटी पर लौट कर उन समस्याओं को दूर करें,जिसकी वजह से विद्यार्थी परेशान हैं।
11 में से 4 की प्रमोशन हो चुकी है
वीसी के अनुसार केयू के जिन 11 कर्मचारियों की प्रमोशन की सूची केयू प्रशासन के सामने आई थी, उनमें से 4 कर्मचारी ही प्रमोशन के पात्र पाये गये थे। लेकिन कुंटिया उन कर्मचारियों की भी प्रमोशन की डिमांड कर रही है, जिनकी योग्यता नहीं बनती। एआर और डीआर पदोन्नति के लिए शैक्षणिक योग्यता पीजी में 55 प्रतिशत अंक चाहिए, जबकि कुंटिया के नेता 10वीं और 12वीं पास कर्मचारियों को भी एआर और डीआर बनाने का दबाव बना रहे हैं।